मेहनत की कमाई
   Date31-Jul-2019

प्रेरणादीप
ए क सदगृहस्थ लोहार श्रम और कुशलता से परिवार का पालन-पोषण भली प्रकार कर लेता था। उसके लड़के को अधिक खर्च करने की आदत पडऩे लगी। पिता ने दु:खी होकर पुत्र को कहा- 'तुम अपने श्रम से चार चवन्नियाँ भी कमा कर ले आओ तो तुम्हें खर्च दूंगा अन्यथा नहीं।Ó लड़के ने प्रयास किया, पर असफल रहा तो अपनी बचत की चार चवन्नियाँ लेकर पहुँचा। पिता भ_ी के पास बैठा था। उसने हाथ में लेकर चवन्नियाँ देखीं तथा कहा- 'ये तेरी कमाई हुई नहीं हैं।Ó यह कहकर उन्हें भ_ी में फेंक दिया। लड़का शरमिंदा होकर चला गया। दूसरे दिन फिर कमाई की हिम्मत न पड़ी तो माँ से चुपके से माँगकर ले गया। उस दिन भी वही हुआ। तीसरे दिन कहीं से चुरा लाया, परंतु पिता को धोखा न दिया जा सका। वह हर बार-'मेहनत की कमाई नहींÓ कहकर उन्हें भ_ी में फेंकता रहा।
लड़के ने समझ लिया बिना कमाए बात नहीं बनेगी तो दो दिन तक मेहनत करके वह किसी प्रकार चार चवन्नियाँ कमा लाया। पिता ने उन्हें देखकर भी वही बात दोहराई तथा भ_ी में फेंकने लगा तो लड़के ने चीखकर पिता का हाथ पकड़ लिया और बोला- 'क्या करते हैं पिताजी, मेरी मेहनत की कमाई इस बेदर्दी से भ_ी में मत फेंकिए।Ó पिता मुस्कराया और बोला- 'बेटा! अब समझे मेहनत की कमाई का दर्द। जब तुम निरर्थक कामों में मेरी कमाई खर्च कर देते हो, तब मुझे भी ऐसी ही छटपटाहट होती है।Ó पुत्र की समझ में बात आ गई।