राष्ट्र को महाव्याधि से बचाए रखने की विधि मतदान
   Date09-May-2019
डॉ.पं. लक्ष्मीनारायण 'सत्यार्थीÓ
1947 को मिली आजादी के बाद 1950 को लागू हमारा संविधान, विश्व में प्रजातंत्रीय भारत की पहचान, भारत देश उन शहीदों के सपनों को रंग भरता हुआ 72 वर्ष की यात्रा कर चुका है। काफी राजनीतिक उथल-पुथल के बाद एक दूर दृष्टा जांबाज, विश्व प्रजारंजन श्री नरेन्द्र मोदी जी को प्रधानमंत्री के आसन पर विराजने का मौका मिला। इसके पूर्व प्रधानमंत्रियों ने अपने स्तर पर भारत की बागडोर संभाली। आशा से ज्यादा उम्मीदें भारतीय जन मोदीजी से जुड़ा बैठे थे। वही मोदीजी पूरी तरह राष्ट्रीय उत्थान हेतु 24 घंटे लगे रहे। उनकी कार्यप्रणाली को लेकर वे अंगूल्याक्षेप के घेरे में भी घिरे परंतु वे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते गए। उनके कार्यों की सूची को दर्शाना मेरा कार्य नहीं हर भारतवासी जानता है व पूर्व प्रधानमंत्रियों से तुलनात्मक विवेचना भी हर गली, चौराहे, मोहल्ले, गांव, नगर व प्रांत में हो रहा है हुआ है। फिर चुनावी शंखनाद हो गया। वर्तमान सूचना क्रांति व इलेक्ट्रानिक मीडिया भी इसमें अपनी भागीदारी निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। ऐसे में हम अपना मत किसे दे-दे या नहीं, नया फण्डा नोटा का भी हमारे समक्ष। तो वोट देने से पहले समसामयिक विचारों से आप रूबरू हो ले। शायद आपके मानस पटल पर कुछ चिंतन-चिंता उभरे और अपनी बुद्धि का प्रयोग कर चुनावी महायज्ञ में अपने मत की आहुति दे। परिणाम पाकर आपके मन को शांति मिले।
सर्वप्रथम निर्वाचन (चुनाव) की बेला हमारे लिए कर्तव्यपूर्ति का क्षण है। निर्वाचन (चुनाव) हमारे लिए वरदान हैं। यदि मतदाता शिक्षित हो तो, पर अशिक्षित और भटके मतदाताओं के देश में यह चुनाव अभिशाप है। चुनाव होंगे, होना है, वोट पड़ेंगे। चुनाव आयोग पूरी सूझबूझ ईमानदारी से इस चुनावी महायज्ञ को संपन्न करवाएंगे। कहीं कोई आसुरी वृत्ति विघ्न पैदा करती है तो उन पर जवाबी कार्यवाही भी होगी। लेकिन वोट पड़ेंगे, फिर जनता के प्रतिनिधि देश का शासन संभालेंगे। वर्तमान प्रधानमंत्री देश को जो कुछ बनाना चाहते है, उसकी रूपरेखा सब जानते हैं। अब तो यह निर्णय करने का अवसर है। मतदाताओं के बीच यह अवसर आ गया है कि हम भारत को क्या बनाना चाहते है? राम-कृष्ण, ऋषि मुनियों की परंपरा स्थापित रखनी है तो वोट की चोट से देशद्रोही तत्वों को समाप्त करने की पावन बेला आ गई है। यदि इस बार हमारे वोट की चोट नकारा सिद्ध हुई तो फिर हम पांच वर्ष के लिए नहीं 50 वर्ष पीछे चले जाएंगे। आजादी के 65 वर्ष बाद हमें स्वच्छ भारत का नारा मिला, जिसकी आवश्यकता नहीं थी। स्वच्छ भारत हो जाना था पर ऐसा नहीं हुआ। पूर्व मठाधीशों ने अपने स्तर पर या अन्यों के इशारों से भारत संभाला और आजादी के 72 वर्ष हे देशवासियों! मतदाताओं, चुनाव को एक पवित्र महायज्ञ समझो। यज्ञ वैश्रेष्ठ तम कर्म। इस यज्ञ में हम सब जला दो जो देश को जला रहा है। शहीदों के पावन बलिदानों का मोल चुकाने का अवसर आ गया है। हजारों गाय बिना मालिक के सड़कों-खेतों में आवारा घूम कर गौभक्त राष्ट्र का परिचय दे रही है, वही हजारों गायें प्रतिदिन कट भी रही है। देश में अराष्ट्रीय तत्व देशद्रोही बढ़ रहे है। अपने वोट की चोट से समाप्त करना है-व्याभिचार, गुण्डागर्दी व भ्रष्टाचार को। वोट ही वह अस्त्र है जो ठीक इस्तेमाल किया जाए तो सारी समस्याएं सुलझ जाएगी। भारत मां का फिर से नवल धवल श्रंृगार होगा। मतदाताओं! अपना वोट (मत) उस व्यक्ति को देना जो भारतमाता का भक्त है। जो भारत की परंपराओं का पुजारी है। यह परीक्षा है हम राष्ट्रवासियों की, हमारी देशभक्ति की। इस चुनावी महायज्ञ का प्रतिफल देखना है कि विजय देशप्रेमियों की होती है या देशभक्तों की। देशभक्त जहां से भी खड़ा हो उसका समर्थन पूरी शक्ति से करे। विजय माला उसके गले की शोभा बने। हमें यह करना है-करना होगा। देखे ध्यान से-समझे, कोरे वादे, छलावे में आकर अपने मत की आहुति व्यर्थ न गंवाए। देखना होगा कि कौन भारतीयता की, भारत की रक्षा कर सकता