पौधारोपण से संभव धरती के विनाश पर रोक
   Date01-Aug-2019

धर्मधारा
(गतांक से आगे)
वि गत 30 वर्षों से पृथ्वी पर सड़कों का, भवनों का निर्माण जिस गति से हुआ है, जिसके चलते वृक्षों की अंधाधुन कटाई हुई है, जिसके फलस्वरूप धरती का पर्यावरण व मानव जीवन भी प्रभावित हुआ है। जितने वृक्ष काटे गए, उनकी जगह 10 प्रतिशत वृक्ष भी नहीं लगाए। नर्मदा किनारे म.प्र. के मुख्यमंत्री द्वारा नर्मदा बचाओ, धरती सजाओ योजना के अन्तर्गत 6 करोड़ वृक्ष लगाने का संकल्प कार्य सम्पादित हुआ। म.प्र. सरकार की इस योजना को पूरा करने हेतु मुख्यमंत्री तो कृत संकल्प रहे पर यथार्थ में यह योजना पूर्णता प्राप्त किए बगैर ही दम तोड़ गई। इसके लिए देशवासियों का वृक्षों के प्रति प्रेम का अभाव ही एक कारण रहा है।
वर्तमान में नगरों, महानगरों यहां तक कि कस्बों और देहातों में छोटे-बड़े उद्योग धंधों की बाढ़ सी आ रही है। सड़कों पर दौड़ते डीजल-पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की भरमार उनसे निकलने वालाी धुआ, तरह-तरह की विषैली गैसे आदि निकल कर पर्यावरण में फैल जाती है। वृक्षों के अभाव में उन गैसों का मानव जीवन पर जो बुरा प्रभाव पड़ रहा है, जिसके चलते धरती पर यथा समय उचित वर्षा का न होना, धरती का तापमान बढऩा, जल स्तर में कमी प्रमुख कारण है। पेड़-पौधे उन विषैली गैसो जो उद्योगों द्वारा बहुत ज्यादा मात्रा में वायुमण्डल में घुलने से रोकने का जो माध्यम है, वह है धरती पर खड़े पेड़-पौधे। ये ही वायुमण्डल और वातावरण में जहरीली गैसों के दुष्परिणामों से रक्षा कर पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाते हैं। राख और रेत आदि के कणों को भी ऊपर जाने से रोकते हैं। इस सारी बातों से अंजान बन आज का स्वार्थी मानव चन्द रुपयों के खातिर पेड़-पौधों की अंधाधुन कटाई करता जा रहा है। एक तरफ वास्तु शा के भ्रामक प्रचार के कारण भी अज्ञात भय के कारण कई पेड़ धराशायी हो गए है। जो हमारे लिए चिंता और चिंतन का विषय है। यदि हाल रहा तो ओजोन परत के प्रदूषित होकर फट जाने का खतरा भी बढ़ता रहा है। (क्रमश:)