सजगता
   Date25-May-2019
प्रेरणादीप
म गध सम्राट महानंद का महामंत्री शकटार अत्यन्त ईमानदार और स्वामीभक्त था। आचार्य चाणक्य ने अपने नीति कौशल से नन्द साम्राज्य की जगह मौर्य साम्राज्य स्थापित कर दिया और शकटार जैसे कुशल व स्वामी भक्त मंत्री को चंद्रगुप्त के पक्ष में लाने के प्रयत्न शुरू कर दिए। शकटार अपने स्वामी को छोड़कर किसी अन्य का साथ देने को तैयार न था। अत: वह एक तहखाने में भूमिगत हो गया। एक विश्वासपात्र नौकर उसे भोजन पहुँचाता था। शेष को उनका अता-पता नहीं था। मौर्य साम्राज्य की सारी खुफिया पुलिस खोजकर थक गई, पर शकटार का पता नहीं चला। चाणक्य ने स्वयं बीड़ा उठाया। उसने सारे पुराने महलों, किलों और मंदिरों की तलाशी ली, पर शकटार का सुराग नहीं मिला। एक बार चाणक्य पुराने महलों की तलाशी के समय एक सूने महल को छानकर लौट रहे थे, तो उसे अचानक कुछ चींटियां अन्न के कुछ दाने लेकर ऊपर निकलते दिखाई दीं। उसे शक हो गया कि जमीन के नीचे अन्नकण निकलने का अर्थ है कि नीचे कोई तहखाना भी है। उसने उसकी तत्काल खोज और खुदाई करवाई। एक भीतरी तहखाना मिला। शकटार वहीं छिपा हुआ था। शकटार के साथ चाणक्य ने बहुत अच्छा बर्ताव कर अनेक उपायों से उसका हृदय जीत लिया। शकटार ने जब पूछा कि नीचे तहखाने का पता उसे कैसे चला! तो चाणक्य ने स्पष्ट किया कि चींटियां हमेशा जमीन से निकलतीं है, तो अवश्य समझ लेना चाहिए कि नीचे कोई खाद्यान्न जरूर ले जाया गया है। मैंने भी समझ लिया कि नीचे कोई अवश्य छिपा हुआ है। राजपुरुष और प्रशासक को अपनी आँखें हमेशा खुली रखना चाहिए।