टुकड़े-टुकड़े गैंग में बौखलाहट
   Date12-Aug-2019

अनुच्छेद 370 एवं 35(ए) को खत्म करने से कांग्रेस, कम्युनिस्ट और टुकड़े, टुकड़े गेंग के नेता बौखलाकर आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा और रा.स्व.संघ के एजेंडे को लागू कर रहे हैं। यह सच्चाई है कि भाजपा-संघ के एजेंडे में न केवल 370 रहा है, बल्कि राम मंदिर निर्माण का संकल्प है और वे सब संकल्प है जो सनातन राष्ट्र भारत को महानता के शिखर पर पहुंचाना चाहते हैं। यह राष्ट्र चिंतन का राष्ट्रवादी एजेंडा है। संघ शाखा पर जीवन राष्ट्र को समर्पित करने की प्रेरणा मिलती हैं, वे सब संकल्प भाजपा और संघ के एजेंडे में है, जो भारत को महानता के शिखर पर पहुंचाने में सहायक है, जो इन संकल्पों का विरोध करते हैं, उनके खिलाफ भाजपा-संघ ने सतत संघर्ष किया है। भाजपा के संस्थापक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर की अलग पहचान के अनुच्छेद 370 का विरोध किया, राष्ट्रव्यापी आंदोलन किया और शेख अब्दुल्ला की जेल में उनका बलिदान हो गया। उनके बलिदान के बाद देश में यह नारा गूंजा कि जहां हुए बलिदान मुखर्जी वह कश्मीर हमारा है। राष्ट्रवादी विचार का नेतृत्व का चाहे सरकार पर वर्चस्व नहीं रहा हो, लेकिन राष्ट्रवादी विचारों का अनुष्ठान सदा चलता रहा। संघ के विचारों से प्रेरित कई लोगों ने समाज सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। नानाजी देशमुख प्रारंभ में संघ के प्रचारक रहे, बाद में राजनीति में सक्रिय हुए और बाद में राजनीति को त्याग उन्होंने समाज सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। नानाजी को मरणोपरांत भारतरत्न के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया है। गोवा मुक्ति आंदोलन जनसंघ ने किया, उसमें बलिदान देने वाले राजाभाऊ महाकाल भी संघ के स्वयंसेवक थे। प्राकृतिक आपदा में सेवा कार्यों में संघ के स्वयंसेवक अग्रिम पंक्ति में खड़े दिखाई देते। दीप से दीप जलाते रहो की तरह पूरा देश राष्ट्रवादी दीपों से आलोकित हो रहा है, इन प्रकाश स्तंभों के खिलाफ जिन्होंने टकराने की हिम्मत की तो वह जलकर नष्ट हो जाएगा। संघ तो वैचारिक अनुष्ठान में लगा हुआ है, संघ से प्रेरित स्वयंसेवकों ने छात्रों, श्रमिकों के संगठन तैयार किए, विद्या भारती के माध्यम से शिक्षा को संस्कृति से जोडऩे वाले शैक्षणिक संस्थान खड़े किए। वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से वनवासी क्षेत्र में कर्इं सेवा प्रकल्प चल रहे हैं। राष्ट्रवादी लेखक, पत्रकारों की पीढ़ी भी तैयार हुई है। इन सबके कारण आज देश में चारों ओर राष्ट्रवादी विचार प्रवाह दिखाई दे रहा है। अनुच्छेद 370 राष्ट्र की अखंडता में बाधा है, इसलिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से इसे दफन कर दिया। जो देश विरोधी नेता कहते थे कि यह प्रावधान हटने से देश में आग लग जाएगी, यह ऐसा नेतृत्व है, जो जनता के द्वारा नकारे जाने के बाद पश्चाताप की आग से जल रहा है। जब गत पांच अगस्त को शिवालयों में ओम नम: शिवाय की गूंज सुनाई दे रही थी, श्रावण की बौछारों के बीच कावडिय़े पवित्र जल शिवलिंग पर अर्पित कर रहे थे, भगवान शिव की कृपा से उसी दिन लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर में 370 के खात्मे का इतिहास लिखा जा रहा था।
दृष्टिकोण
कश्मीर में आग लगाने के मंसूबे
देश में ऐसे विघ्नसंतोषी लोग हैं जो शेर-शेर आया कह कह लोगों को डराने-भड़काने का काम करते हैं, तीन तलाक कानून बनाने के समय भी ऐसा प्रचार किया गया कि इससे मजहबी कट्टरपंथी नाराज हो जाएंगे, यह मुस्लिम पर्सनल लॉ विरोधी कानून है। लेकिन कानून लागू हो गया है, मुस्लिम महिलाओं ने इसका तहेदिल से स्वागत किया। मुल्ला मौलवी इसलिए नाराज हैं कि उनका धंधा चौपट हो गया, लेकिन मुस्लिम महिलाओं को ऐसा आभास हुआ कि वे तीन तलाक की बेडिय़ों से मुक्त हो नई आजादी का अनुभव कर रही है। इसी तरह कांग्रेस, कम्युनिस्ट और टुकड़े-टुकड़े गेंग के नेता 370 के खात्मे से कश्मीर में हिंसा की आग लगने की प्रतिक्षा कर रहे थे, ये ऐसे भूतप्रेत हैं, जो ऐसी आग में जश्न मनाते है। लेकिन न आग लगी और न किसी के हाथ में पत्थर दिखाई दिए। जुम्मे की नमाज के बाद मस्जिद के बाहर निकलते ही भीड़ से पथराव शुरू होता था, पाकिस्तान के झंडे फहराते दिखाई देते थे। लेकिन श्रीनगर में जुम्मे की नमाज शांति से सम्पन्न हुई। न आग लगी और न कहीं पथराव हुआ। 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास की संभावना बढ़ी है, उससे पाकिस्तान डरा हुआ है। उसे लगने लगा है कि वह अब कश्मीर में आतंक का खेल नहीं खेल सकेगा। पाकिस्तान को नई सच्चाई को स्वीकार कर झूठ फैलाना बंद करना होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अनुच्छेद 370 को हटाने के पीछे के कारण स्पष्ट किए है। यह कदम राज्य में विकास को गति देने वाला और आर्थिक हितों को बेहतर करने वाला होगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि 370 को हटाने का मामला पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है।