ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरिजी को भू-समाधि दी
   Date26-Jun-2019

हरिद्वार द्य 26 जून (वा)
भारत माता मंदिर के संस्थापक और महामंडलेश्वर ब्रह्मलीन सत्यमित्रानंद गिरी को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आश्रम परिसर में ही भू-समाधि दी गई। बुधवार को भू-समाधि से पहले वरिष्ठ नेताओं, नामी संतों समेत विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
ठ्ठ केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ब्रह्मलीन सत्यमित्रानंद सच को स्वीकार करने वाले संत थे। व्यक्तिगत उन्होंने अपने लिए कुछ नहीं किया। वे चाहते थे कि भारत विश्व गुरु बनकर विश्व का नेतृत्व करे। वे यही सपना देखा करते थे। सारे लोग एक ही परिवार के सदस्य होते हैं। यह संदेश इसी धरती से विश्व को गया है। उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
ठ्ठ केंद्रीय राज्य मंत्री साध्वी निरंजनी ज्योति ने कहा कि वर्ष 1982 से वे ब्रह्मलीन सत्यमित्रानंद गिरी के सानिध्य में आई थी। वे संतों के विशेष आभूषण थे। संत समाज क्या होता है ये उनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है। उनके ब्रह्मलीन होने से संत समाज के लिए यह अपूर्णीय क्षति है। ऐसे संत के आदर्श पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देना होगा।
ठ्ठ बाबा रामदेव ने कहा कि श्री राम मंदिर निर्माण सत्यमित्रानंद का सपना था। वे राष्ट्र में सभी का श्री राम जैसा चरित्र चाहते थे। उनके सपने को हम सभी साकार करने की दिशा में काम करेंगे। श्री राम मंदिर निर्माण में अब ज्यादा देर नहीं है। उनका सपना शीघ्र साकार होगा।
ठ्ठ केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने ब्रह्मलीन सत्यमित्रानंद गिरी को पुण्य आत्मा बताया। कहा कि भारतीय संस्कृति की पताका को विश्व में फहराने का श्रेय उन्हीं को जाता है। डॉ. निशंक ने कहा कि वह आज हमारे बीच में नहीं है,  
लेकिन उनके विचार और दिखाए गए मार्ग पर ही चलकर उनके सपने को साकार किया जा सकता है। इस दौरान ब्रह्मलीन सत्यमित्रानंद के शिष्य और उत्तराधिकारी आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी के अलावा नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, आरएसएस सह सरकार्यवाह गोपाल कृष्ण, आचार्य बालकृष्ण समेत कई वरिष्ठ संत शामिल हुए।
सत्यमित्रानंद के ब्रह्मलीन होने पर हरिद्वार में संत समाज में शोक - स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी के ब्रह्मलीन हो जाने पर हरिद्वार के संत-महंतजनों एवं अखाड़ों में शोक व्याप्त है। श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के अन्तर्राष्ट्रीय एवं अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि, सभापति श्रीमहंत प्रेम गिरि, अन्तर्राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरि, राष्ट्रीय सचिव श्रीमहंत देवानंद सरस्वती ने अखाड़े की ओर से ब्रह्मलीन स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। श्रद्धांजलि देने वालों में श्री रामानुजा संप्रदाय की ओर से जगद्गुरु रामानुजाचार्य विद्याभास्कर, स्वामी विष्णु विक्रम, श्री जयराम आश्रम के पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव महंत रविन्द्रपुरी, महामंडलेश्वर हरिचेतनानन्द, महंत कमलदास, सतपाल ब्रह्मचारी, ऋषिश्वरानन्द, श्री विश्नोई आश्रम के श्रीमहंत राजेन्द्रानन्द, महंत विनोद गिरि, महंत रूपेन्द्र, विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय नेता राजेन्द्र पंकज, लाल माता मंदिर के संचालक भक्त दुर्गादास शामिल थे।