त्रिभाषा सूत्र के लिए सभी सांसद बनाएं वातावरण- देवपुजारी
   Date10-Jul-2019

मंगलवार द्य 9 जुलाई
संसद सदस्य की शपथ संस्कृत में लेने वाले मध्यप्रदेश के सांसदों का संस्कृत भारती द्वारा गत दिनों सम्मान किया जाएगा।
सांसद सर्वश्री सुधीर गुप्ता, गजेन्द्र पटेल, जी.एस.डामोर, महेन्द्रसिंह सोलंकी, रोडमल नागर, दुर्गादास उइके, साध्वी प्रज्ञा, छतरसिंग दरबार का सम्मान रुद्राक्ष की माला पहनाकर संस्कृत भारती के अखिल भारतीय महामंत्री श्रीश देवपुजारी तथा मध्य क्षेत्र के संगठन मंत्री प्रमोद पण्डित द्वारा 4 जुलाई को नई दिल्ली में किया गया। इस अवसर पर उपस्थित सांसदों को नई शिक्षा नीति हेतु कुछ सुझाव भी दिए गए।
प्रमुख सुझाव : 4.5.1. ग्रेड 8 वीं तक शिक्षा प्रादेशिक भाषा माध्यम में अनिवार्य रूप से कराई जाए। 4.5.2. विद्यालय की भाषा के स्थान पर राज्य की भाषा किया जाए। 4.5.3. ग्रेड 3 से ही त्रिभाषा सूत्र लागू किया जाए। 4.5.5. त्रिभाषा सूत्र को ग्रेड दसवीं तक अनिवार्य किया जाए। संपूर्ण भारत को एकता के सूत्र में बांधने वाली संस्कृत को अनिवार्य किया जाए। अंग्रेजी की अनिवार्यता हटाई जाए। 4.5.8. व्यावसायिक विषयों को भाषा के विकल्प में न रखा जाए। संस्कृत कौशल विकास के विषयों में सम्मिलित हो। उसमें छ: अध्याय पढ़ाएं जाए - अ) प्रवचन अर्थात् वाल्मिकी रामायण एवं भागवत, (आ) ज्योतिष (ई) आयुर्वेद, (ई) योग (उ) वास्तुशास्त्र (ऊ) कर्मकांड। 4.5.9. त्रिभाषा सूत्र में लचीलेपन के अंतर्गत केवल ग्रेड 6 में ही भाषा बदलने का विकल्प दिया जाए। 4.5.10. माध्यमिक विद्यालयों में विदेशी भाषाओं का विकल्प न रखा जाए। 4.5.11. राज्य की भाषा के साहित्य के साथ उसकी सहायक उपभाषाओं, बोलियों के साहित्य को सम्मिलित किया जाए, न कि विभिन्न भाषाओं या उर्दू आदि के साहित्य को। 4.5.12 भारतीय भाषाओं का पाठ्यक्रम पूरा करने का विकल्प उच्च शिक्षा में भी उपलब्ध होना चाहिए। 4.5.14 संस्कृत शिक्षा पर अलग से पूर्ण विचार हो। 4.6.7. डिजिटल साक्षरता गुरुकुलों में भी लागू की जानी चाहिए। 4.6.8.1 नीतिपरक और नैतिक चिंतन - इसमें महापुरुषों और शहीदों की जीवनी को शामिल किया जाना चाहिए। पंचतंत्र और जातकों की कहानियां भी इसमें शामिल की जानी चाहिए। 4.6.8.5 बुनियादी स्वास्थ्य और सुरक्षा के प्रशिक्षण में से यौन शिक्षा को हटाया जाए। 4.6.8.8. नीतिपरक और नैतिक चिंतन पर पाठ्यक्रम शिक्षा के हर स्तर पर और हर प्रकार पर उपलब्ध किया कराया जाना चाहिए। 4.8.4. उच्च गुणवत्ता के अनुवाद के लिए आई.आई.टी.आई. की स्थापना शीघ्रता से हो और दायित्व निर्धारित किया जाए। 7.5.1 20 से कम संख्यावाले विद्यालयों के समेकन से संस्कृत गुरुकुलों को छूट मिलनी चाहिए। 10.3 संस्कृत विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को संख्या संबंधी छूट दी जानी चाहिए। साथ ही इनका पुन: वर्गीकरण किया जाना चाहिए। सांसदों ने कहा कि संस्कृत में शपथ लेना एक गौरव की अनुभूति थी। उह्नोने भविष्य में संस्कृत भाषा के हित में काम करने की इच्छा प्रकट की।
11.1. लिबरल एजुकेशन के अंतर्गत संस्कृत में उल्लेखित 64 कलाओं को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए।
22.4 राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान को केंद्रीय विश्वविद्यालय घोषित कर अलग से नया संस्थान स्थापित किया जाए जो संपूर्ण देश में संस्कृत के अनुसंधान शिक्षण आदि की व्यवस्था देखें।
22.5 यही संस्थान प्रशासनिक, न्यायालयीय, वित्तीय इत्यादि क्षेत्र में प्रयुक्त होने वाली शब्दावली का निर्माण करें।
सांसदों ने कहा कि संस्कृत में शपथ लेना एक गौरव की अनुभूति थी। उह्नोने भविष्य में संस्कृत भाषा के हित में काम करने की इच्छा प्रकट की। पारंपरिक संस्कृत विद्यालयों को सबल बनाने का संकल्प भी दो सांसदों ने लिया।
यजमान मन्दसौर के सांसद श्रीमान् सुधीर गुप्ताजी ने संस्कृतभारती के अधिकारियों का एवं उपस्थित सांसदों का स्वागत उत्तरीय और पुष्पगुच्छ देकर किया।