अशिष्टता का परिणाम
   Date10-Aug-2019

प्रेरणादीप
महाभारत एक-दूसरे को सम्मान न दे पाने की ही भीषण प्रतिक्रिया के रूप में उभरा था। बचपन में दुर्योधन राजमद में पांडवों को सम्मान न दे सका। भीम सहज प्रतिक्रिया के रूप में अपने बल का उपयोग करके दुर्योधन को अपमानित-तिरस्कृत करने लगे। द्रौपदी सहज परिहास में भूल गई कि दुर्योधन को 'अंधे के बेटे अंधेÓ संबोधन से अपमान का अनुभव हो सकता है। दुर्योधन द्वेषवश नारी के शील का ही महत्व भूल गया तथा द्रौपदी को भरी सभा में अपमानित करने पर उतारू हो गया। यही सब कारण जुड़ते गए तथा छोटी-छोटी शिष्टाचार की त्रुटियों की चिनगारियां भीषण ज्वाला बन गई। यदि परस्पर सम्मान का ध्यान रखा जा सका होता, अशिष्टता पर अंकुश रखा जा सका होता तो स्नेह बनाए रखने में कोई कठिनाई न होती। भीष्म पितामह और वासुदेव जैसे युग पुरुषों के प्रभाव का लाभ मिल जाता तथा एक महासमर टल जाता।