वन विभाग का दावा,मानसून में लगेंगे 9.20 लाख पौधे
   Date23-Jun-2019

इंदौर ठ्ठ स्वदेश समाचार
मानसून के दौरान वन मंडल के द्वारा इंदौर में 9.20 लाख पौधे लगाने का दावा किया गया है। इसके लिए सभी तरह की तैयारियां पूरी होने की बात भी कही गई है, लेकिन सवाल यह है कि वास्तव में इतने पौधे लगेंगे और अगर लगेंगे तो सुरक्षित रहेंगे। क्योंकि पौधारोपण के मामले में वन विभाग का भ्रष्टाचार जगजाहिर है।
मानसून के दिनों में वन मंडल के द्वारा इंदौर में प्रतिवर्ष विभिन्न किस्म के बड़ी संख्या में पौधे लगाए जाते हैं। इस बार भी इसकी तैयारियां कर ली गई है। वन संरक्षक महेन्द्रसिंह सिसौदिया की माने तो मानसून के दिनों में कुल 9.20 लाख पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए मंडल की चारों ही रेंज इंदौर, मानपुर, महू व चौरल में इतनी संख्या में गड्ढे भी कर लिए गए हैं। पौधारोपण के बाद तार फैंसिंग भी की जाएगी। पौधे विभाग के ही वन विस्तार अनुसंधान द्वारा तैयार किए गए हंै और इनको सीधे शासन के द्वारा भुगतान भी कर दिया गया है। 10 रुपए प्रति पौधे की दर से भुगतान किया गया है। इस तरह से सिर्फ पौधों पर ही 92 लाख रुपए खर्च किए गए हैं। इसके अलावा गड्ढे खोदने, तार फैंसिंग, खाद, वर्मी कम्पोस्ट आदि पर भी लाखों रुपए की राशि खर्च होना तय है। करीब 1.50 करोड़ रुपए पौधारोपण पर खर्च होंगे। पौधारोपण के लिए प्रत्येक रेंज में 3-3 प्रमुख स्थान चिंहित किए गए हैं। बांस, सागौन, शीशम, नीम, करंज, आंवला, पीपल, बरगद आदि के पौधे रोपित किए जाएंगे।
रेंजर व डिप्टी रेंजर करते हंंै गड़बड़ी-वन मंडल ने कागजी आंकड़े तो तैयार कर लिए हंै, लेकिन मैदानी आंकड़े कितने वास्तविक है ये विभागीय अधिकारी भलीभांति जानते हंै। हर वर्ष लाखों पौधे रोपित करने का दावा किया जाता है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही होती है। वन मंडल के रेंजर, डिप्टी रेंजर सहित निचले स्तर के कर्मचारी पौधारोपण व वनों की अवैध कटाई के माध्यम से प्रति वर्ष लाखों रुपए का भ्रष्टाचार करते हंै। इस भ्रष्टाचार को विभाग के सीनियर अधिकारियों का भी परोक्ष संरक्षण रहता है। इसलिए तय है कि मानसून के तीन माह में इस बार भी पौधारोपण में भ्रष्टाचार होना तय है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 9.20 लाख पौधे लगाने का दावा विभाग की ओर से किया जा रहा है, पर इनके रोपण के बाद कौन गिनने जा रहा है कि कितने पौधे लगे हंै और कितने नहीं। इसी बात का लाभ उठाकर प्रस्ताव लाखों पौधो का तैयार कर लिया जाता है और रोपित 2-3 लाख से ज्यादा नहीं होते हैं।