आयकर में मध्यम को राहत नहीं, अमीरों पर कर बढ़ा
   Date05-Jul-2019

नयी दिल्ली 05 जुलाई (वार्ता) आयकर में बड़ी राहत की उम्मीद लगाये मध्यम वर्ग को बजट से निराशा हाथ लगी है। सरकार ने अंतरिम बजट में पाँच लाख रुपये तक की आय पर शत-प्रतिशत कर छूट देने का ऐलान किया था। मध्यम वर्ग को उम्मीद थी कि पूर्ण बजट में कर स्लैब में बदलाव किया जायेगा किंतु बजट में इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला आम बजट पेश करते हुये कर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि प्रत्यक्ष कर राजस्व बढ़ाने के लिए 2019-20 के बजट में अधिभार के माध्यम से अमीरों पर कर का बोझ बढ़ाया गया है।
पहले एक करोड़ रुपये से ज्यादा की कर योग्य आय वालों को व्यक्तिगत आयकर पर 15 प्रतिशत अधिभार देना होता था। आज पेश बजट में एक करोड़ से ज्यादा और दो करोड़ रुपये तक की आय वालों के लिए अधिभार 15 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। दो करोड़ से ज्याद और पाँच करोड़ रुपये तक की आमदनी वालों के लिए अधिभार 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है जबकि पाँच करोड़ रुपये से ज्यादा की आमदनी वालों के लिए अधिभार बढ़ाकर 37 प्रतिशत किया गया है।
श्रीमती सीतारमण ने बताया कि इसे दो करोड़ से अधिक और पाँच करोड़ रुपये तक की सालाना आय वालों को पहले की तुलना में तीन प्रतिशत तथा पाँच करोड़ रुपये से अधिक की आय वालों को सात प्रतिशत ज्यादा कर देना होगा।
दो करोड़ रुपये तक की आय वालों के लिए कर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किये जाने से यह पहले की तरह ही रहेंगे। पाँच लाख रुपये सालाना से अधिक आय पर ही करदाता कर भुगतान के दायरे में आयेंगे। पिछले वित्त वर्ष में ढाई से पाँच लाख रुपये की आय पर पाँच प्रतिशत आयकर देय था। पाँच लाख से अधिक और दस लाख रुपय तक की आय पर कर 20 प्रतिशत लगता था। दस लाख रुपये से अधिक आय पर कर दर 30 प्रतिशत थी। इस प्रकार पाँच लाख रुपये से एक रुपया भी आमदनी अधिक होने पर पूरी राशि आयकर के दायरे में आ जायेगी।