खान-पान को मिलेगी नई पहचान
   Date10-Jul-2019

मप्र पर १ लाख 52 हजार 745 करोड़ का कर्जभोपाल द्य 10 जुलाई (वा)
मध्यप्रदेश पर पिछले साल 31 मार्च की तारीख में एक लाख 52 हजार 745 करोड़ रुपए का कर्ज था, जो इस साल 31 मार्च की तारीख में बढ़कर एक लाख 80 हजार 988 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। उधर वित्त मंत्री ने आज विधानसभा में कहा कि वर्ष 2019-20 के लिए विनियोग की कुल राशि दो लाख 33 हजार छह सौ पांच करोड़ रुपए है। वित्त मंत्री तरुण भनोत ने आज विधानसभा में बजट पेश करने के बाद संवाददाताओं को इस बारे में जानकारी दी। बताया गया कि महालेखाकार की ओर से राज्य को दी गई जानकारी के मुताबिक राज्य में 31 मार्च 2018 को एक लाख 52 हजार 745 करोड़ रुपए का कर्ज है।
गौशालाओं के लिए मध्यप्रदेश में ३ मॉडल पर होगा काम
वित्त मंत्री तरुण भनोत ने आज कहा कि राज्य सरकार ने गौशालाओं के लिए तीन मॉडल्स प्रारूपित किए हैं और करीब 1000 स्थानों पर इसके लिए 132 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए गए हैं। श्री भनोत ने कहा कि सरकार ने गौशालाओं के लिए तीन मॉडल्स प्रारूपित किए हैं। पहला एक मिश्रित मॉडल है, जिसमें मनरेगा, आत्मा और राज्य शासन के स्रोतों के जरिए एक हजार स्थानों पर ये काम हाथ में लिया गया है। राज्य शासन के स्रोतों के लिए 132 करोड़ रुपए का प्रावधान प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि दूसरा कॉरपोरेट मॉडल है, जिसमें व्यावसायिक आधार पर निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। तीसरा मॉडल आर्थिक सामथ्र्य वाले मंदिरों की भूमियों को विकसित करने का है। सरकार ने पुरानी गौशालाओं के लिए भी प्रति गाय के हिसाब से चारे-भूसे के लिए 20 रुपए प्रतिदिन की व्यवस्था की है। पहले मॉडल में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग अपनी योजनाओं से इसके लिए राशि खर्च करेगी। इसमें 132 करोड़ रुपए की राशि अनुपूरक राशि के तौर पर होगी।
इस प्रकार गौशालाओं पर वास्तविक खर्च इस पूरे खर्च से कहीं अलग होगा।
इस दौरान उन्होंने बताया कि पहले प्रति गाय के मानक से चारे-भूसे के लिए चार रुपए दिए जाते थे, जो अब सरकार ने बढ़ाकर 20 रुपए कर दिए हैं।
श्री भनोत ने कहा कि सरकार ने आध्यात्म विभाग का गठन किया है। पुजारियों के मानदेय में तीन गुना इजाफे के साथ पुजारी कल्याण कोष बनाया जा रहा है। राम वनगमन पथ के अंचलों के विकास के लिए प्रावधान किया गया है।
प्रत्येक नागरिक को पर्याप्त पेय जल उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता
वित्त मंत्री तरुण भनोत ने आज कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक को पर्याप्त मात्रा में संरक्षित और पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी उद्देश्य से जल का अधिकार अधिनियम का प्रारूप बनाया जा रहा है। श्री भनोत ने यहां विधानसभा में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बजट पेश करते हुए अपने भाषण में कहा कि इस अधिनियम के जरिए हम आने वाली पीढिय़ों का भविष्य भी सुरक्षित कर सकेंगे। इसके लिए बजट में एक हजार करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया है। जल के सम्यक उपयोग, जल स्रोतों के संरक्षण और पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी ग्रामीण बसाहटों में शुद्ध पेयजल प्रदाय के लिए हैंडपंप, नलजल और समूह जल प्रदाय योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। इसके लिए राज्य मद के साथ बाह्य वित्तीय संस्थाओं से भी ऋण लिया जा रहा है। ग्रामीण पेयजल के लिए चार हजार तीन सौ 66 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया है, जो कि पिछले वर्ष से लगभग 46 प्रतिशत अधिक है।
श्री भनोत ने बताया कि राज्य की समृद्धि के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार आवश्यक है। राज्य को नदियां प्राकृतिक उपहार में मिली है और सरकार इनकी पवित्रता बनाए रखते हुए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार कर रही है। वर्तमान में राज्य में 31 वृहद, 57 मध्यम और 441 लघु सिंचाई योजनाएं निर्माणाधीन हैं।
उन्होंने बताया कि नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण द्वारा मध्यप्रदेश को आवंटित 18़ 25 मिलियन एकड़ फीट जल का शत प्रतिशत उपयोग वर्ष 2024 तक सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई प्राथमिकता पर की जा रही है।
वित्त मंत्री ने बताया कि नगर भी राज्य की अर्थव्यवस्था के ग्रोथ इंजन हैं। नगरों में रोजगार के युक्तियुक्त अवसर, अधोसंरचना एवं नागरिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए सरकार कृत संकल्प है। सुगम एवं किफायती परिवहन के लिए इंदौर और भोपाल में मेट्रो रेल परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। नगरों में निवास करने वाले आवासहीन परिवारों को आवास के लिए 450 वर्गफीट का पट्टा तथा उस पर मकान बनाने के लिए ढाई लाख रुपए की राशि प्रदान कर शहरों में अपने घर के सपने को पूरा करने की दिशा में भी सरकार कार्य कर रही है। इसके लिए चार हजार दो सौ करोड़ रुपयों का बजट प्रस्तावित है।