राष्ट्रनिष्ठ वादों को पूरा करने की चुनौती
   Date03-Jun-2019
ऐसा लगता है कि प. बंगाल में एक ओर श्रीराम की सेना है और
दूसरी ओर है श्रीराम विरोधी सेना। दोनों ओर से शंखनाद की गूंज सुनाई दे रही है। संघर्ष है श्रीराम की संस्कृति और संस्कृति विरोधी विचारों का। वहां संघर्ष है श्रीराम के समर्थक और विरोधियों के बीच। यह वैचारिक संघर्ष पूरे देश का है। चाहे नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला हो, लेकिन संस्कृति विरोधी सपोले संस्कृति आधारित मोदी सरकार के एजेंडे को सफल होने में रुकावट डालेंगे। सोनिया गांधी ने कांग्रेस संसदीय दल की नेता बनने के बाद कहा कि हम संविधान के लिए शेर की तरह संघर्ष करेंगे। यह सवाल है कि संविधान पर ऐसा कौन सा संकट है, जिसके लिए सोनिया गांधी शेर के समान संघर्ष की बात कर रही है। इस संघर्ष की पटकथा इस तरह लिखने की तैयारी दिखाई देती है, जब श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के एजेंडे को मोदी सरकार आगे बढ़ाएगी। तो संविधान खतरे में है, यह होहल्ला प्रारंभ होगा। जब मोदी सरकार धारा 370 या 35ए को खत्म करने की पहल करेगी तो कांग्रेस और भाजपा विरोधी दल संविधान खतरे की बात का बवंडर खड़ा करेंगे। इसी तरह समान कानून या तीन तलाक का कानून बनाने की पहल में भी कांग्रेस बाधा खड़ा करेगी। यह सब राष्ट्र की एकता, अखंडता से जुड़े सवाल है, लेकिन संविधान के खतरे का होहल्ला के द्वारा यह साजिश की जाएगी कि मोदी सरकार संविधान विरोधी है। सोनिया-राहुल की बातों से इसी साजिश की पटकथा लिखने की तैयारी है कि किसी तरह मोदी सरकार को संविधान विरोधी सरकार कहकर बदनाम करना। 2019 में नरेन्द्र मोदी पर निशाना (टारगेट) करने वाले दलों को जनता ने बुरी तरह पराजित कर दिया। अब ये सब घायल सपोले मिलकर मोदी सरकार के विरोध में साजिश कर सकते हैं। चाहे मोदी सरकार को जनता का विश्वास प्राप्त है, लेकिन चुनाव के बाद मोर्चे पर मोदी सरकार होगी और उसे विपक्ष के आक्रामक रवैये का उत्तर देना होगा। जनता ने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा इसलिए किया है कि राष्ट्रवादी एजेंडे को विपरीत परिस्थिति में भी पूरा किया जाएगा। अभी तक जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का मामला इसलिए उलझा रहा कि भाजपा इस मामले को न्यायालय या असहमति से हल कराने की कोशिश करती रही और भाजपा विरोधी दल विशेषकर कांग्रेस हिन्दुओं की भावना से जुड़े इस मामले को न्यायालय में निर्णय नहीं होने देने के बारे में रुकावटें डालती रही। सर्वोच्च न्यायालय के कहने पर भी सहमति नहीं बन सकी। सहमति के आधार पर यह मामला निर्णायक स्थिति में नहीं आ सकता। न्यायालय को ही निर्णय करना होगा। यदि इस मामले को लंबा खींचा गया तो हिन्दू जनता के धैर्य की सीमा टूट सकती है। इस मामले के बारे में मोदी सरकार को ही निर्णय लेना होगा। इसी प्रकार धारा 370 एवं 35ए के मामले की उलझन है। मोदी सरकार को दृढ़ता से इन मामलों में निर्णय लेना होगा।
दृष्टिकोण
श्रीराम विरोधियों की नाव डूबेगी
1947 में हमें आजादी मिली, इसके लिए भी करीब 162 वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा। इन सच्चाई को भी जानना होगा कि यह आजादी एक-दो नेताओं के कारण नहीं, बल्कि सैकड़ों देशभक्तों के बलिदान से मिली है। यह भी ऐतिहासिक सच्चाई है कि देश की जनता आजादी के संघर्ष के साथ खड़ी थी। आजादी के संघर्ष में कुछ लोगों का नाम इतिहास में दर्ज हो, लेकिन जब जनता महानायक के नाते खड़ी हो जाती है तो फिर सफलता में कोई संदेह नहीं होता। आपातकाल की बेडिय़ों से मुक्त होने का सवाल हो या कोई भ्रष्टाचार का मुद्दा हो, भारत के लोगों ने इस बारे में मत देकर राजनीतिक बदलाव किया। 2014 एवं 2019 के चुनाव में भी जनता ने भरपूर समर्थन इसलिए दिया कि राष्ट्रवादी विकास नीतियों को लागू किया जाए। इस विचार के विरोध में कांग्रेस और अन्य छोटे दल है, जो किसी भी तरह मोदी सरकार को सफल होने नहीं देना चाहते। कांग्रेस शेर के समान संघर्ष करने की बात कर रही है। शेर से सवा सेर का मुकाबला कैसा होगा। मोदी विरोधियों की टर्र-टर्र प्रारंभ हो गई है, जिस तरह 2019 के चुनाव में मोदी को टारगेट किया गया। लोकसभा का चुनाव सांसदों के चयन का होता है, लेकिन जब विरोध एक नेतृत्व पर केन्द्रित हो गया तो फिर यह चुनाव प्रधानमंत्री के चयन का हो गया। एक नायक को विपक्ष के टारगेट किया तो नायक की लोकप्रियता लहर प्रारंभ हो गई। इस जनलहर ने विपक्ष को बुरी तरह धराशायी कर दिया। अब विपक्ष अपना अस्तित्व बचाने के लिए संसद के मंच का भरपूर उपयोग करेगा। प. बंगाल में श्रीराम के नाम की जय से ममता बनर्जी घबराई हुई है। जब जनता के मुखौटे श्रीराम के हो जाते हैं तो फिर राम की विजय को कोई नहीं रोक सकता। प. बंगाल में श्रीराम विरोधी जनता के समर्थन से ममता बनर्जी की नाव किनारे नहीं लग सकती, उसे डूबना ही है।