मजलिस से पाकिस्तान पर निशाना
   Date10-Jun-2019
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यका
ल की विदेश यात्रा पड़ोसी मालदीप से प्रारंभ की। वहां का सर्वोच्च सम्मान रूल ऑफ निशान इज्जुद्दीन प्रधानमंत्री को प्रदान किया गया। मालदीप की संसद मजलिस को संबोधित करते हुए उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि सरकार द्वारा प्रायोजित आतंकवाद दुनिया का सबसे बड़ा खतरा है। आतंकवादियों की न कोई हथियार बनाने की फेक्ट्री है और न उनका कोई बैंक है, फिर भी आतंकियों के पास आधुनिक हथियार और पैसा है। कुछ देश अच्छे बुरे आतंकवाद को परिभाषित करने में उलझकर समय बर्बाद कर रहे हैं। आतंकवाद का मानवतावादी देशों को मिलकर मुकाबला करना होगा। इसके लिए अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन की आवश्यकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब सिर पर से पानी निकल रहा है। मालदीप एक मुस्लिम देश होने के बाद भी वहां की मजलिस से पाकिस्तान पर निशाना साधा। हथियार और पैसा आतंकियों को पाकिस्तान उपलब्ध कराता है। भारत की कूटनीतिक सफलता की विशेषता यह है कि मुस्लिम देश भी आतंकवाद के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। एक के अलावा सभी मुस्लिम देश भारत की नीति के समर्थन में है। इस प्रकार पाकिस्तान को कूटनीतिक दृष्टि से घेरने में भारत सफल रहा है। सबका साथ-सबका विकास के साथ सबका विश्वास प्राप्त करने की दृष्टि से प्रधानमंत्री के पहले विदेश दौरे का महत्व है। अन्य देशों का विश्वास प्राप्त करके ही भारत का कद दुनिया में सबसे ऊंचा दिखाई देगा। अभी तक महाशक्ति बनने में भारत ने बहुत कुछ सफलता प्राप्त की है, लेकिन अब ऐसी स्थिति निर्मित हो रही है कि भारत दुनिया का नेतृत्व करने में सफल होगा। अभी तक हम दुनिया को पिछलग्गू देशों की कतार में खड़े नजर आते थे। अब सर्वश्रेष्ठ बनने की स्पर्धा में भारत खड़ा है। अंतरिक्ष में महाशक्ति बन गया है। अब अंतरिक्ष में युद्ध का अभ्यास भारत करेगा। मिसाइलों में भी भारत की सबसे अधिक और दूर तक मारक क्षमता भारत की है। ब्रम्होस और अग्नि मिसाइलों का न केवल भारत के पास भंडार है, लेकिन मिसाइल निर्माण की क्षमता भी विकसित की है। भारतीय सेना को भी आधुनिक हथियार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वायु सेना की कमियों को भी पूरे किए जा रहे हैं। राफेल विमान एक दो माह में उपलब्ध होंगे। इस प्रकार भारत में ही आधुनिक हथियार बनने लगे हैं। भारत महाशक्ति बनकर दुनिया के सामने विराट स्वरूप का आभास करने की स्थिति में पहुंच रहा है। भारत ने समृद्ध और शक्तिशाली बनकर दुनिया में विशेष स्थान प्राप्त किया है। अभी तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा कहा जा रहा था कि हम आँख न नीची करके और न ऊंची करके बल्कि बराबरी से आँख मिलाकर बात करने की स्थिति में है, लेकिन अब नया भारत ऐसी भौतिक एवं आध्यात्मिक शक्ति अर्जित करेगा, जिससे दुनिया के देश भारत माता की वंदना, याचना करते दिखाई देंगे।
दृष्टिकोण
सबके विश्वास के साथ बढ़ते कदम
भारत की संघात्मक व्यवस्था में केन्द्र और राज्य सरकार के अधिकार संविधान में है, लेकिन जब मिलावटी सरकार केन्द्र में रही तो आपसी खींचतान से राजनीतिक अस्थिरता के कारण हमारी सुरक्षा और देश का मान सम्मान भी प्रभावित हुआ। भारतीय राजनीति के उथल-पुथल का घटनाक्रम इतिहास में दर्ज है। 1969 में कांग्रेस का विभाजन हुआ, 1979 में चरणसिंह की सरकार बनी और कुछ समय में ही उसका पतन हो गया। 1999 में कांग्रेस ने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार को गिराकर देश को मध्यावधि चुनाव की ओर धकेला। 1980 के अंत में दो अल्प मत सरकारें 18 महीने में ही गिर गई। राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार भी लंबे समय तक नहीं चल सकी, एक वर्ष में ही वीपी सिंह सरकार का पतन हो गया। इस संदर्भ का उल्लेख करना इसलिए आवश्यक है कि गठबंधन सरकार का नाम चाहे जनता पार्टी की सरकार हो या राष्ट्रीय मोर्चा की या किसी की वैसाखी पर टिकी सरकार हो, उनके बनते ही खींचतान से अस्थिरता का दौर प्रारंभ हुआ और बीच में ही उनकी अकाल मौत हो गई। नरसिम्हा राव सरकार भी अल्पमत सरकार थी और मनमोहन सिंह की रिमोट कंट्रोल से चलने वाली सरकार हो, ये सरकारें भी जनइच्छा के अनुकूल परिणाम नहीं दे सकी। अल्प मत या गठबंधन सरकारें अस्थिरता के दौर से गुजरी। वही जातिवाद, वही वंशवाद और वही तुष्टिकरण की नीति से चलने वाली सरकारें करीब पांच दशक तक चलती रही। इससे देश और जनता को परेशानी और संकटों का सामना करना पड़ा। पहली बार 2014 में स्पष्ट बहुमत की गैर कांग्रेसी सरकार बनी और लोकप्रिय नेतृत्व भी मिला।