बजट में स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी जोर
   Date10-Jul-2019

 
भोपाल द्य मध्यप्रदेश की लगभग छह माह पुरानी कांग्रेस सरकार के वित्त मंत्री तरुण भनोत की ओर से आज विधानसभा में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए पेश किए गए बजट में स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं पर भी काफी जोर दिया गया है। श्री भनोत ने बजट भाषण में कहा कि स्वस्थ समाज ही सुखी और समृद्ध हो सकता है। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में देश की औसत के सापेक्ष राज्य में सुधार नहीं होना गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता जनता को उपयुक्त स्वास्थ्य सुविधाएं और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना है। सरकार मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर और सकल प्रजनन दर कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि राज्य में छह नवीन सिविल अस्पताल, 70 नवीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 329 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 308 नवीन उपस्वास्थ्य केंद्रों के स्थापना की कार्ययोजना बनाई गई है।चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बैकलॉग के 1065 पदों पर चयन और 525 एमबीबीएस चिकित्सकों की बंधपत्र के अनुक्रम में पदस्थापना की कार्रवाई की जा रही है। नागरिकों के स्वास्थ्य के संबंध में स्वास्थ्य का अधिकार लागू करने का चुनौतीपूर्ण निर्णय लिया गया है। राज्य के अधिसूचित क्षेत्रों में योग्य चिकित्सकों की पदस्थापना के लिए मुख्यमंत्री सुषेण संजीवनी योजना प्रारंभ करने का निर्णय भी लिया गया है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष से तीन नए सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय प्रारंभ करने और विद्यमान महाविद्यालयों में सीट वृद्धि के साथ कुल 850 सीटों की वृद्धि होगी। चिकित्सा क्षेत्र में सुधार संबंधी अन्य कदमों का भी जिक्र उन्होंने अपने भाषण में किया। श्री भनोत ने कहा कि चिकित्सा से जुड़े कार्यक्रमों के लिए दस हजार 472 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया है। महिलाओं और बच्चों के विकास कार्यक्रमों के लिए पांच हजार दो सौ 93 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया है।
वित्त मंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में उठाए जाने वाले कदमों का जिक्र किया और कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 24 हजार 499 करोड़ रुपयों के बजट का प्रावधान है, जो पिछले वर्ष से दो हजार 775 करोड़ रुपए अधिक है।
बजट में सरकार ने किसी नए कर का प्रावधान नहीं किया है। मंत्री ने कहा कि सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए अधिक संसाधन जुटाने प्रतिबद्ध है। इसके लिए आबकारी, परिवहन, पंजीयन और खनिज क्षेत्रों में नवीन नीतियों के माध्यम से अतिरिक्त राजस्व जुटाने के निर्णय लिए गए हैं।