है। आपका वोट उसी को मिलना चाहिए जो योग्य हो। चुनावी महायज्ञ का शुभारंभी बिगुल बज गया है। धर्म और अधर्म में, सत्य और असत्य में, ज्ञान और अज्ञान में ठन गई है। वोट की आहुतिरूपी अ से सत्य-असत्य के निर्णय का समय आ गया है। एक और है कम्युनिज्म का पुजारी चीन, दोगला पाकिस्तान, आतंकवाद, नक्सली, भ्रष्टाचार में डूबे कुछ सत्ताधारी मठाधीश और समस्त देशद्रोही तत्व। पिछले वर्षों का कुशासन हमारे सामने है, उसके परिणाम भी राष्ट्र के समक्ष है। जो इन तत्व के साक्षी है। वे एक जाजम पर आ चुके है। वाणी दोष उनमें कूट-कूट कर भरा है। आक्षेप व लांछन के कई पिटारे उनके पास है। उसके अंदर झूठ व बिना प्रमाण के आकर्षक खिलौने भी होंगे। कर्णप्रिय मधुर ध्वनि भी मन को आहत करेगी। एक ओर ऐसा व्यक्तित्व जिसे संपूर्ण विश्व एक मसीहा के रूप में, युग पुरुष के रूप में देख रहा है, उनके स्वागत हेतु आतुर है। विश्व पटल पर एक शक्ति स्वरूप में वंदनीय है। उस महामना को हमारे राष्ट्र के राजनीतिज्ञ विभिन्न पार्टियों के मठाधीश महागठबंधन के ब्रह्मास्त्र से परास्त करने पर तुले है। अब निर्णय की बारी मतदाताओं की, वोटरों की। किसे चुनने और इन्हें मिटाने के लिए वोट का अस्त्र संभालने का समय आ गया है। यह निर्णायक बेला है। जितने भी चरणों में चुनावी महायज्ञ चले देशवासी ईमानदारी से वोट की आहुति दे। कारण भारत में धर्म राज्य रहे या अधर्म राज्य निर्णय जनता के हाथों में, उन्हें करना है। सोचे-समझे, लच्छेदार नारों से बचे, ध्यान से देखो कि कौन भारत माता का पुजारी है? कौन भारत माता का शत्रु है? अपना वोट योगीराज श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र है, अर्जुन का गांडीव है। शत्रु के संहार के लिए अपने वोट का अस्त्र संभालो। भारत भूमि पर पाप पनपने न पाए। रावण राज्य यहां हो न पाए, इसलिए अपने वोट को संभाल कर प्रयोग करें। सही प्रयोग कर भारत माता की रक्षा करे। याद रखो इस बार बहके तो कुछ नहीं बचेगा, कुछ नहीं रहेगा। यह निर्णायक घड़ी है। मोह त्यागों और अपने कर्तव्यों को पहचानों। लालीपाप के चक्कर में, हे मतदाताओं! बहक मत जाना, मनसा-वाचा-कर्मणा द्वारा परम पुनिता भारत माता की महिमा और गरिमा को अक्षुण्ण रखना है। इस संकल्प के साथ अपने मत (वोट) की आहुति आपको देना है। चुनावी महायज्ञ एक महत्वपूर्ण आधिष्ठान है। आज देश के राजनीतिक मंच पर जो परिदृश्य उपस्थित है, उसमें अनेक मन उद्विग्न है। राजनीति में आज राजनीतिज्ञों की महत्वाकांक्षा से प्रेरित प्रयास जिस प्रकार का वातावरण निर्मित कर रहे है, जिस प्रकृति का सृजन कर रहे है उसे राक्षसी प्रवृत्ति की संज्ञा प्रदान की जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं। कारण उनकी प्रवृत्ति का प्रेरणा बिंदु व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति ही है। इस भारत भू-धरा, आर्यावृत को इसकी पावन संस्कृति और चिंतन ने राजनीति के उद्देश्य के रूप में त्याग की प्रतिष्ठापना की थी। भारत का गौरवशाली इतिहास इस सत्य को आज भी अतीत के किसी भी अध्येता के समक्ष स्पष्ट कर देता है। सिंहासन के मोह का परित्याग पितृ आज्ञा को शिरोधार्य कर वक्कल वस्त्र धारण कर श्रीराम ने अपनी संस्कृति के प्रेरकों से जो संग्राम किया था वह वाल्मिक रामायण की कथा वस्तु बना था। पूरा परिवार ही नहीं अयोध्या सहित संपूर्ण राज्य उसका साक्षी व सहयोगी रहा। इस भारत भू-धरा की मनीषा ने उस महान राजनीतिज्ञ की वंदना मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में की थी और उसे उत्तर से दक्षिण तक समग्र देश को एकता और अखंडता के सूत्र में पिरोने वाला महान जननायक माना, जो आज भी करोड़ों भारतवासियों के ह्रदय में श्रद्धा व आस्था के साथ प्राणों में समाहित है। वह जननायक श्रीराम है। आज भी राम राज्य की कल्पना यहां के जन कर रहे है। 19 लाख वर्षों के बाद भी श्रीराम व उनकी राज्य व्यवस्था आज भी ऊपर है। इसी प्रकार भारत में जो श्रीकृष्ण दिशा प्रदाता और नायक के रूप में उभरे उनका सारा जीवन भोग में नहीं अपितु त्याग की ही प्रेरक गाथा रहा है।