गरीबों के लिए विचार करने वाली सरकार की वापसी हुई
   Date24-May-2019
वष्णु चौधरी
यह काशी और उत्तरप्रदेश सहित पूरे देश की जनता का प्रगाढ़ प्रेम और विश्वास है कि पांच वर्षों के पश्चात नरेन्द्र मोदी व अमित शाह के नेतृत्व मे राजग एक बार पुन: भारत की बागडोर संभाल रही है। यह बागडोर जनता ने यूं ही नहीं थमा दी। नरेंद्र मोदी के प्रति जनता का स्नेह दीवानेपन की हद तक है। अप्रैल अंत मे काशी में हुए रोड शो मे जनसैलाब के सारे रिकॉर्ड टूट गए। मोदी के नामांकन के पूर्व हुए इस मेगा रोड शो ने ही संदेश दे दिया था कि 23 मई के पश्चात वाराणसी ही नहीं अपितु उत्तरप्रदेश सहित पूरे देश मे भाजपानीत भगवा फहराएगा। यह नरेंद्र मोदी का ही जादुई करिश्मा है कि वे एक बार पुन: भारत के प्रधानमंत्री बन गए हैं।
मोदी, एक ऐसा धूमकेतु जिसने पूरे विश्व को चकाचौंध कर दिया, आज एक बार पुन: हिंदुस्तान का शासक बन गया है। विपक्षियों की इतनी गालियां खाने के बाद, उनकी राह में अनगिनत कांटे बिछाने और सारे विश्व में उनके खिलाफ जहर उगल कर उनके खिलाफ वातावरण बनाने की असफल कोशिश की गई, मगर वे नरेंद्र मोदी ही थे जो कड़ी आग में तपने के बाद चमकदार व सुगंधित कुंदन बन कर उभरे। एक ऐसा सुगंधित कुंदन जिसकी खुशबू पूरी काईनाथ में फैल रही है। पूरी दुनिया आज अवाक है कि हिंदुस्तान में यह कैसा युग परिवर्तन है। देश अंग्रेजों से भौतिक तौर पर 1947 मे आजाद हुआ था, मगर यह कहा जाए कि हिंदुस्तान बौद्धिक तौर पर 2014 में आजाद हुआ तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। 1947 से पहले अंग्रेज थे और उसके बाद अधिकतम समय हिंदुस्तान को अपनी जन्मजात विरासत समझने वाले और इस देश को कामधेनु गाय समझने वाले लोगों ने शासन किया। ये लोग किसी भी तरह से मोदी को सत्ता से हटाना चाहते थे, क्योंकि एक चौकीदार हिंदुस्तान की चौकीदारी करने आ गया था। कांग्रेस ने जनता का ध्यान भ्रमित करने के लिए राफेल घोटाले के रूप में एक नया और नकली मुद्दा उठाने की नाकाम कोशिश की। इस मुद्दे पर जनता का ध्यान भंग करने की कोशिश में तो कांग्रेस नाकाम रही किंतु उनके अपने ही साथी दल जरूर भ्रमित रहे कि इस मुद्दे पर कांग्रेस का साथ दिया जाए या नहीं। इस तथाकथित घोटाले को हकीकत रूप देने के लिए कांग्रेस इतनी नीचे गिर गई कि उनके अध्यक्ष तक को सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगनी पड़ी। विपक्षियों द्वारा झूठ बोलना, जनता को भ्रमित करना, मोदी के बारे में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जहर उगलना यानी साम-दाम-दंड-भेद, कोई भी साधन का इस्तेमाल कर मोदी की जमीन को कमजोर करने की कोशिश की गई। उनकी यही कोशिश रही कि किसी भी तरह से इस ईमानदार चौकीदार को उखाड़ फेंको और इस कोशिश में अपने ही देश के, देशभक्ति का लबादा ओढ़े हजारों तथाकथित राष्ट्रवादियों ने इनका साथ दिया। हमारे राज्य मध्यप्रदेश सहित उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल में अपनी जमीन तलाश रहे इन कौरवों ने मोदी को परेशान करने की भरपूर कोशिश की। राजनीतिक प्रबंधन के महारथी इन तत्वों की तो प्रशंसा करनी होगी, क्योंकि कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों की उम्र के बराबर तो इनका राजनीतिक पैंतरेबाजी का अनुभव था। अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए ये कौरव मोदी विरोधियों की ढाल बन गए। उन्होंने कभी अपने अंतरात्मा से नहीं पूछा कि हम अपनी राजनीतिक मतलब पूर्ति के लिए इस देश की अस्मिता 'हिंदुत्वÓ की आन बान शान को दांव पर क्यों लगा रहे हैं । हिंदुस्तान की आत्मा अर्थात 'हिंदुत्वÓ को कमजोर कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले इन स्वार्थी तत्वों ने हिंदुत्व को एक ऐसी स्थिति में ला दिया था जहां से उसका सबल होना अत्यंत मुश्किल लग रहा था। सरकार कोई भी हो उससे मुख्य रूप से दो ही अपेक्षाएं होती हैं। एक तो जनता, मुख्य रूप से मध्यमवर्गीय व गरीब तबके के लोगों की भलाई और दूसरी देश की बाह्य व आंतरिक सुरक्षा। आज हम यहां मोदी सरकार द्वारा किए गए लोक कल्याण के कार्यों का जिक्र प्रमुख रूप से करेंगे। जनता के कल्याण के लिए मोदी सरकार ने जो काम किए उसका सुफल यही है कि जनता ने एक बार पुन: भाजपा को केंद्र में मौका दिया। