सहकारिता में लोकतंत्र सरकारों की जिम्मेदारी
   Date06-Jul-2019

नीलमेघ चतुर्वेदी
आज 6 जुलाई शनिवार का संयुक्त राष्ट्र -आईसीए विश्व सहकारिता दिवस विशेष मायने रखता है। इस दिवस को संयुक्त राष्ट्र की अधिमान्यता के 25 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। दिवस पर अब रजत छत्र है। विश्व संस्थान द्वारा भेंट रजत रेखा अब रजत छत्र में विकसित है। अगले तीन वर्ष बाद सौंवा अंतर्राष्ट्रीय सहकारी परिसंघ (आईसीए) विश्व सहकारिता दिवस मनाया जाएगा। 25वें यूएन विश्व सहकारी दिवस और 97वें आईसीए विश्व सहकारी दिवस की विषय वस्तु को-ऑपरेटिव्स फॉर डिसेंट वर्क यानी 'सम्मानजनक कार्य के लिए सहकारिताÓ है। समावेशी विकास सहकारिता की घुट्टी में है। सदस्यों के लोकतांत्रिक नियंत्रण से विषय वस्तु और मजबूत है। इसलिए 'ससम्मान सबका साथ-सबका विकासÓ सहकारी कार्यप्रणाली की विशेषता है, किंतु लोक तंत्र से सहकारी प्रणाली संचालन विषय वस्तु को जमीन पर उतारने में उत्प्रेरक की भूमिका का निर्वहन करता है।
प्रत्येक वर्ष विश्व सहकारी दिवस की विषय वस्तु अलग-अलग निर्धारित की जाती है। इसी विषय वस्तु के साथ सहकारीवाद अपनी विशेष छबि उभारता है। सहकारी आंदोलन विश्व स्तर पर मान्य सात सिद्धांतों के जरिए संचालित होता है। इनमें सदस्यों का लोकतांत्रिक नियंत्रण और सदस्यों की आर्थिक सहभागिता भी सम्मिलित है। समावेशी विकास और आम सदस्यों के समाजार्थिक सशक्तिकरण में सहकारिता की भूमिका अहम है। संयुक्त राष्ट्र विकास (यूएनडीजी) लक्ष्य में भी समावेशी विकास के जरिए लोगों का आर्थिक सशक्तिकरण प्रमुख रूप से शामिल है। इसलिए सहकारिता दिवस की विषय वस्तु अधिक प्रासंगिक है। आईसीए अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस यानी जुलाई माह का प्रथम शनिवार। दिवस विश्व सहकारी आंदोलन का गौरव पर्व है। वैसे तो इस दिवस को मनाने की शुरुआत वर्ष 1923 से हुई। नेतृत्व किया इंटरनेशनल को-ऑपरेटिव एलाएंस ने। सुधी सहकारीजनों का सुझाव था कि विश्व भर में सहकारिता के गौरव को निखारने के लिए एक दिवस मनाया जाए। यूरोप का मौसम जुलाई में अनुकूल रहता है। वहीं से मांग उठी और जुलाई के प्रथम शनिवार को दिवस मनाने की शुरुआत हुई। इस प्रकार 6 जुलाई 2019 को 97 आईसीए विश्व सहकारिता दिवस है। दिवस समारोहण में चार चांद तब लगे, जब संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1995 से संयुक्त राष्ट्र विश्व सहकारिता दिवस मनाने की शुरुआत की। इस प्रकार 6 जुलाई 2019 को 25 वां संयुक्त राष्ट्र विश्व सहकारिता दिवस है। यह संयोग ही है कि लेखक ने आईसीए के एतिहासिक मेनचेस्टर शताब्दी समारोह में सहभागिता की, जहां संयुक्त राष्ट्र विश्व सहकारिता दिवस मनाने की औपचारिक घोषणा की गई। इस दिवस के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 16 दिसंबर 1992 को संकल्प पारित किया था।
विश्व सहकारिता दिवस इसलिए है प्रासंगिक : सहकारीजन विश्व को एक मानते हैं। प्राचीन भारतीय धर्मग्रंथों में भी 'वसुधैव कुटुम्बकम्Ó (मां वसुधा की गोद में एक कुटुम्ब समाया है) की अवधारणा के संदर्भ हैं। विश्व कल्याण के लिए हो रहे प्रयासों में सहकारिता का भी उतना ही योगदान है, जितना कि अन्य प्रणालियों का। इसलिए सामाजार्थिक और सांस्कृतिक विकास में विश्व स्तर पर सहकारी योगदान को चमकाने के लिए अखिल विश्व स्तर पर सहकारिता दिवस आयोजन की शुरुआत की गई। आज प्रत्येक क्षेत्र में सहकारिता की प्रभावी उपस्थिति है। दिवस समारोहण के लिए प्रत्येक वर्ष विषय वस्तु का निर्धारण होता है। इस वर्ष विषय वस्तु ' सम्मानजनक कार्य के लिए सहकारिताÓ (को-ऑपरेटिव फॉर डिसेंट वर्क) है। विश्व भर के सहकारी संस्थानों में इसी विषय वस्तु पर केंद्रित आयोजन होंगे। मानव और प्रकृति विकास सहकारिता का प्रमुख लक्ष्य है। इसके साथ ही कार्यस्थल पर सहकारीवाद की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर