मानसून, आरबीआई और सरकार...
   Date11-Jun-2019
नई सरकार ने अपना कामकाज संभाल
लिया है...लेकिन इससे भी बढ़कर झुलसाने वाली गर्मी के बीच राहत देने का काम देर से ही सही..,कम से कम मानसून की उस दस्तक ने किया है जिसका हर किसी को इंतजार रहता है...अब इन्हीं के बीच आरबीआई ने भी राहत भरा कदम बढ़ाकर सरकार के आने वाले बजट को लेकर आमजन को उम्मीदवान कर दिया है...मानसून ने केरल के तट से टकराने का अपना कार्यक्रम दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया है.., अब इसकी राहत भरी खबर 6 जून की बजाय 8 जून को आने की उम्मीद जताई गई थी... अंतत: उसी समयावधि में मानसून ने केरल में दस्तक देकर उम्मीदों पर खरा उतरने की राह दिखाई...उधर 6 जून को रिजर्व बैंक ने मानसून से पहले राहत की बौछार कर दी...उसने चार महीने में तीसरी बार रेपो दरें चौथाई फीसदी कम कर दीं...इसी के साथ ही रेपो दरें पिछले कई साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई है...देश के बैंक जिस ब्याज दर पर रिजर्व बैंक से कर्ज हासिल करते हैं.., उसे रेपो दर कहा जाता है... रेपो दर कम होने का अर्थ होगा बैंक अब कम दरों पर कर्ज दे सकेंगे... इसके साथ ही उद्योगों और होम लोन की ब्याज दरें कम होने के आकलन भी शुरू हो गए हैं...इस समय देश में जो आर्थिक स्थिति है और जो मंदी का माहौल है, उसके चलते ऐसी राहत का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था... हाल ही में बीती तिमाही की विकास दर पिछली 21 तिमाही में सबसे निचले स्तर पर रही है...महंगाई दर बहुत ज्यादा नहीं है.., इसलिए रिजर्व बैंक इस काम को बड़े आराम से अंजाम भी दे सकता था... उम्मीद की जा रही है कि रिजर्व बैंक की यह कर्ज नीति मंदी को कुछ हद तक थामने का काम कर सकती है... कितनी.., यह कहना अभी मुश्किल है... दिलचस्प बात यह है कि खुद रिजर्व बैंक ने अपनी नीति में सारी उम्मीद उस मानसून से बांधी है, जो फिलहाल दो दिन और लेट हो गया है... रिजर्व बैंक को उम्मीद है कि मानसून अगर सामान्य रहा.., तो अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाएगी...लेकिन हैरत की बात यह रही कि कर्ज नीति की घोषणा के तुरंत बाद ही शेयर बाजार अचानक मुंह के बल गिरा... पिछले आम चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद से ही बाजार लगातार ऊपर जा रहा था और बंबई शेयर बाजार का संवेदनशील सूचकांक तो 40 हजार की ऐतिहासिक बुलंदी को भी पार कर गया था... लेकिन नई कर्ज नीति की घोषणा होते ही वह टूटकर 553 अंक नीचे आ गया... इस साल बाजार में एक दिन में इतनी गिरावट पहली बार देखने को मिली है.., वह भी तब.., जब दुनिया भर के बाजारों में स्थितियां सामान्य होती दिख रही हैं... पूंजी बाजार के माहिरों का कहना है कि रिजर्व बैंक ने जो राहत दी.., उसे बाजार पहले से ही मानकर चल रहा था और इसी हिसाब से उसने पिछले दो दिनों में उछाल भरी थी... इसलिए नई कर्ज नीति में उसे कुछ नया नहीं दिखा और वह एकाएक लुढ़क गया...शेयर बाजार को अर्थव्यवस्था को कोई बहुत अच्छा सूचकांक नहीं माना जाता.., इसलिए इससे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता.., पर बाजार की गति यह तो बताती ही है कि कर्ज नीति सारी समस्याओं का रामबाण नहीं है... पूरी अर्थव्यवस्था में कर्ज नीति एक महत्वपूर्ण.., लेकिन छोटी भूमिका निभाती है... अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने और तेज विकास दर की ओर ले जाने में असल भूमिका सरकार को ही निभानी होगी... विकास दर का लगातार नीचे जाना और बेरोजगारी की दर का बढऩा ऐसी समस्याएं हैं.., जिन पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है... ये चिंताएं रिजर्व बैंक की कर्ज नीति में भी दिखाई दी हैं और उम्मीद है कि अगले बजट में सरकार इसकी कोशिश करती दिखेगी... तब तक शायद मानसून को लेकर स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी.., वैसे भी अर्थनीति को मानसून पर निर्भरता से आगे ले जाने की जरूरत है... अब मानसून ने समय पर आकर राहत दी तो दूसरी तरफ रिजर्व बैंक ने भी राहत भरी घोषणाएं की है...उम्मीद अब इससे बढ़कर केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर आ टिकी है..,क्योंकि संसद के मानसून अर्थात पावस सत्र में आम बजट पेश किया जाएगा...इस बजट में किस तरह के प्रावधान, राहतें और रोजगार, विकास और निर्माण को गति देने के कदम उठाए जाते हैं...उसी पर तय होगा कि रिजर्व बैंक द्वारा दी गई राहतें और शेयर बाजार द्वारा लगाई गई उम्मीदों के बीच आमजन और नौकरीपेशा से लेकर उद्यमियों तक के लिए सरकार की लोकहितकारी नीति क्या होगी..?