भाजपा के राष्ट्रवादी एजेंडे को रोकने की साजिश
   Date04-Jun-2019
जयकृष्ण गौड़
चा हे विपक्ष के गले यह सच्चाई भले नहीं उतर रही हो, लेकिन लोगों की आशा, अपेक्षा और विश्वास में मोदी बसे है। अब राजनीति में 'मोदी सूत्रÓ का दौर चल रहा है। इस सच्चाई से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि 2019 के चुनाव में देश की जनता ने प्रधानमंत्री के लिए नरेन्द्र मोदी को चुना है, जिस तरह ईश्वर के निराह स्वरूप में सब देवी, देवता समाए हुए है, उसी तरह नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व में सभी एनडीए के सांसद दिखाई देते हैं। संसदीय लोकतंत्र में संघात्मक शासन व्यवस्था इस बारे में यह संदेह व्यक्त किया जाता रहा है कि 'वेस्ट मिस्टर मॉडलÓ में केन्द्र कमजोर रहता है, देश के संकट और गंभीर चुनौतियों का सामना ऐसी व्यवस्था में संभव नहीं होता। भारतीय जनता ने संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में ही नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रचंड बहुमत देकर मजबूर नहीं मजबूत शासन के लिए मत दिया। इससे स्पष्ट है संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी जनता ने ही कमजोर केन्द्र की आशंकाओं को दूर कर दिया। अब जनता मजबूत सरकार के कोई बहाने स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है। मोदी-2 सरकार की पहली मंत्रिमंडल की बैठक के प्रारंभ में नरेन्द्र मोदी ने महात्मा गांधी और सरदार पटेल की मूर्तियों पर पुष्प अर्पित कर बैठक का शुभारंभ किया, इसमें जाहिर है कि महात्मा गांधी की लोकतांत्रिक आवक और सरदार पटेल की दृढ़ इच्छाशक्ति में मोदी सरकार अपना दूसरा कार्यकाल पूरा करेगी। हालांकि पहले कार्यकाल में भी नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी, जीएसटी और सर्जिकल स्ट्राइक के कठोर निर्णय लिए। इस दृढ़ इच्छा शक्ति का ही परिणाम है कि देश की सवा सौ करोड़ की जनता ने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व पर आशा-अपेक्षा के साथ विश्वास व्यक्त किया है। हमारे यहां मुहावरा है कि पूत के लक्षण पालने में दिखाई देने लगते हैं। मोदी सरकार की मंत्रिमंडल की पहली बैठक में ही निर्णय लिया गया कि अब देश के सभी किसानों को छह हजार रु. सालाना किसान सम्मान निधि का लाभ मिलेगा। इसी तरह देश के तीन करोड़ छोटे व्यापारियों के लिए भी ऐसी पेंशन योजना लागू होगी। इसी तरह शहीदों के बच्चों को भी जो स्कालरशिप वर्तमान में दो हजार से बढ़ाकर ढाई हजार और लड़कियों के लिए ढाई हजार से बढ़ाकर तीन हजार कर दी है। मंत्रियों को विभाग दिए जाने के दिन ही मंत्रिमंडल की बैठक हुई, जिसमें ये निर्णय लिए गए। किसको मंत्री नियुक्त करना और किसको क्या दायित्व देना है, इसके पूरे अधिकार प्रधानमंत्री को रहते हैं। इस नए मंत्रिमंडल में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को गृहमंत्री की कमान देना एवं सेनानिवृत्त विदेश सचिव जयशंकर को विदेश मंत्री की कमान देने के बारे में सबसे अधिक चर्चा है। मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने चुनाव में कमाल किया। अब शाह गृहमंत्री है, आतंरिक सुरक्षा से संबंधित सवालों के उत्तर उन्हें देना है, भापा के संकल्प पत्र में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370 एवं 35ए को समाप्त करना और घुसपैठ कर भारत में बसे विदेशियों को बाहर करने संकल्प है। अमित शाह ने अपनी चुनाव सभाओं में भी ये बातें कही है कि ये सारे आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामले है, इनको हल करने की कड़ी चुनौती, अमित शाह के सामने है। विदेश नीति और संबंधित चुनौतियों का सामना जयशंकर को करना। भारत दुनिया में सर्वोच्च स्थान पर पहुंचे, इस संकल्प की पूर्ति में जयशंकर की निर्णायक भूमिका होगी। कृषि मंत्री की जिम्मेदार मध्यप्रदेश के नरेन्द्र तोमर को सौंपी गई है। ग्रामीण विकास भी कृषि के साथ जुड़ा है। किसान पेंशन योजना का विस्तार पहली मंत्रिमंडल की बैठक में किया गया। नरेन्द्र मोदी का संकल्प है कि इस कार्यकाल में किसान की आय दुगना करना। इस लक्ष्य की पूर्थि नरेन्द्र सिंह तोमर को करना है। इसकी शुरुआत किसान पेंशन योजना से हो गई है। नितिन गडकरी, रविशंकर प्रसाद, पीयूष गोयल और धर्मेन्द्र प्रधान के विभाग यथावत है, निर्मला सीतारमण को सुरक्षा मंत्री के पद से अलग कर वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। सवाल केवल मंत्रालय की जिम्मेदारी का नहीं है, सवाल है काम करके दिखाने का। अब कोई इस बात को स्वीकार नहीं करेगा कि राम मंदिर निर्माण में संवैधानिक या न्यायालयीन प्रक्रिया की समस्या है। समस्याओं में से रास्ता निकालने की जिम्मेदारी मोदी सरकार की है। इसी तरह देश में अलग जम्मू-कश्मीर की अस्थाई धारा 370 एवं 35ए को खत्म करने में यह बहाना नहीं चल सकता कि कश्मीर घाटी के लोग इन धाराओं को हटाना कभी स्वीकार नहीं कर सकते।
