बच्चें के स्वर्णिम भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगाता स्मार्ट फोन
   Date01-Jun-2019
धर्मधारा
(गतांक से आगे)
गु रुग्राम में एक नन्हें बालक की हत्या टायलेट में कर दी गई। आए दिन अबोध बालक-बालिकाएँ, जिनमें कुछ तो एक-दो वर्ष की थी के साथ गलत कार्य किया गया। ये घटनाएँ सभ्य समाज को शर्मसार करने के लिए पर्याप्त है। हमारी गरिमामय संस्कृति कलंकित हो रही है। हमारे समाज के प्रबुद्धवर्ग आगे आएं और इस नई स्मार्ट फोन पीढ़ी को पतन की और जाने से बचाएँ। माता-पिता को अपने लाड़ले-लाड़लियों के स्मार्ट फोन-ज्ञान पर गौरवान्वित नहीं होना चाहिए। उनका यह ज्ञान उन्हें पतन की ओर धकेल सकता है। हायस्कूल तथा इससे बड़ी कक्षाओं में स्मार्ट फोन विद्यार्थियों के लिए अध्ययन में सहायक हो सकता है किंतु माध्यमिक स्तर तक के बच्चे मिट्टी के कच्चे घड़े के समान होते हैं। उन्हें तो इस डिवाइस से दूर ही रखना चाहिए। स्मार्ट फोन पर समय व्यतीत करने के बजाय यदि वे खेल के मैदान में शारीरिक खेल खेलेंगे तो वे तंदुरुस्त रहेंगे। उनका मानसिक व शारीरिक विकास भी होगा। खेल भावना का विकास होने से वे सक्षमतापूर्वक किसी समस्या का समाधान कर पायेंगे। तैराकी, संगीत, मलखंभ, कबड्डी, फुटबाल, क्रिकेट आदि खेलों की ओर पर्याप्त रुझान होने पर बालक स्वयं ही मोबाइल से दूरी बनाए रखेगा तथा उसका सीमित उपयोग करेगा। योग कक्षाओं में जाना, वहाँ योग सीखने से उनका शारीरिक तथा मानसिक विकास होगा। वे स्वस्थ रहेंगे। आने वाली पीढ़ी को भी अच्छा संदेश देंगे। भारत ही नहीं अपितु विदेशों में भी वहाँ के निवासी योग शिक्षा से प्रभावित हो रहे हैं। वे उत्तम स्वास्थ्य के लिए इसे उचित मानते हैं। स्मार्ट फोन ने बालकों की दिनचर्या को बिगाड़ दिया है। देर रात तक मोबाइल पर आँखे गड़ाए सीरियल, कार्टून तथा फिल्म देखते रहना फिर प्रात: देर से सोना, जिससे उनकी पाचन क्रिया प्रभावित होती है। अँाखों पर मोटा चश्मा लग जाता है। सपूर्ण शारीरिक क्रियाएँ अस्त-व्यस्त हो जाती हैं। देर रात तक जागरण करने के कारण कई बालक-बालिकाएं विद्यालयों में डेस्क पर सिर रखकर सोते हुए देखे जा सकते हैं। यदि यही बच्चे प्रात: जल्दी उठे, सैर पर जावे, दौड़ें, स्नान करें तो जीवन में सफलता मिलती जावेगी। (समाप्त)