राहुल ने पटना की अदालत में किया आत्मसमर्पण, जमानत पर छूटे
   Date07-Jul-2019

पटना ठ्ठ 6 जुलाई (वा)
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जातिगत टिप्पणी को लेकर बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की ओर से दायर मानहानि के एक मामले में बिहार की राजधानी पटना स्थित विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया, जहां आरोप का सारांश सुनाने के बाद उन्हें जमानत पर मुक्त कर दिया गया।
सांसदों एवं विधायकों के मामले की सुनवाई के लिए गठित विशेष न्यायालय के न्यायाधीश कुमार गुंजन की अदालत में आत्मसमर्पण करने के साथ ही श्री गांधी की ओर से उन्हें जमानत पर मुक्त किए जाने की प्रार्थना की गई थी। याचिका पर बहस पटना उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता शशि अनुग्रह नारायण ने की। मामले के शिकायतकर्ता बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की ओर से पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता प्रमोद कुमार झा अदालत से निवेदन किया कि श्री गांधी न्यायालय में सशरीर उपस्थित हैं इसलिए आज ही उन्हें आरोप का सारांश सुना दिया जाए और आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। अदालत ने शिकायतकर्ता की प्रार्थना स्वीकार की और खुली अदालत में श्री गांधी को उन पर लगाए गए मानहानि के आरोपों का सारांश अंग्रेजी में पढ़कर सुनाया।
श्री गांधी ने अपने ऊपर लगाये गये आरोपों से इनकार किया। इसके बाद अदालत ने श्री गांधी को 10 हजार रुपये के निजी मुचलके के साथ इतनी ही राशि के दो जमानतदारों का बंध-पत्र (बॉन्ड पेपर) दाखिल करने की स्थिति में जमानत पर मुक्त किये जाने का आदेश दिया। श्री गांधी की जमानत कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा और धनंजय मधु ने ली। आरोप तय होने और जमानत आदेश पारित करने के बाद विशेष न्यायालय ने मामले में 08 अगस्त 2019 की अगली तिथि निश्चित करते हुये शिकायतकर्ता को अपना आरोप साबित करने के लिए गवाह और सबूत पेश करने को कहा है।
गौरतलब है कि श्री गांधी ने कर्नाटक के बेंगलुरु में चुनावी सभा के दौरान सवालिया लहजे में कहा था, "सभी मोदी उपनाम वाले चोर क्यों हैं।" उनकी इसी टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सुशील कुमार मोदी ने 18 अप्रैल 2019 को पटना के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में उनके (श्री गांधी ) खिलाफ मानहानि का एक शिकायती मुकदमा दाखिल किया था।