'जिला बैंकÓ विहीन जिलों की खुली अनदेखी
   Date11-Jul-2019

बजट प्रतिक्रिया
नीलमेघ चतुर्वेदी
मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार का पहला बजट समुदाय से सरोकार की भावना का पोषक है। सरकार ने हर वर्ग, हर तबके की कुछ-न-कुछ चिंता की है। पुजारियों का मानदेय बढ़ाया है, तो जरूरतमंदों की सामाजिक सुरक्षा राशि में बढ़ोतरी भी की है। कुछ पुरानी योजनाओं को दोहराया है। सरकार पंचायत और सहकारिता संबंधी ऐसे अनछुये बिंदुओं को स्पर्श नहीं कर पाई, जिनसे धरातली लोकतंत्र को और मजबूत किया जा सकता है। बजट प्रस्तावों में पंचायत राज प्रणाली को राज्य मुकुट पहनाने यानी राज्य पंचायत के गठन संबंधी कोई प्रावधान के दर्शन नहीं है। ग्राम समूह, जनपद, जिला पंचायत के बाद पंचायत राज प्रणाली पंचायत मंत्री के जिम्मे है, जबकि सहकारिता में ग्राम समूह पर पैक्स, जिला स्तर पर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक और राज्य स्तर पर शीर्ष सहकारी बैंक है। बजट में राज्य स्तरीय पंचायती राज संस्था के गठन (चौखंभा पंचायत) पर चिंतन का अभाव झलका है। राज्य के 52 जिलों में से 14 जिले, जिला सहकारी केंद्रीय बैंकविहीन हैं। रिजर्व बैंक की नीति एक जिला - एक जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की है। पिछली सरकारों की तरह कमलनाथ सरकार के बजट में प्रत्येक जिले में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के गठन और सहकारी विकेंद्रीकरण की अनदेखी है। प्रदेश के अनेक जिले दुग्ध सहकारी संघविहीन हैं। ऐसे जिलों में दुग्ध संघ के गठन के लिए बजट आवंटन प्रस्तावित नहीं है। पूर्ववर्ती सरकार ने पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया था। तब कृषि सहकारी साख संस्थाएं इससे वंचित रही थीं। कमलनाथ सरकार के बजट दृष्टिकोण में कृषि सहकारी साख आंदोलन में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने संबंधी प्रावधान की झलक नहीं है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के पूंजीगत आधार में 1 हजार करोड़ रुपए जोडऩे का प्रस्ताव सहकारी आंदोलन के प्रति कमलनाथ सरकार की चिंता दर्शाता है। वर्ष 1990 में कर्ज माफी के दौरान कमजोर हुए जिला सहकारी बैंकों के पूंजीगत आधार को मजबूत करने के लिए कमलनाथ सरकार ने अपना दायित्व निभाया है। तत्कालीन समय में जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों से ली गई राशि नहीं लौटाई गई। सरकार और व्यवस्था सभी इसे भूल चुके हैं।
उज्जैन और एयर ट्रैफिक - आंखें पथरा गई - बजट प्रस्तावों में उज्जैन, रीवा, दतिया और छिंदवाड़ा को एयर ट्रैफिक से जोडऩे का प्रस्ताव है। उज्जैन संबंधी घोषणा पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में भी की गई थी। यह अभी तक जमीन पर नहीं उतरी है। उज्जैन के दाताना-मताना की हवाई पट्टी अभी भी संकरी ही है। पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस नगरी की हवाई पट्टी पर वर्ष 2010 में अति महत्वपूर्ण व्यक्ति का जहाज पट्टी से उतरा था। कमलनाथ सरकार के बजट प्रस्तावों से फिर उज्जैनवासियों की आस जगी है।
जिला सरकार - संभागीय पदों का क्या होगा? - तत्कालीन दिग्विजयसिंह सरकार में प्रारंभ जिला सरकार (उमा भारती शासनकाल मेंं बंद) में संभागीय पदों जैसे संयुक्त संचालक पंचायत, संयुक्त पंजीयक सहकारिता, उपपुलिस महानिरीक्षक जैसे पद समाप्त कर दिए गए थे। व्यवस्था भी कुछ प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुई थी। इस बार जिला सरकार के समय पदों की स्थिति पर बजट भाषण में संकेत नहीं दिए गए हैं।
रेशम कीट और मधुमक्खी पालकों की अनदेखी - बजट में किसान क्रेडिट कार्ड योजना से मवेशी पालकों और मछुआरों को भी लाभान्वित करने का प्रस्ताव है। इसे कृषि क्षेत्र से जुड़े पोल्ट्री, रेशम कीट, लाख कीट और मधुमक्खी पालकों तक भी विस्तारित किया जा सकता है। कमलनाथ सरकार के वित्त मंत्री तरुण कुमार भनोत ने पूर्ववर्ती सरकारों के प्रति आभार व्यक्त कर राजनीति के दंगल में उदारता का परिचय दिया है। क्षेत्रीय उत्पादों की ब्रांडिंग में मोटे तौर पर जिला मुख्यालय उत्पादों पर ही ध्यान केंद्रित है। कालाकुंड का कलाकंद, सरदारपुर के पेठे, बडऩगरी भुट्टे के लड्डू और विलुप्त होते फतियाबादी गुलाब जामुन पर भी वित्त मंत्री की नजरें इनायत अपेक्षित हैं। बजट में डेयरी विज्ञान आधारित महाविद्यालय प्रारंभ करने की घोषणा प्रशंसनीय है। अभी इस क्षेत्र में रुचि रखने वालों को एनडीआरआई करनाल (हरियाणा) जाना होता है। बजट में गौवंश आधारित विश्वविद्यालय स्थापना प्रस्ताव द्वारा कृषि अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने के प्रयास किए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री सुषेण संजीवनी योजना और वनवासियों की संस्कृति के संरक्षण और उनके पूजा स्थलों के जीर्णोद्धार के प्रस्ताव लोक जीवन से सरोकार को स्पष्ट करते हैं।