सीतारमण के लाल बहीखाते में लक्ष्मीरमण
   Date06-Jul-2019

डॉ. मंगल मिश्र
मोदीजी के दूसरे कार्यकाल देश की प्रथम पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोदीजी के सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास इन तीनों संकल्पों को अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप ही पढ़ान का प्रयास किया है। उनका बजट जहां एक ओर नरेंद्र नारायण की सेवा करता है, वहीं दूसरी ओर गृह लक्ष्मी और राष्ट्र लक्ष्मी की सेवा के लिए भी संकल्पित है। उन्होंने अपने बजट के माध्यम से उन व्यक्तियों पर शक्ति प्रहार किया है, जो कर की चोरी करते हैं या चोरी को प्रोत्साहित करते हैं। यदि हम बजट के पहले हिस्से को देखें तो उन्होंने सरकार की नीति संबंधी प्राथमिकताओं की ओर सीधा इशारा किया है। उनके संकल्पों में नई शिक्षा नीति, श्रम कानूनों में सुधार, सार्वजनिक क्षेत्र की भूमि पर मकान बनाने की सस्ती योजनाएं, अंतरिक्ष में भारत की शक्ति बढ़ाना, विमान सेवाओं और मीडिया में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी, दो साल में लगभग 2 करोड़ मकान, अगले तीन साल में हर मकान को बिजली और आदर्श किराया कानून जैसी बातें सम्मिलित हैं। वे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को ग्रीन टेक्निक से बनाने की बात करती हैं तो अन्नदाता को ऊर्जादाता भी बना रही हैं, वे किसान उत्पादकों को एक हजार समितियां बनाने के लिए भी तत्पर हैं। विकास के नए आयामों में नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाना, सार्वजनिक क्षेत्र में 1 लाख 5 हजार करोड़ का विनिवेश करना और बैंकों के लिए 70 हजार करोड़ रुपए की व्यवस्था करना जैसे बड़े काम संकल्पित कर रही है। स्टार्ट-अप के लिए उन्होंने दूरदर्शन चैनल और सभी मंत्रालयों के फंड को नेशनल रिसर्च फाउंडेशन से जोडऩे का भी दूरदर्शी कदम उठाया है। पांच वर्ष पूर्व देश का एक भी शैक्षणि संस्थान विश्व के 200 शीर्ष संस्थानों में सम्मिलित नहीं था, लेकिन अब इस सूची में भारत के तीन संस्थान हैं। देश में कर वसूली दो गुना से अधिक हो गई है और बैंकों के अनुत्पादक ऋण 1 लाख करोड़ रुपए से घट गए हैं। इन परिणामों से देश की अर्थव्यवस्था शीघ्र ही तीन खरब डॉलर के स्तर को स्पर्श करने जा रही है, जो कि एक असाधारण उपलब्धि है।
वित्त मंत्री ने महिलाओं की सहभागिता को विशेष रूप से प्रोत्साहित करते हुए नारी के नारायणी स्वरूप को महत्व दिया है। स्वयं सहायता की प्रत्येक महिला को 5 हजार रुपए तक का ओवरड्राफ्ट देने की योजना निश्चित रूप से महिलाओं के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। मुद्रा स्कीम में महिलाओं को 1 लाख रुपए तक का ऋण और जन-धन योजना में उनके खाते खोलना स्वागत योग्य है। बजट का केंद्रबिंदु गांव, गरीब और किसान रहा है। उज्जवला योजना से घर-घर में खुशहाली आई है और महिलाओं की गरिमा की रक्षा के लिए हर घर में शौचालय की योजना बेहद सफल रही है।
भारतीय परम्परा के अनुरूप बही-खाते के रूप में प्रस्तुत हमारा बजट निश्चित रूप से मेक इन इंडिया और स्वदेशी के महत्व को रेखांकित कर रहा है। देश में छोटे से छोटे आदमी को बजट से लाभ मिलने की पूरी कोशिश की गई है। छोटे दुकानदारों को 59 मिनट में ऋण उपलब्ध करा देना, लाइसेंस राज खत्म करना, छोटे दुकानदारों को पेंशन देना जैसे उपाय जहां सीधे-सीधे कमजोर वर्ग को लाभ देते हैं, वहीं नई शिक्षा नीति और खेलो इंडिया जैसी योजनाएं युवाओं के लिए राहत का तथा प्रगति का संदेश लाई है।