ये केवल सैद्धांतिक बातें नहीं, बल्कि देश की एकता-अखंडता और सुरक्षा से जुड़े सवाल है। इसी तरह समान कानून का सवाल है। इन सिद्धांतों से ही भाजपा की पहचान जुड़ी हुई है। डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी का बलिदान भी कश्मीर की अलग पहचान को समाप्त करने के लिए हुआ। अभी तक स्पष्ट बहुमत नहीं होने के कारण बताया जाता था, अटलजी की सरकार गठबंधन की बाध्यताओं के साथ चली। अब जनता ने नरेन्द्र मोदी को प्रचंड बहुमत दिया है। अगले वर्ष राज्यसभा में भी एनडीए का बहुमत हो जाएगा। इसलिए अब कोई बहाना नहीं चल सकता। वैसे तो भारतीय जनता पार्टी का फैलाव पूरे देश में है, ग्यारह करोड़ सदस्य संख्या होने से दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक दल का दर्जा भाजपा को प्राप्त है। जो बातें, जो वादे और संकल्प पत्र में जो भाजपा ने कहा है, उनकी पूर्ति का दायित्व मोदी सरकार का है। भाजपा नेतृत्व पर जनता का भरोसा इसलिए है कि जो कहा है, वह मोदी सरकार करेगी। सबका साथ-सबका विकास के साथ सबके विश्वास की बात राजधर्म के अनुकूल है। जो विरोध में है, उनको भी विश्वास में लेना चाहिए, लेकिन इस बात क ध्यान में रखना होगा कि जो देश के साथ नहीं है, उनको विश्वास में नहीं लिया जा सकता। ऐसे राजनीतिक दल है, जो केवल दल की राजनीति करते हैं, उनका राष्ट्र हित से सरोकार नहीं है, जिनका एजेंडा केवल भाजपा विरोध का है। कांग्रेस जिनके लोकसभा में 52 सदस्य है, सोनिया गांधी दल की नेता है, राहुल गांधी ने कहा है कि हम संविधान के लिए संघर्ष करेंगे। चाहे हमें कोई समर्थन नहीं दे, लेकिन हम शेर की तरह संघर्ष कर विजयी होंगे। भाजपा के खिलाफ कांग्रेस का एजेंडा है जिस तरह चुनाव में भाजपा विरोधियों के निशाने पर केवल मोदी थे। अब भी नकारात्मक राजनीति का और प्रारंभ होगा। संसद में हंगामा, बहिंगमन और संसद की कार्यवाही में रुकावट डालने की कोशिश कांग्रेस करेगी। भाजपा के साथ देश की जनता खड़ी है। सांस्कृतिक अवधारणा के अनुकूल राष्ट्रवाद भाजपा विरोधियों को पच नहीं रहा है। यही कारण है कि प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जय श्रीराम के नारे से भड़कती है। जो जय श्रीराम बोलता है, उन पर लाठियां बरसाती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी प. बंगाल की सभा में कहा था कि श्री राम हमारी संस्कृति, संस्कार में है। जिस तरह वंदे मातरम का उद्घोष आजादी की प्रेरणा का मंत्र बन गया था, उसी तरह जय श्रीराम का जयघोष प. बंगाल को ममता बनर्जी के चंगुल से मुक्त कराएगा। संघर्ष इस बात का है कि एक ओर ऐसे कथित सेकूलर नीति के वाहक है, जो उनकी कथा को काल्पनिक कहते हैं, जो श्रीराम के जन्म स्थान पर मंदिर निर्माण में बाधक है। जो राम की संस्कृति को स्वीकार नहीं करते। ऐसे विचार और ऐसे नेतृत्व से संघर्ष की स्थिति को टाला नहीं जा सकता। इस वैचारिक संघर्ष में राष्ट्रवाद को विजयी होना है। भाजपा को प्रचंड बहुमत इसलिए मिला कि श्रीराम की संस्कृति से प्रेरित जनता भाजपा के साथ खड़ी हो गई, जिनके कारण भाजपा की झोली वोटों से भर गई, उस जनता के विश्वास को बनाए रखना भाजपा और मोदी सरकार का दायित्व है। कांग्रेस को संघर्ष की बातें कर रही है, उससे यह जाहिर होता है कि चाहे राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का मामला हो या अस्थायी धारा 370 एवं 35ए को खत्म करने का सवाल हो, जब भी राष्ट्रवादी एजेंडे पर मोदी सरकार आगे बढ़ेगी, तो ये संस्कृति विरोधी सपोले संविधान की रक्षा के नाम पर हायतौबा प्रारंभ करेंगे। संविधान के लिए संघर्ष की बात के पीछे यह साजिश है कि भाजपा के राष्ट्रवादी एजेंडे को किसी भी तरह पूरा नहीं होने देना। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक हैं)