सामाजिक न्याय भी है। सहकारी संस्थान लोक केंद्रित संस्थान है। लोकतांत्रिक प्रणाली से संस्था नियंत्रण 7 सहकारी सिद्धांतों में सम्मिलित है। ये सिद्धांत विश्व स्तर पर मान्य हैं। आईसीए प्रेसीडेंट एरियल कार्सो का स्पष्ट मत है कि अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों के संरक्षण और कार्यस्थलों पर सम्मानजनक व्यवहार और कार्य संचालन में सहकारिताएं विशेष ध्यान केंद्रित करती हैं। जीवन की गुणवत्ता में बदलाव के लिए सहकारी सभासद यह लक्ष्य सहभागिता और प्रेरणा के जरिए प्राप्त करते हंै। लक्ष्य की प्राप्ति के लिए संस्था, समाज, समुदाय और विश्व कल्याण के प्रयास होते हैं। इसीलिए विश्व सहकारीजन इस दिवस समारोहण के लिए सतरंगी झंडे के तले एकत्रित होंगे, जहां मानव विकास और सामाजिक न्याय प्राथमिकता है। सहकारी दिवस के जरिए स्थानीय, प्रादेशिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नीति निर्माता इस तथ्य समीक्षा करेंगे कि कार्यस्थल पर सम्मानजनक व्यवहार में सहकारीवाद किस तरह योगदान करता है। आंकड़ों में जाएं तो सहकारिता विश्व के लगभग 10 प्रतिशत कार्यबल में योगदान करता है। अर्थात विश्व की कुल मानव कार्यशक्ति का 10 प्रतिशत सहकारी क्षेत्र में नियोजित है। आंकड़ों से हटकर कुछ अध्ययनों पर गौर करना उचित होगा। इनके परिणाम बताते हैं कि अन्य क्षेत्रों के रोजगार की तुलना में सहकारी रोजगार और उनके कार्यस्थलों की कुछ खूबियां हैं। इन विशेषताओं के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं।
1. ये तुलनात्मक रूप में अधिक टिकाऊ होते हैं। 2. यहां उच्च पदस्थ और अधीनस्थ अमले के वेतन में कम अंतर होता है। 3. ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में सहकारी अमले की लगभग समान उपस्थिति है।
विषय वस्तु निर्धारण के कारण : 'सम्मानजनक कार्य के लिए सहकारिताÓ विषय वस्तु निर्धारण का महत्व है। कुछ क्षेत्रों में रोजगार सुरक्षा खतरे में है। विषमता बढ़ रही है। बेरोजगारी में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। युवाओं में यह स्थिति कुछ अधिक ही है। विषय वस्तु के निर्धारण के पीछे संयुक्त राष्ट्र विकास लक्ष्य क्रमांक 8 (यूएनडीजी-8) है। इसमें 'समावेशी विकास और सम्मानजनक कार्यÓ सम्मिलित है। लोक केंद्रित संगठनों के नाते सहकारी संगठनों का दायित्व है कि वे कार्य स्थलों पर अधिक अनुकूल परिस्थितियों का विकास करें, स्थानीय समुदायों का समाजार्थिक सशक्तिकरण करें। सहकारिता का दूसरा सिद्धांत-'सदस्यों का लोकतांत्रिक नियंत्रणÓ है। इसके जरिए सभासदों को सहकारिता का संयुक्त स्वामित्व और संचालन का दायित्व मिलता है। यह सिद्धांत समावेशी और टिकाऊ विकास की प्रेरणा देता है। ऐसे विकास की प्रेरणा, जिसमें कोई भी वंचित न रहे। सहकारी आंदोलन से संबद्ध सभी संस्थान मूल्य, सिद्धांत और विशेष पहचान आधारित हैं। सहकारी कार्यकर्ताओं में दक्षता के लिए प्रयास, लचीलापन, सहभागिता के प्रति संवेदनशीलता, कार्य के दौरान परिवार जैसा माहौल सृजित करने और सहकारी पहचान उभारने का गुण पाया जाता है। 'को-ऑपरेटिव एंड ग्लोबल इन्वायरानमेंटÓ पर केंद्रित रिपोर्ट में ये जानकारियां उभरी हैं। विश्व के 10 देशों में इन बिंदुओं पर अध्ययन किया गया था। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) इस वर्ष शताब्दी समारोह मना रहा है। इसी सिलसिले में 24 जून 2019 को आईएलओ और आईसीए ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन के ठीक बाद 'कार्य का भविष्यÓ पर सम्मेलन आयोजन किया। सहकारी सिद्धांत: 1. खुली और एच्छिक सदस्यता, 2. सदस्यों का लोकतांत्रिक नियंत्रण, - सदस्यों की आर्थिक सहभागिता, 4. स्वायत्तता और आत्मनिर्भरता, 5. शिक्षा, प्रशिक्षण तथा संसूचना, 6. सहकारिताओं में सहकारिता, 7. समुदाय से सरोकार। (आईसीए मेनचेस्टर शताब्दी कांग्रेस-सितंबर 1995 में अनुमोदित)