राष्ट्रीय पटल पर नए राजनीतिक चरित्र का उभार
   Date10-Jun-2019
अवधेश कुमा
न रेन्द्र मोदी मंत्रिमंडल की पहली बैठक का फैसला सरकार की सोच और दिशा का संकेत देने वाला है। इसमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत अब सभी किसानों को सालाना 6,000 रुपये मिलेंगे। पहले इस योजना में केवल लघु और सीमांत किसानों को शामिल गया था। भाजपा ने अपने चुनावी संकल्प पत्र में इस योजना में सभी किसानों को शामिल करने का वादा किया था। फिर किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए पेंशन योजना का भी ऐलान किया गया। इसका भी भाजपा के संकल्प पत्र में वायादा किया गया था। पेंशन योजना के तहत 18 से 40 वर्ष के लोगों को 60 साल की उम्र के बाद प्रति महीने 3 हजार रुपये पेंशन मिलेगी। पेंशन योजना के तहत 12 से 13 करोड़ लोग कवर होंगे। पहले चरण में 5 करोड़ लोगों को कवर करने का लक्ष्य है। व्यापारियों के लिए पेंशन योजना से करीब 3 करोड़ खुदरा व्यापारी और दुकानदारों को फायदा मिलेगा। जाहिर है, इन योजनाओं से किसानों, छोटे व्यापारियों के जीवनस्तर में सुधार होगा और उन्हें सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। मंत्रिमंडल ने तीसरे फैसले में नैशनल डिफेंस फंड के तहत प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना में बदलाव करते हुए शहीद सुरक्षा बलों के लड़कों को हर महीने 2000 रुपए की जगह 2500 रुपए एवं लड़कियों को अब 2250 रुपए की जगह 3000 रुपए छात्रवृत्ति मिलेगी। छात्रवृत्ति का दायरा बढ़ाते हुए इसमें राज्य पुलिस को भी शामिल किया गया है। आतंकी या माओवादी हमले में शहीद हुए राज्य पुलिस के बच्चों को भी अब छात्रवृत्ति मिलेगी। यह नरेन्द्र मोदी की आर्थिक सामाजिक विकास और राष्ट्रवाद, सुरक्षा तथा सैन्य पराक्रम को साथ लेकर आगे बढऩे की नीति का स्पष्ट द्योतक है। इससे यह साफ हो जाता है कि आने वाले पांच वर्षों में सरकार की दिशा क्या होगी।
इसका आभास भाजपा ने चुनाव के लिए जारी अपने संकल्प पत्र में विस्तार से करा दिया था। उस संकल्प पत्र की शुरुआत राष्ट्रवाद और सुरक्षा से होती है तथा सामाजिक-आर्थिक विकास से होते हुए संस्कृति तक विस्तारित हो जाती है। इसके कवर पृष्ठ पर संकल्पित भारत सशक्त भारत शब्द प्रयोग है तो पीछे के पृष्ठ पर विचारधारा के तीन प्रमुख बिन्दु थे- राष्ट्रवाद हमारी प्रेरणा, अन्त्योदय हमारा दर्शन, सुशासन हमारा मंत्र। प्रधानमंत्री ने अपनी संकल्पना में स्पष्ट कहा था कि हम स्वतंत्रता के 100 वर्ष यानी 2047 के भारत की कल्पना लेकर आगे बढ़ रहे हैं। उस समय तक भारत को विश्व का महानतम और समृद्धतम देश बनाने की ठोस आधारभूमि में हम 2019 से 2024 के अपने कार्यकाल में तैयार कर देंगे। मोदी के आलोचक राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा सैन्य पराक्रम को महत्व देने को लेकर काफी नाक-भौं सिकोड़ते हैं, पर वे नहीं समझते कि इससे लोगों के अंदर राष्ट्र को लेकर एक सामूहिक चेतना जागृत होती है। उनको अपना और अपने परिवार की परिधि से थोड़ा बाहर आकर देश के लिए सोचने और काम करने की प्रेरणा मिलती है। यह प्रवृत्ति देश में लगभग खत्म हो गई थी। दूसरे, यह राष्ट्रवाद ही है जो सरकार को भी सामान्य जन के उत्थान के लिए काम करने को प्रेरित करती है। भाजपा के संकल्प में और प्रधानमंत्री की उसकी संकल्पना में स्वतंत्रता के 75 वें वर्ष यानी 2022 तक के लिए 75 लक्ष्य घोषित किए गए हैं। मोदी ने स्वयं कहा कि हमारा मूल्यांकन आप इस आधार पर अवश्य करिएगा कि हमने 2022 तक बनाए गए अपने लक्ष्यों को पूरा किया या नहीं।