सरकार का ध्यान बुनियादी सुविधाओं में 100 लाख करोड़ रुपए के निवेश के माध्यम से बड़ी तेजी से उभरकर सामने आया है। देश में जल जीवन मिशन, कृषि में व्यापक निवेश, रोज 135 किमी सड़क बनाना, पानी और गैस के लिए राष्ट्रीय ग्रिड बनाना, 300 किमी मेट्रो बनाना, छोटे शहरों को उड़ान योजना से जोडऩा, साल में लगातार रोजगार की व्यवस्था करना, भारतमाला और सागरमाला जैसी योजनाएं, नदी परिवहन का विस्तार जैसे बड़े कदम मोदीजी और वित्त मंत्री के दूरदर्शितापूर्ण प्रयत्नों को दर्शाते हैं। वर्ष 2022 तक जल जीवन मिशन के माध्यम से हर घर में पानी पहुंचाना मोदीजी की महत्वाकांक्षी योजना है। डिजिटल साक्षरता, जीरो बजट खेती और समाज कल्याण के नए उपाय करने के साथ-साथ नए दूतावासों की स्थापना, बैंकों का पुनर्गठन और भारतीय पासपोर्ट धारकों को आधार कार्ड देना मोदीजी के विस्तृत दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हैं।
नए बजट में पेट्रोल और डीजल पर कर बढ़ा देने से महंगाई का बम फूटना तय है और इसका विरोध भी होना सुनिश्चित है। सरकार ने 5 लाख रुपए से कम आय वालो पर तो कोई कर नहीं लगाया है, लेकिन आयकर की स्लैब में परिवर्तन न करने से मध्यम वर्ग को निराशा ही हुई है। बैंकों में जमा धन में से एक करोड़ रुपए से ऊपर निकालने पर 2 प्रतिशत कर लगाना ऊंची आय वालों पर सरचार्ज बढ़ाना जैसे उपाय उच्च वर्ग पर कर प्रहार करते हैं। छोटी कंपनियों को बजट प्रस्तावों से जहां राहत हुई है, वहीं अमीरों पर निश्चित रूप से इस बजट से करभार बढ़ा है। ब्याज पर सरकार ने छूट की सीमा बढ़ाई है और मकान खरीदने पर डेढ़ लाख रुपए की अलग से छूट भी दी है। अब बड़े राहत वाली बात यह है कि आधार कार्ड से भी टैक्स का भुगतान किया जा सकता है। यह सत्य है कि मध्यम वर्ग बजट के माध्यम से प्रत्यक्ष कर में छूट की आशा बांधकर बैठा था, लेकिन इससे मोटे तौर पर कोई बड़ी कर राहत नहीं मिली है। बजट में रोजगार की वृद्धि करने वाला कोई दूरदर्शी उपाय दिखाई नहीं देता। इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी की दर अवश्य कम की गई है, लेकिन कर प्रावधानों की वजह से आम जनता को महंगाई का सामना करना पड़ेगा। दो नंबर के व्यवसाय पर अंकुश की पहल तो है, लेकिन राजकीय घाटा अब भी 3.3 प्रतिशत बना हुआ है। कुल मिलाकर बजट निजीकरण को बढ़ावा देने वाला है। इससे बाजार की शक्तियां अधिक बलवती होंगी। विदेशी निवेश बढऩे से घरेलू उद्योग दबाव में आएंगे और सरकार को उनके संरक्षण की कोशिश करना होगी। मीडिया और बीमा में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश खतरों से रहित नहीं है। इस पर सरकार को ध्यान देना होगा। कुल मिलाकर बजट में कोई तूफानी परिवर्तन दिखाई नहीं देता, लेकिन चुनाव के ठीक बाद जारी होने बजटों में इसे एक श्रेष्ठ बजट निरूपित किया जा सकता है, जो एक ओर अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखता है और दूसरी ओर घरेलू अर्थव्यवस्था के विकास के लिए संकल्पित है। अपने कर्ज को जीडीपी से 5 प्रतिशत से कम कर लेना वित्त मंत्री का कौशल ही है, जिसके लिए वित्त मंत्री बधाई की पात्र हैं।