जन विश्वास की मोदी सरकार
   Date01-Jun-2019
30 मई को राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक समारोह में प्रधा
नमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ 57 मंत्रियों ने शपथ ली। मध्यप्रदेश से दो केबिनेट एक स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री और एक को राज्यमंत्री बनाया गया है। नरेन्द्र सिंह तोमर जो दो बार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे, इसलिए वे सम्पूर्ण म.प्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। थावरचंद गेहलोत चाहे दलित वर्ग से हों, लेकिन वे मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे, केन्द्रीय संसदीय बोर्ड के सदस्य हंै और म.प्र. के मालवा-निमाड़ में संगठन में भी उनकी पकड़ है। इसी प्रकार प्रहलाद पटेल चाहे पिछड़े वर्ग के हैं। अटलजी की सरकार में भी आप पांच बार सांसद रह चुके हैं। मजदूर संगठन में भी आप सक्रिय रहे, वे काफी मिलनसार हंै। राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार का दायित्व उनके अनुकूल है। इसी प्रकार फग्गनसिंह कुलस्ते अनुसूचित जनजाति वर्ग के है। छठी बार मंडला से सांसद चुने गए है, उन्हें राज्यमंत्री नियुक्त किया गया है। मोदी की टीम में 36 को फिर अवसर मिला है, जबकि 21 नए चेहरे है। सहयोगी दलों को एक-एक बर्थ दी गई है। हालांकि जदयू का कोई मंत्री नहीं बना है। उल्लेखनीय है कि जदयू ने तीन मंत्री बनाए जाने की मांग की थी। जदयू प्रमुख और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कहना है कि वे सांकेतिक भागीदारी करना नहीं चाहते। हम एनडीए में बने रहेंगे। मंत्रियों की सूची में मेनका गांधी का नाम नदारत था, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उन्हें लोकसभा अध्यक्ष का पद दिया जा सकता है। इस पद पर पूर्व में श्रीमती सुमित्रा महाजन रहीं। मोदी मंत्रिमंडल में चार प्रभावी चेहरे हैं, राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी और निर्मला सीतारमण। राजनाथ सिंह के पास गृह मंत्री, नितिन गडकरी के पास सड़क परिवहन और गंगा सफाई का दायित्व था, जबकि निर्मला सीतारमण ने सुरक्षा मंत्री का पद कुशलता से संभाला है। इसी तरह स्मृति ईरानी भी केबिनेट मंत्री बनी है, उन्होंने अमेठी से राहुल गांधी को परास्त कर इतिहास रचा है। इन चेहरों को महत्व के विभाग दिए जा सकते हैं। जिस तरह गांधी नगर में नरेन्द्र मोदी की माताजी हीरा बेन ने जैसे ही अपने बेटे को शपथ लेते टीवी पर देखा तो खुशी से ताली बजाने लगीं। वृद्ध मां के आशीर्वाद से ही नरेन्द्र मोदी इतने उच्च मुकाम पर पहुंचे हैं। इसी तरह शपथ विधि के दिन पूरे देश में जश्न का माहौल रहा। भाजपा कार्यालयों में आतिशबाजी हुई, विदेश में बसे भारतवंशियों ने भी जश्न मनाया। मोदी के कथन के अनुसार 2019 का चुनाव न भाजपा ने लड़ा, न मोदी ने लड़ा, यह चुनाव जनता ने लड़ा है। यही कारण है कि जहां भाजपा को जीतने में भी संदेह था, वहां लाखों वोटों से भाजपा प्रत्याशी जीता, पूरे देश में चाहे मोदी लहर कहें, या जनता लहर कहें, लेकिन यह सच्चाई है कि भाजपा के आगे जनता दिखाई दी।
दृष्टिकोण
सख्त निर्णय लेना होंगे
भाजपा ने अपने संकल्प पत्र भारत के चहुँमुखी विकास का रोडमेप प्रस्तुत किया है। जनसंघ के समय से सैद्धांतिक सवाल पर चर्चा होती रही है। सबके लिए समान कानून, राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण और जम्मू-कश्मीर की भारत से अलग पहचान बताने वाली अस्थाई धारा 370 की समाप्ति। इस बारे में उल्लेख करना होगा कि 370 को खत्म करने और एक देश में दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेंगे कि मांग को लेकर डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में प्रखर आंदोलन हुआ, इसी के लिए डॉ. मुखर्जी ने अपना जीवन समर्पित कर दिया। राष्ट्रवादी विचारों का पहला प्रखर आंदोलन था। 67 वर्ष पहले भी जनसंघ राष्ट्रवादी सिद्धांतों पर आधारित था और आज चाहे स्थिति बदल गई हो, मुद्दों की भी प्रासंगिकता में भी बदलाव आया है, लेकिन मूल भाव और विचार वही है। चाहे चुनाव परिणाम की समीक्षा किसी भी दृष्टि से की जाए, लेकिन सच्चाई यह है कि भारत माता की जय के साथ जय श्रीराम के नारे भी लगते है। जय श्रीराम के नारे से प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बेनर्जी परेशान है, सबका साथ-सबका विकास के साथ सबके विश्वास की जो बातें कहीं है, लेकिन जमीनी सच्चाई है कि जय श्रीराम जिस जनता की धड़कन में बसा हुआ है, श्रीराम की संस्कृति, संस्कार ही राष्ट्रवादी जनता की आत्मा है। इस जनता ने ही भाजपा को भारी भरकम बहुमत से सरकार चलाने का अवसर दिया है। इसलिए सबके विश्वास के चक्कर में श्रीराम की भावना के अनुकूल निर्णय नहीं हुआ तो यही जनता सबक भी सिखा सकती है। राम जन्मभूमि पर मंदिर बनाने के त्वरित निर्णय की मोदी सरकार से अपेक्षा है। कईं लोग तो यह भी कहते हैं कि सरकार से हमें केवल राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर चाहिए। इसी तरह समान कानून और धारा 370, 35ए के खात्मे का निर्णय भी राष्ट्र की अखंडता के लिए जरूरी है।