आभूषण बाजार में रोजगार के अवसर पैदा करने हेतु कवायद तेज
   Date23-Jun-2019

इंदौर (व्यापार प्रतिनिधि)। आम बजट 5 जुलाई को आ रहा है, इसके लिए वित्त मंत्री विभिन्न स्तर पर बातचीत कर बजट की संभावनाएं तलाश रही है। बजट में सबसे बड़ा मुद्दा होगा रोजगार का सृजन करना। बेरोजगारी दूर करने के उपायों पर विशेष ध्यान होगा। इसलिए प्रमुख आभूषण बाजारों में रोजगार के हालात पर नीति आयोग सर्वेक्षण करा रहा है तथा गोल्ड बाजार में जान फूंकने की कवायद तेज हो गई है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले कार्यकाल में ज्वेलर्स को एक सम्मेलन में कहा था कि देश के विकास व रोजगार के मामले में गोल्ड सेक्टर को प्रचूर संभावनाओं वाला बताया था। उन्होंने कहा कि अभी भी देश की अर्थव्यवस्था में आभूषण उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिसके तहत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में गोल्ड सेक्टर की हिस्सेदारी सात प्रतिशत है और वस्तु निर्यातम ें 14 प्रतिशत है। वहीं गोल्ड सेक्टर 50 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रुप से रोजगार प्रदान करता है। ऐसे में गोल्ड सेक्टर से अगले दो-तीन वर्षों में 30 लाख नए रोजगार सृजित होने की प्रचूर संभावनाएं हैं। देश के विकास एवं रोजगार में गोल्ड सेक्टर की विशेष अहमियत को देखते हुए केंद्र सरकार की तरफ से इस सेक्टर में नई जान फूंकने की कवायद तेज कर दी है। जिसके तहत ज्वैलर्स से लेकर कारीगर और श्रमिक की दशा व दिशा सुधारने को लेकर गोल्ड सेक्टर को आकर्षक बनाने की तैयारी हो रही है। जिसको लेकर नीति आयोग को एक विस्तृत योजना बनाने को कहा गया है। ऐसे में इसको लेकर नीति आयोग की तरफ से शीघ्र ही देश के प्रमुख गोल्ड बाजारों में सर्वेक्षण की कवायद तेज करने की फिराक में है। बहरहाल टेक्स से संबंधित व्यवहारिक दिक्कतों के चलते गोल्ड सेक्टर विशेष रूप से जूझ रहा है जिस समस्या को दूर करने की अति आवश्यकता है ताकि गोल्ड सेक्टर के कारोबार को विशेष रूप से बढ़ावा मिल सकेगा और यह रोजगार बढ़ाने में विशेष रूप से सहायक होगा। दरअसल देश में रोजगार की संभावनाओं का आकलन और गोल्ड मार्केट में कर्मचारियों की स्थिति नाम से होने वाले इस सर्वे को लेकर दिल्ली, जयपुर, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरू, कोयम्बटूर व कोच्चि जैसे शहरों को चिन्हित किया गया है और इन शहरों में गोल्ड का कारोबार भारी पैमाने पर होता है। यह सर्वेेक्षण नेशन इंस्टीट्यूट आफ लेबर इकोनामिक्स रिसर्च एंड डेवपलमेंट (एनआईएलईआरडी) द्वारा किया जाएगा जो कि नीति आयोग के अंतर्गत कार्यरत है जिसको लेकर एनआईएलईआरडी ने ब्यूरो आफ रिसर्च आन इंडस्ट्री एण्ड इकोनामिक्स फंडामेंटल्स (बीआरआईईएफ) से डाटा संग्रिह को लेकर करार किया है। इस सर्वे में गोल्ड मार्केट का विकास, खनन, निर्माण और खुदरा बिक्री से संबंधित कर्मचारियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति के साथ वस्तु एवं सेवा कर जीएसटी व उत्पाद शुल्क को लेकर ज्वैलर्स से सवाल किए जाएंगे। इस सर्वे में गोल्ड सेक्टर के प्रत्येक मुद्दे को छूने की कोशिश होगी। जिसके तहत 15 से लेकर 20 दिनों तक यह सर्वे चलाया जाएगा। जिसको लेकर एनआईएलईआरडी की तरफ से देश के आभूषण बाजार से सीधा संपर्क साधना शुरू कर दिया है।