इस समय मोदी सरकार के समक्ष चुनौतियों की खूब चर्चा हो रही है। सच तो यह है कि मोदी ने 75 लक्ष्य निर्धारित कर और लोगों की आकांक्षाओं का आकाश तक पहुंचाकर स्वयं अपने लिए चुनौतियां खड़ी की हैं। इसमें विस्तार से नहीं जा सकते, लेकिन कुछ बिन्दुओं को उदाहरण के तौर पर देखिए- किसानों की आय दोगुना करना, 60 वर्ष की आयु के सभी लोगों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे मेंं लाना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वर्षो से रुकी सभी परियोजनाओं को पूरा करना, प्रत्येक परिवार को पक्का मकान, सभी ग्रामीण परिवारों को एलपीजी गैस, सभी घरों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण, प्रत्येक घर तक शौचालय का लक्ष्य पूरा करना, सभी घरों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना, 115 गिगावाट नवीकरणीय उर्जा क्षमता तक पहुंचना, आयुष्मान भारत के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं वेलनेस केन्द्रों का व्यापक विस्तार व गरीबों को दरवाजे पर ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुनिश्चित करना, प्रशिक्षित डॉक्टर और जनसंख्या के बीच का अनुपात 1:14 कर देना,प्रत्येक व्यक्ति को पांच किलोमीठर के अंदर बैंक उपलब्ध कराना,. सम्पूर्ण डिजिटलीकरण ......। ध्यान रखिए, सरकार ने अगले पांच वर्षो में कृषि क्षेत्र में 25 लाख करोड़ रुपया तथा बुनियादी ढांचे में एक लाख करोड़ रुपया का निवेश करने की घोषणा की है। इन सारे लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में काम होगा तो उसका सबसे ज्यादा लाभ समाज के किस समूह को मिलेगा? यह सच है कि अगर पेट में दाना नहीं हो, सिर ढंकने के लिए छत नहीं हो तो राष्ट्रवाद समझ में नहीं आता। लेकिन पेट भरने और सिर ढंकने यानी आवास प्रदान करने को राष्ट्रवाद से जोड़ दिया जाए तो इससे पूरे समाज का संस्कार बदल जाता है। 2022 में आजादी के 75 वें वर्ष को यदि सरकार ने अपने लिए प्रेरणा बनाया है तो यह देश के एक-एक व्यक्ति के लिए भी है। अगर आपको शांतिपूर्ण और स्थिर विकास चाहिए तो फिर सुरक्षा उसकी अनिवार्य शर्त है और सुरक्षा सैन्य पराक्रम से ही सुनिश्चित हो सकती है। मोदी की दूसरी सरकार इसी दिशा में आगे बढ़ी है। नए मंत्रिमंडल में पुराने 30 मंत्रियों को जगह नहीं मिलना तथा 22 नए चेहरे को शामिल करने का अर्थ ही है कि 2022 तथा 2024 तक के लिए निर्धारित लक्ष्यों के लिए अहर्निश काम करने वाले समर्पित, योग्य और सक्षम लोगों की टीम चाहिए। इन सबका मूल्यांकन तो आगे ही हो पाएगा। जो अपेक्षानुरूप काम नहीं करेंगे उनको जाना पड़ेगा। नरेन्द्र मोदी ने धीरे-धीरे यह भी भान कराया है कि रोजगार के लिए केवल सरकारी नौकरियों की ओर बार-बार न देखें, स्वयं को छोटे-बड़े उद्यमी बनाएं। इसका असर है और नई सरकार में इसका विस्तार हम देखेंगे। मुद्रा योजना से बैंकों का आंकड़ा है कि 16 करोड़ से ज्यादा लोगों ने कर्ज लिया। मान लीजिए बैंक आधा आंकड़ा भी झूठा दे रहे हों तो आठ करोड़ लोगों को 10 हजार से 10 लाख तक का कर्ज मिला। यह नीति आगे भी जारी रहेगी। दूसरा भाव मोदी पिछली सरकार से ही पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं और इस सरकार में जारी है, वह है स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरणा लेकर हर व्यक्ति जो भी काम करे वह यह सोचते हुए करे कि देश के लिए कर रहा है। काम को जनांदोलन। इसीलिए 2022 तथा 2047 की चर्चा वे करते हैं। इस प्रकार के राष्ट्रवाद में कहां की संकीर्णता और फासीवाद है?
