जल, थल, नभ में विराजी महालक्ष्मी को पीले चावल
   Date06-Jul-2019

नीलमेघ चतुर्वेदी
मोदी-2 सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने तो चमत्कार कर दिया। जल, थल तो ठीक, नभ में विराजमान महालक्ष्मी को भी पीले चावल भेंट कर भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर स्वरूप में ढालने का न्योता दे दिया! इसे कहते हैं, बटुआ खोलते ही महालक्ष्मी प्रकट करना। वित्त मंत्री ने वर्ष 2019-20 के केंद्रीय बजट प्रस्तावों की प्रस्तुति से ही उस किफायत के दर्शन कराए, जिसके लिए भारतीय नारी जानी जाती है यानी संसाधनों का अधिकतम दोहन। बजाए महंगे सुटकेस के, सूती और लाल रंग के 'बहीखातेÓ फोल्डर में बजट दस्तावेज को संसद के विचारार्थ लाते ही लगा, क्या बारीक निगाह है भारतीय नारी जगत की प्रतिनिधिकर्ता वित्त मंत्री की ! भारतीय अर्थव्यवस्था के संसाधनों के न्यायोचित दोहन पर वित्त मंत्री की संभावनापूर्ण निगाहें पड़ी हैं। सबसे और हिमालयीन लक्ष्य है, वर्ष 2022 तक अन्नदाता किसानों की आय दुगुनी करना। अथाह जलराशि और संभावनाओं से भरी सस्य श्यामला धरती! सबसे अधिक रोजगार प्रदाता कृषि क्षेत्र (जिसमें मवेशी पालन, मधुमक्खी पालन जैसे 16 उपक्षेत्र सम्मिलित हैं) और किसान हैरान-परेशान। निर्मलाजी को 16 रूपों में व्याप्त महालक्ष्मी ने लगता है, दर्शन दे दिए। वित्त मंत्री ने मवेशी पालन, डेयरी और मत्स्य पालन में व्याप्त महालक्ष्मी को पीले चावल भेंट किए। आह्वान किया - आइये और देश की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2024-25 तक 5 ट्रिलियन डॉलर तक का विस्तार दीजिए। एक समय था, जब भारत अंतरिक्ष क्लब का सदस्य नहीं था। अपने उपग्रह किराये पर प्रक्षेपित कराता था। हाल ही में जब भारत ने अपने रॉकेट में 108 में से 96 उपग्रह विदेशी और 12 स्वयं के प्रक्षेपित किए। निर्मलाजी की निगाहें तभी से अंतरिक्ष में विराजमान महालक्ष्मी पर थी। अवसर मिला और पीले चावल भेंट कर दिए। भारत द्वारा अंतरिक्ष कार्यक्रमों का भी व्यावसायिक उपयोग करने का प्रस्ताव बजट प्रस्तावों में है। याद आ गया गीत 'है वही आसमां, और है वो ही जमीं पर भारत की अर्थव्यवस्था को अब वो जमाना नहीं, अब वो जमाना नहीं।Ó भारतीय अर्थव्यवस्था के चार वित्त मंत्री माने जाते हैं। पहला मानसून, दूसरा शासन का वित्त मंत्री, तीसरा गृहिणी और चौथा अन्नदाता किसान। इस बार वित्त मंत्री निर्मला में दो वित्त मंत्री विराजमान हैं। पहला गृहिणी और दूसरा भारत सरकार का वित्त मंत्री। जिस घर में गृहिणी के पास तिजोरी की चाबी होती है, उस घर में समृद्धि के दीप जगमगाते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस मर्म को समझ लिया। निर्मलाजी निगाहें अब भाषा से महालक्ष्मी आमंत्रण पर है। तकनीकी कौशल से युक्त भारतीय युवा और भाषाई ज्ञान उपयोग के जरिए महालक्ष्मी को आमंत्रित करने का भी प्रस्ताव संसद के समक्ष विचारार्थ रखा है। कहते हैं भगवान देता है, तब छप्पर फाड़कर भी दे सकता है। निर्मलाजी ने भाषा और तकनीक के बाजार को देख नई कहावत गढ़ी है -महालक्ष्मी को निमंत्रित करना है तो भाषा को आधार बना सात समंदर पार से भी निमंत्रित किया जा सकता है।
धरती के जरिए महालक्ष्मी को न्योतने (आमंत्रित) करने के लिए 10 हजार किसान उत्पादन संगठनों की स्थापना, 'स्फूर्तिÓ के जरिए 50 लाख दस्तकारों की सहायता कर 'कर वसते लक्ष्मीÓ कल्पना को साकार करने, उत्पादन लागत की तुलना में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) ड्यौड़ा करने, ग्रामीणों और अन्नदाता किसानों को साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए संस्थागत साख में उल्लेखनीय बढ़ोतरी, 3 करोड़ खेरची व्यापारियों को प्रधानमंत्री कर्मयोगी योजना में स्थान देना ऐसे प्रस्ताव हैं, जो बताते हैं कि सरकार केवल 'लुटियन की दिल्लीÓ में ही नहीं, अपितु खेतों की छोटी-छोटी जोतों (होल्डिंग्स) मेड़ों, गांवों के फलियों, मजरों और टोलों में भी बसती है।
एक समय था, जब संसाधनों के अधितकतम दोहन के लिए पंचायती राज और नगर निकायों में महिलाओं की सहभागिता में बढ़ोतरी के लिए 73वें और 74वें संविधान संशोधन किए गए थे, किंतु वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जल, नभ और आकाश या यूं कहें दस दिशाओं में व्याप्त संभावनाओं के दोहन के लिए प्रशंसनीय प्रस्ताव संसद के समक्ष रख दिए हैं।