सफलता का सूत्र
   Date27-Jun-2019

ए क लड़का था। काम की तलाश में वह अपने बैंगलुरु में रहने लगा। कुछ समय बाद उसे एक कारखाने में काम मिल गया। एक दिन उसने एक धनवान व्यक्ति को देखा तो उसकी चमक-दमक से बहुत प्रभावित हुआ। अब लड़के ने भी मन में धनवान बनने की ठान ली। धीरे-धीरे उसने कुछ धन एकत्र कर लिया। इसी बीच एक विद्वान से उसका परिचय हुआ। उसे लगा कि धनवान से अधिक सम्मान तो विद्वान का होता है। अत: विद्वान बनना चाहिए। अब वह कमाना छोड़कर विद्वान बनने के लिए पढ़ाई करने लगा। वह मन लगाकर पढ़ते हुए अक्षर ज्ञान प्राप्त कर चुका था कि अचानक उसने एक संगीतज्ञ को देखा। उसे विद्वान एवं धनवान से अधिक संगीतज्ञ अच्छा लगा। संगीतज्ञ बनने का लक्ष्य बनाकर उसने पढ़ाई छोड़ दी और संगीत का अभ्यास करने लगा। कुछ वर्ष तक संगीत का अभ्यास करने के बाद भी वह संगीतज्ञ नहीं बन सका। इस प्रकार कई वर्ष के बाद भी वह न तो धनवान बन सका और न ही विद्वान और न ही संगीतज्ञ। एक दिन वह योगाचार्य राघवेन्द्र स्वामी जी के पास गया। उसने सारा घटनाक्रम स्वामी जी को बतलाया। स्वामी जी ने उसकी व्यथा सुनकर उसे कहा- 'बेटा! दुनिया बहुत बड़ी है, जहाँ जाओगे वहाँ कोई न कोई आकर्षण अवश्य दिखाई देगा। तुम उसमें फँस कर अपना लक्ष्य बदलते रहोगे तो कभी उन्नति नहीं कर पाओगे। जीवन में सफलता चाहते हो तो एक लक्ष्य तय करो और पूरी लगन से उसे प्राप्त करने में लग जाओ, अवश्य ही तुम्हारी उन्नति होगी।