देश का वातावरण पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक बदला हुआ प्रतीत होता है। मोदी के कारण ऐसा राष्ट्रवाद पैदा हुआ है जिसके साथ सामाजिक विकास और लोगों की अपेक्षायें जुड़ी हुईं हैं। एक उदाहरण लीजिए। एक राष्ट्रीय टीवी चैनल का जनता के बीच खुली जगह पर प्रतिदिन कार्यक्रम होता है। उसमें एक दैनिक मजदूर अपनी बात रखने के लिए मजदूरी छोड़कर आया। उससे एंकर ने जब पूछा कि क्या करते हो तो उसने जवाब दिया, मजदूरी। तो फिर मजदूरी छोड़कर यहां बोलने क्यों आ गए? उसने कहा कि देश को बताने। क्या बताने? उसका उत्तर था कि हमने मोदी जी को राष्ट्रवाद पर वोट दिया है। एंकर ने पूछा राष्ट्रवाद से जीवन चल जाएगा? उसका जवाब सुनिए, ' मोदी जी ने हमको घर बना दिया, शौचालय दे दिया, गैस सिलेंडर दे दिया, बिजली लगवा दिया... और क्या चाहिए। फिर उससे पूछा गया कि बीमार पडऩे पर जो खर्च होता है उसके लिए अस्पताल कहां है? उसने कहा, 'पांच लाख का कार्ड मिला है न। उसके बाद उसने जो कहा वह कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण था। उसने कहा कि अब हम मोदी जी से यही कहेंगे कि बच्चों की पढ़ाई की अच्छी व्यवस्था कर दें और फिर बढिय़ा रोजगार दिला दें। पूछा गया कि क्या तुमको विश्वास है कि मोदी जी ऐसा कर देंगे? उसने कहा कि मोदीजी हैं तो जरुर करेंगे। मनुष्य का स्वभाव है कि जैसे-जैसे उसकी न्यूनतम आवश्यकता की पूर्ति होती जाती है उसकी आकांक्षायें-अपेक्षायें बढ़ती जातीं हैं।
नरेन्द्र मोदी के आप विरोधी हों या समर्थक उन्होंने अगर राष्ट्रवाद और सैन्य पराक्रम के संयोग से पूरे देश की चेतना जागृत की है तो समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की आकांक्षायें और अपेक्षायें भी बढ़ाईं हैं। साथ ही अपने प्रति विश्वास पैदा किया है कि वो आकांक्षाओं को पूरा करेंगे। कोई इसकी आलोचना कर सकता है कि इतनी अपेक्षायें बढ़ा देंगे जिसकी पूर्ति ही नहीं होगी। किंतु बिना आकांक्षाओं और अपेक्षाओं के कोई देश प्रगति के उच्च सोपान तक पहुंच नहीं सकता। ऐसी आकांक्षाओं और अपेक्षाओं से भरा हुआ यह नया भारत है। दूसरे नेतागण इतनी आकांक्षा और अपेक्षा इसलिए जागृत नहीं कर पाए कि उन्होंने इस तरह विचार करके न काम किया न जनता को संबोधित ही। राजनीति करने वालों के लिए भारत के इस नए चरित्र को समझना होगा अन्यथा वो धीरे-धीरे कालबाह्य हो जाएंगे।