१५० ग्रामीणों ने ७० दिन में ६०० जलधाराओं को मोड़़ा
   Date04-Jul-2019

रांची द्य 3 जुलाई
जल संरक्षण-संवद्र्धन के सरकारी प्रयासों से इतर ग्रामीणों की अथक मेहनत भी रंग दिखाने लगी है और पानी बचाने का यह कार्य अभियान बनने लगा है। झारखंड की राजधानी रांची से 30 किलोमीटर दूर आरा और केरम गांव के करीब 150 ग्रामीणों ने 70 दिनों तक श्रमदान कर सामाजिक एकजुटता की मिसाल पेश की है। ग्रामीणों ने लगभग सूख चुकी डंभा नदी को दोबारा जिंदा करने के लिए पहाड़ों से उतरने वाली 600 प्राकृतिक जलधाराओं को पत्थरों से बांधकर नदी की तरफ मोड़ दिया है। खास बात यह है कि इस काम के लिए किसी प्रकार की सरकारी मदद नहीं ली गई है। आरा-केरम के ग्रामीणों ने आसपास की पहाडिय़ों के ऊपर वर्षा का पानी रोकने के लिए जल संग्रहण संरचनाएं बनाई हैं। इसके अलावा पहाड़ों से उतरने वाली पानी की प्राकृतिक जलधाराओं को पत्थर के बांंधकर सूख चुकी नदी की पेटी में मोड़ा जा रहा है।
ठ्ठ ग्रामीणों की एकजुटता से ऐसी छोटी-छोटी 600 धाराओं को अभी तक नदी में उतारा जा चुका है। डंभा नदी आरा-केरम गांव के पास से शुरू होकर पुंडावनी, पिपरा बंडा, हिंजेगली, भागेल आदि गांवों के आसपास की धाराओं को बांध दिया है। लगभग 12 गांवों से गुजरते हुए
ठ्ठ स्वर्णरेखा नदी में मिल जाती है। आरा-केरम के बाद अब बाकी गांवों में भी डंभा को सदानीरा बनाने की पहल शुरू की गई है। झारखंड के आरा और केरम गांव के लोग पहाड़ों से उतरने वाली 600 प्राकृतिक जलधाराओं के लिए रास्ता बनाते।