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना हो, प्रधानमंत्री आवास योजना या शौचालय बनवाने के लिए लोक कल्याण कार्य हो, सभी में मोदी सरकार जनता की कसौटी पर खरी उतरी है। इन सभी कार्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र शासित भाजपा सरकार के प्रति जनता में विश्वास जगा है। इन योजनाओं के अलावा पीएम किसान योजना और आयुष्मान भारत योजना है जिन्हें विपक्षी दलों के राज्य सरकार ने लागू करने में भी कोताही बरती। कुछ तो लापरवाही के कारण और कुछ भाजपा के प्रति विद्वेष के कारण। राज्य सरकारों में व्याप्त भ्रष्टाचार की वजह से भी केंद्र की जन कल्याण की योजनाएं जनता तक नहीं पहुंच पा रही हैंं। मुद्रा ऋण योजना से देश में सैकड़ों गरीबों ने अपना स्वयं का कारोबार शुरू किया है। इन कारोबारियों में छोटे-मोटे दुकानदार, टेक्सी संचालक, मछुआरे, मुर्गी, भेड़-बकरी पालक आदि है। इन्होंने ना केवल अपना स्वयं का रोजगार शुरु किया है, बल्कि कई और लोगों को रोजगार भी दे रखा है। मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता में आते ही इन सभी योजनाओं पर जमीनी अमल करना शुरू कर दिया था, जिसका असर अब साफ दिखने लगा है। मुद्रा ऋण योजना से जुड़े महाराष्ट्र की बैंक ऑफ इंडिया की एक शाखा के प्रबंधक के इस योजना से संबंधित काफी स्वस्थ विचार है। उनका मानना है कि गरीब आदमी कभी पैसा दबाना नहीं चाहता इसलिए देख परखकर यदि ऋण वितरित किया जाए तो वह डूब ही नहीं सकता। प्रधानमंत्री रिसर्च फैलोशिप के तहत सरकार ने देश के विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थाओं से जुड़े एक हजार छात्रों को पीएचडी करने का मौका दिया। छात्रों को आकर्षक पैकेज भी देने की सरकार ने योजना बनाई। पीएचडी पूरी करने के दौरान शोधकर्ताओं को अगले 5 वर्ष तक प्रतिवर्ष दो लाख रुपए दिए जाएंगे। देखा जाए तो पिछले 5 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो किया वह कोई बहुत बड़ा व कठिन कार्य नहीं था। उन्होंने वही किया जो एक जनसेवक को करना चाहिए था और पूर्ववर्ती सरकारों ने उस पर कभी ध्यान ही नहीं दिया। वरना पिछली सरकार भी यह सब कर सकती थी। याद कीजिए 2014 में राहुल गांधी ने भाजपा को परास्त करने के लिए एक बाण चलाया था और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से गैस सिलेंडर एक वर्ष में नौ के बजाय बारह करने की अपील की थी, मगर मोदी जी ने उस बाण को ही निस्तेज कर दिया। एक मई 2015 को उत्तरप्रदेश के बलिया से शुरू हुई उज्ज्वला योजना में सात करोड़ परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन देकर महिलाओं को धुएं से होने वाली बीमारियों से बचाया। आयुष्मान भारत योजना के बारे में भारत सरकार का दावा है कि यह योजना विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है। योजना के अंतर्गत देश के पचास करोड़ लोगों को हर साल पांच लाख रुपए तक की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना की इन खूबियों के कारण ही अमेरिका के प्रमुख थिंक टैंक सेंटर फार ग्लोबल डेवेलपमेंट ने इसकी प्रशंसा की है। संस्था ने कहा है कि आयुष्मान भारत युनिवर्सल हेल्थ कवरेज की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। यह योजना कितनी लोकप्रिय है, इस बात का अंदाजा इसी से लग सकता है कि बहुत कम समय में लाखों लोग इसका फायदा उठा चुके हैं। स्वच्छ भारत योजना के अंतर्गत देश में नौ करोड़ से अधिक घरों में शौचालयों का निर्माण कराया गया। सरकार ने इन सभी योजनाओं को ईमानदारी से लागू किया और जनमानस में यह संदेश गया कि यह सरकार सूट-बूट वाली सरकार नहीं है बल्कि गरीबों के लिए विचारने वाली सरकार है। प्रधानमंत्री के अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बह रही विकास की गंगा का उल्लेख न किया जाए तो यह आलेख अधूरा रह जाएगा। मोदी सरकार ने वाराणसी की पौराणिक धरोहर को सहेजने के प्रयास मे कोई कसर बाकी नहीं रखी। रंग-बिरंगी रोशनी से झिलमिलाती वाराणसी का अनुपम सौंदर्य बरबस भारतीयों और सैलानियों का ध्यान अपनी ओर खींचता है।
वाराणसी मे कई सड़कें और भौतिक संरचनाएं रिकॉर्ड समय मे पूरी हुई हैं।
मोदी सरकार का ही करिश्मा है कि आज आम जनता में जो कानून व्यवस्था का डर है वैसा आजादी के बाद पहले कभी नहीं था। अवैध काम करने वाले, सरकारी नियम तोडऩे वाले, भ्रष्टाचार करने वालों में आज कानून के डंडे का डर है। गलत काम काम करने से पहले वह दस बार सोचते हैं कि अभी मोदी जी का राज है। पिछले पांच वर्षों के दौरान हमें मोदी सरकार के सुशासन का असर भी देखने को मिल रहा है। आप कहीं भी सरकारी कार्यालय में चले जाएं। चाहे वह नगर निगम हो ,विद्युत मंडल हो, तहसील हो या पुलिस थाना ,प्रत्येक कर्मचारी और अफसर आपसे नम्रता से पेश आएगा। कार्यालयों में कार्य तंत्र सुधर गया है, लालफीताशाही भी कम हुई है और आम आदमी का काम तुलनात्मक रूप से अधिक आसानी से हो रहा है।