रोग का कारक बिगड़ती जीवनशैली
   Date07-Jun-2019
धर्मधारा
व र्तमान में हमारी जीवनशैली, कार्यशैली कुछ इस तरह की होती जा रही है
, जिसमें हम कई-कई घंटे एक ही अवस्था में बैठे रहते हैं और गलत ढंग से भी बैठे रहते हैं, जैसे-लंबी ड्राइविंग करते समय, कंप्यूटर पर व कार्यालय में कार्य करते समय, टेलिविजन व मोबाइल पर वीडियो देखते समय आदि। इस दौरान हम बैठने का जो तरीका अपनाते हैं, वह प्राय: सही नहीं होता।
इस तरह आजकल हम एक ऐसे उदासीन समाज का हिस्सा बनते जा रहे हैं, जिसमें हम स्वयं में ही बहुत व्यस्त हैं, उदाहरण के लिए अधिकांश पुरुषों को सुबह से लेकर शाम तक ऑफिस में व्यस्त रहना, घर में रहने वाली महिलाओं का टेलिविजन आदि देखने व घर-गृहस्थी के कार्यों में व्यस्त होना, लोगों का अपने कार्यस्थल की ओर जाते समय बसों में सफर करना या मोटरसाइकिल व कार में ड्राइविंग करना, कंप्यूटर पर काम करने के लिए कई-कई घंटे उसके सामने बैठे रहना आदि हमारी दिनचर्या का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं। इसका परिणाम हमारे समक्ष यह है कि हम अनजाने में ही अपनी पीठ को झुकाकर घंटों बैठे रहते हैं और हमें इस बात का एहसास ही नहीं हो पाता कि इसके कारण हमारी रीढ़ की हड्डी पर कितना बुरा प्रभाव पड़ता है। जब तक हमें अपनी पीठ के दर्द का एहसास नहीं होता, तब तक हम अपने गलत ढंग से बैठने पर ध्यान नहीं देते। बैठने का गलत तरीका हमारे आत्मविश्वास व हमारी बुद्धिमत्ता पर भी बुरा असर डालता है। इससे न केवल हमारी पीठ पर जोर पड़ता है, अपितु गरदन व इसके आस-पास के जोड़ों पर भी बुरा असर पड़ता है। अगर कोई व्यक्ति अधिक देर तक अपनी पीठ झुकाकर यानी कूबड़ निकालकर बैठ रहा है, तो उसके पीठ से लेकर सिर तक के रक्त-प्रवाह में बाधा आती है। परिणामस्वरूप यह सिर दर्द व पीठ में दर्द का एक कारण हो सकता है। बैठने व खड़े होने का गलत तरीका अचानक व्यक्ति के ऊर्जास्तर के गिरने का कारण बनता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि बाधित वायु-प्रवाह और मांसपेशियों का तनाव उसकी शारीरिक थकान का कारण बनता है। लंबे समय तक गलत ढंग से बैठना हमारे पाचनतंत्र पर भी बुरा असर डालता है, जब लोग पीठ झुकाकर यानी रीढ़ की हड्डी को मोड़कर बैठते हैं या फिर अधलेटे से बैठे होते हैं, तब ऐसी शारीरिक बनावट से उनके पाचन अंग दब जाते हैं।