अप संस्कृति फैलाता मद्यपान का बढ़ता चलन
   Date05-Jul-2019

धर्मधारा
ड ब्ल्यूएचओ की स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया है कि विश्व में प्रति व्यक्ति एल्कोहल उपयोग बढ़ रहा है। चीन व भारत में शराब के उपयोग में वृद्धि का एक कारण शराब उद्योग द्वारा शराब की बिक्री बढ़ाने के लिए अधिक जोर लगाया जाना रहा है। हालांकि इस समय भी प्रति व्यक्ति शराब की खपत अमेरिका व यूरोप के धनी देशों में सबसे अधिक है, पर वृद्धि की दर चीन व भारत में अधिक है। जहां अनेक राज्य सरकारों ने इसे अपनी आय बढ़ाने के स्रोत में बढ़ावा दिया है और दूर-दूर के गांवों में भी ठेके खोल दिए हैं, वहीं कुछ उद्योगपतियों के अतिरिक्त अनेक माफिया गिरोहों के लिए भी शराब आय का एक बहुत महत्वपूर्ण साधन बन गया है। कालेधन के एक बड़े ोत के रूप में भी शराब का चलन बढ़ा है। राजनीतिज्ञों व नौकरशाही में महंगी शराब की खपत तेजी से बढऩे के साथ भ्रष्टाचार का संबंध नजदीकी तौर पर जुड़ा है। इन सब चिंताजनक प्रवृत्तियों को आगे बढ़ाने के लिए एक कुप्रयास कुछ वर्षों से सतत जारी है जिसके चलते शराब के विरूद्ध भारतीय समाज में जो सामाजिक मान्यता सदा से हो रही है उस मजबूत व सार्थक परंपरा को ही समाप्त कर दिया जाए। इसमें कोई संदेह नहीं कि अनेक अन्य समाजों की तरह भारतीय समाज में भी शराब का प्रचलन बहुत समय से रहा है पर इसके साथ ही भारतीय समाज में शराब के विरूद्ध सामाजिक मान्यता भी बहुत समय से रही है यानि की शराब को सदा एक सामाजिक बुराई ही माना गया है। इस सामाजिक मान्यता के कारण शराब के विरूद्ध संस्कार बच्चों व युवाओं को प्राप्त होते रहे हैं। महिलाओं में यह संस्कार बहुत प्रबल रहे हैं जिसके कारण भारतीय समाज में महिलाओं में शराब का प्रचलन बहुत ही सीमित रहा है व अनेक समुदायों में तो यह नहीं के बराबर रहा है। जैसे-जैसे शराब से अपार धन अर्जित करने वाले तत्व मजबूत हुए हैं वैसे-वैसे शराब के विरूद्ध सामाजिक मान्यताओं व परंपराओं को कमजोर करने के कुप्रयासों में भी तेजी आई है। ताकि ये सामाजिक मान्यताएं टूट-बिखर जाएं व शराब की बिक्री बहुत तेजी से बढ़ सके। इसके लिए एक तो विभिन्न सरकारों के शराब-विरोधी व नशा-विरोधी विभागों के कार्य व प्रचार-प्रसार को कम कर दिया गया या उसे बहुत नीरस व कमजोर बना दिया गया है। सरकारी गोष्ठियों या स्वागत समारोहों में शराब पर जो रोक लगी थी उसे कम कर दिया गया है। जिससे सरकारी अधिकारियों व नेताओं में शराब का चलन और खुले रूप में हो सके तथा पांच सितारा होटलों में स्वागत समारोहों के नाम पर मदिरा-पान के दरवाजे खुल सकें।