कांग्रेस दुर्गति की ओर अग्रसर
   Date10-Aug-2019

अनुच्छेद 370 एवं 35 (ए) की समाप्ति के बाद प्रतिक्रियाएं स्वाभाविक हैं। संसदीय प्रक्रिया के बारे में बहस हो सकती है। सरकार को किसको विश्वास में लेना चाहिए, इस पर बहस हो भी रही है। विडंबना यह है कि राष्ट्र की मूलधारा से हटकर जो राजनीति की जा रही है, जिस कांग्रेस का राजनीतिक वर्चस्व 55 वर्ष तक रहा है, वह राष्ट्र के बारे में अनर्गल बयानबाजी करे, ऐसी बाते कहे, जो भिखारी पाकिस्तान को नीति के समर्थन में खड़ी दिखाई दे। संसद पर तीन तलाक पर कानून पर कांग्रेस कट्टरपंथी मुल्ला-मौलवियों का समर्थन करे। अनुच्छेद 370 की बहस में कांग्रेस नेता अधिरंजन चौधरी का तर्क यह रहा कि यह मामला द्विपक्षीय है, संयुक्त राष्ट्र संघ में इस मामले की मानीटरिंग की जा रही है। आश्चर्य यह कि कांग्रेस के नेता को न इस मामले का अध्ययन है या उनके मुंह से निकली बातें कांग्रेस की अधिकृत नीति है। कांग्रेस की सरकार भी राष्ट्र संघ की मानीटरिंग को नकार चुकी। कांग्रेस नेतृत्व ने भी अनु. 370 के बारे में कहा कि यह अनुच्छेद अपने आप घिसते-घिसते समाप्त हो जाएगी। संविधान और कांग्रेस सरकारों ने माना कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, इसके विपरीत अधिरंजन की बात कई कांग्रेसियों के भी गले नहीं उतर रही है। कांग्रेस के पूर्वज भी चाहे सेकुलर नीति की बातें करते हो, लेकिन उनकी नीतियां भी राष्ट्रीय सरकारों की थी। राष्ट्रवादी विचार प्रवाह के साथ जो पार्टी जुड़ी रही, उसको जनता का समर्थन मिलता रहा। लोकमान्य तिलक, सुभाषचंद्र बोस, गांधीजी ने राष्ट्रीय विचारों के साथ राजनीति को जोड़ा। सरदार पटेल ने भी राष्ट्रवादी नीतियों को न केवल कांग्रेस की मूल नीति बताया, बल्कि उन नीतियों को लागू किया। साढ़े पांच सौ से अधिक रियासतों को भारतीय संघ से मिलाया। हैदराबाद, जूनागढ़ की रियासतों ने आंखें दिखाई तो सरदार पटेल ने उनकी आंखें नोचने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। सरदार पटेल के सोच के केंद्र में राष्ट्र की एकता-अखंडता प्रमुख थी। इसी राष्ट्रवादी विचार से उन्होंने हैदराबाद के खिलाफ सैनिक कार्रवाई की। हालांकि पं. नेहरू सेकुलर नीति के पैरोकार रहे। इन दो नीतियों का प्रभाव कांग्रेस में रहा है, लेकिन दोनों नीतियों के केंद्र में देश था। विडंबना यह है कि 370 के हटने के बाद भी कांग्रेस की स्थापित नीतियां राष्ट्र केंद्रित है और न राजनीतिक हित की दृष्टि से। हालांकि कांग्रेस में भी एक ओर राष्ट्रवादी लोग भी हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया, जर्नादन द्विवेदी और कर्णसिंह जैसे प्रभावी नेता 370 को हटाने के पक्ष में हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजा हरिसिंह के पुत्र डॉ. कर्णसिंह ने जम्मू-कश्मीर से 370 को समाप्त करने की मोदी सरकार की नीति का समर्थन किया है। यह कथन कांग्रेस कार्य समिति से उलट है। राज्यसभा में कांग्रेस के व्हीप भुवनेश्वर कालवी ने कांग्रेस की नीतियों को राष्ट्रहित में बताते हुए उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। अब चर्चा है कि वे भाजपा में शामिल हो सकते हैं। चिंता इस बात की है कि कांग्रेस में जो राष्ट्रवादी विचारों के लोग हैं, वे भी कांग्रेस से नाता तोड़ रहे हैं।
हाल ही में डॉ. प्रणब मुखर्जी जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राष्ट्रपति है, उनको भारत के सर्वोच्च सम्मान भारतरत्न से नवाजा गया। राष्ट्रपति भवन के समारोह में सोनिया-राहुल का वाड्रा में से कोई दिखाई नहीं दिया। ऐसा लगता है कि सोनिया-राहुल की कांग्रेस की नीतियां अपने ही दुर्भाग्य की ओर अग्रसर हो रही है। 370 के समर्थन में पूरा देश खड़ा है, लेकिन कांग्रेस विरोध में है। यही नहीं कांग्रेस के अधिकृत नेता, प्रवक्ता भी वही बात कह रहे है। जिसमें दुश्मन देश पाकिस्तान को बल मिल रहा है। कांग्रेस को यह बात ध्यान में रखना होगा कि भारत की जनता राष्ट्र विरोधी नीतियों के साथ कभी नहीं रही।
दृष्टिकोण
जम्मू-कश्मीर के सामने सुनहरा भविष्य
अनुच्छेद 370 अब इतिहास की वस्तु हो गई है। कश्मीर घाटी की स्थिति भी तेजी से सामान्य हो रही है। सरकार और देशभक्त जनता भी चाहेगी कि घाटी की जनता की आवाज भी भारत की आवाज के साथ रहे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राष्ट्र के नाम संदेश भी इस दृष्टि से महत्व का है। श्री मोदी का विश्वसनीय नेतृत्व उन्होंने जो कहा, वह करके दिखाया। उन्होंने अपने देश में कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के सामने सुनहरा भविष्य है। अनुच्छेद 370 को आतंकवाद, परिवारवाद और भ्रष्टाचार बढ़ाने वाली करार देते हुए मोदी ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया। करीब 40 मिनट के उद्बोधन में उन्होंने जम्मू-कश्मीर जनता की हर चिंता को छूने और उसे दूर करने का प्रयास किया। उन्होंने आशा और उम्मीद का संदेश देते हुए कहा कि हालात सामान्य होते ही जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलेगा। हालांकि लद्दाख केंद्र शासित ही बना रहेगा। कश्मीर को आतंकवाद से मुक्त कराकर धरती का स्वर्ग बनाएंगे। जम्मू-कश्मीर के सभी कर्मियों को केंद्र के समान सुविधाएं मुहैया होंगी। जम्मू-कश्मीर में बसे पाक के शरणार्थियों को वोट या चुनाव लडऩे का अधिकार मिलेगा। एक ओर देशभक्त जनता और मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति करने में जुटी है। दूसरी ओर कांग्रेस नेता हिंसा की आग भड़काने में लगे हैं।