धर्म क्या?
   Date02-Jul-2019

प्रेरणादीप
ए क बार कुछ लोग स्वामी विवेकानन्दजी का दर्शन करने के लिए आए। आगंतुकों में एक सज्जन को पंजाब से आया जानकर स्वामीजी उनसे वहां की जरूरतों के बारे में चर्चा करने लगे। स्वामीजी जनसाधारण के दु:ख सामाजिक जीवन की दुर्दशा को दूर करने संबंधी उपाय पर कहने लगे कि इस दिशा में प्रयास करना प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति का कर्तव्य है। बिदा लेते समय पंजाबी सज्जन ने कहा स्वामीजी! हम आपसे धर्मोपदेश सुनने की चाह से आए थे, किन्तु दुर्भाग्य से साधारण विजयों पर ही चर्चा होती रही और हमारी साध पूरी नहीं हुई। स्वामी विवेकानंद ने गंभीर होकर कहा- जब तक मेरी जन्मभूमि का एक कुत्ता भी भूखा रहेगा, तब तक उसे आहार देना ही मेरा धर्म है। उसके अलावा जो कुछ है, वह अधर्म है।