कौन देता है देश विरोधियों को अवसर
   Date08-Jun-2019
ईद और ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी
पर यदि शांति के साथ कोई आयोजन होता तो किसी को आपत्ति का कोई कारण नहीं था। यह सब जानते हैं कि 1984 में सिखों की अटूट आस्था के केंद्र अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में भिंडरवाला और अन्य उग्रवादियों के खिलाफ सेना ने ऑपरेशन ब्लू स्टार की कार्रवाई की। इस कार्रवाई का आदेश तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिया था। इससे देश की रक्षा के लिए जिसे मार्शल कौम कहते हैं, उन सिखों की भावना आहत हुई। उसके बाद इंदिराजी की हत्या हुई। सिख विरोधी दंगे हुए, जिसका नेतृत्व कांग्रेसियों ने किया था। अब ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी पर बड़ी संख्या में सिख स्वर्ण मंदिर पहुंचे। वहां कुछ खालिस्तान समर्थक आतंकी भी पहुंचे। इन्होंने वहां तलवारें और बंदूकें लहराते हुए खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हुए वातावरण को विषैला कर दिया। हालांकि श्री अकाल तख्त साहेब के कार्यवाहक जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीतसिंह और एसजीपीसी के अध्यक्ष गोविंद सिंह लोंगवाला ने विवाद की निंदा की है। खालिस्तान के नारे लगाने वाले उग्रवादियों के खिलाफ ये कार्रवाई होना चाहिए। पंजाब में कांग्रेस सरकार है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर से पूछा जा सकता है कि ऐसे देश विरोधी तत्वों को स्वर्ण मंदिर में जाने और वहां खालिस्तान समर्थक नारे लगाने और हथियार लहराने का अवसर क्यों दिया गया। ऐसा क्या कारण है कि जहां भी कांग्रेस सरकारें रहती हैं, वहां देश विरोधी तत्व सिर उठाने लगते हैं। पंजाब में सिख आतंकवाद पाकिस्तान की साजिश थी। अब भी पाकिस्तान में गोपाल चावला जैसे भारत विरोधी आतंकियों को वहां पूरा संरक्षण प्राप्त है। नवजोत सिंह सिद्धू जिनकी राजनीति, जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करने की रही है। अब सिद्धू कांग्रेस में हैं, वे पाकिस्तान जाकर वहां के हुक्मरानों से गले मिलते हैं। यही नहीं, पाकिस्तान की बोली बोलते हैं। उनके खालिस्तान समर्थक उग्रवादियों से रिश्ते हैं। अब मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और सिद्धू के बीच कोल्डवार चल रहा है। माना जाता है कि मुख्यमंत्री उन्हें मंत्री पद से हटाना चाहते थे, लेकिन राहुल गांधी ने उन्हें ऐसा करने से रोका। मुख्यमंत्री ने खिन्न होकर उनको नगर विकास मंत्रालय से मुक्त कर दिया। पंजाब कांग्रेस में चल रही खींचतान जारी है, इसका भविष्य में क्या परिणाम होगा, इसकी अटकलें भी लगाई जा रही हैं। इसी तरह कश्मीर के पहलगांव की मस्जिद में कुछ आतंकवादी पहुंच गए। वहां उन्होंने हथियार लहराये, भारत विरोधी तकरीर की। सवाल यह है कि मस्जिदों में आतंकी कैसे पहुंच जाते हैं। वहां लोगों से पैसा वसूल करते हैं। ईद पर मस्जिद में जो युवक निकले, उन्होंने सुरक्षा बलों पर पथराव किया। हालांकि केंद्र की मोदी सरकार की आतंक के खिलाफ जो टॉलरेंस की नीति है, आतंकी मारे भी जा रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान की भारत विरोधी साजिश जारी है। चिंता इस बात की है कि भारत विरोधी सपोलों को यहां के लोगों का संरक्षण प्राप्त है।
दृष्टिकोण
कांग्रेस नेतृत्व को सन्निपात
ऐसा लगता है कि कांग्रेस की 2019 के चुनाव में जो पिटार्ई हुई, जिस तरह करारी पराजय का सामना करना पड़ा, उससे कांग्रेस नेतृत्व सन्निपात की स्थिति में पहुंच गया है। राहुल गांधी अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पहल कर चुके हैं। वे अध्यक्ष रहेंगे या नहीं? इस पर भी डांवाडोल स्थिति बनी हुई है। इंदिराजी को गाली देने वाले खालिस्तानियों से गले मिलने वाले नवजोत सिंह सिद्धू के खिलाफ कार्रवाई करने की मन:स्थिति में कांग्रेस नहीं है। राज्य नेतृत्व के बीच चल रही खींचतान को कोई रोकने की स्थिति में नहीं है। जो कांग्रेस के अवशेष बचे हैं, उनकी भगदड़ को रोकने वाला भी कोई नहीं है। तेलंगाना के दो तिहाई विधायकों अर्थात बारह कांग्रेसी विधायकों के दल का सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति में विलय हो गया। विधानसभा अध्यक्ष पी. श्रीनिवास रेड्डी ने भारतीय संविधान में निहित प्रावधानों के तहत कांग्रेस के बारह विधायकों को टीआरएस में विलय की मंजूरी दे दी है। तेलंगाना अब पूरी तरह कांग्रेस से मुक्त स्थिति में पहुंच रही है। कांग्रेस दल में केवल छह विधायक बचे हैं, वे भी कितने दिन टिकेंगे, इस बारे में कुछ कहना कठिन है। नई दिल्ली में कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि जनादेश और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की दिनदहाड़े हत्या की जा रही है। तेलंगाना के विधायक कांग्रेस से भाग रहे हैं और उनको रोकने वाला कोई प्रभावी नेता नहीं है। दिल्ली से लोकतंत्र एवं जनादेश की हत्या का रोना वे हारे-थके नेता रोते हैं, जिनका जनाधार खत्म हो गया है। कांग्रेस मुक्त भारत की बात चाहे भाजपा ने की हो। नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता और विकास-विश्वास के आधार पर भारत की जनता ने नरेन्द्र मोदी को दूसरे कार्यकाल के लिए भी केंद्र सरकार की बागडोर थमा दी और कांग्रेस को बुरी तरह नकारा। इससे कांग्रेस के मजबूत पेड़ भी उखड़ रहे हैं।