मशीनीकरण के साथ व्यक्तित्व निर्माण भी जरूरी
   Date22-May-2019
धर्मधारा
यु रोपियन संसद में विगत दिनों जमा की गई एक रिपोर्ट के अनुसार आटोमेशन क्षेत्र में एक त्वरित कानून बनाने की आवश्यकता है। यदि रोबोट द्वारा कोई अपराध घट जाए तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है? विगत दिनों एक ऑटोमेटिक कार द्वारा एक महिला की सड़क चलते मृत्यु हो गई-ऐसे में जिम्मेदारी किसकी होगी? कार में उपस्थित रोबोट या ऑटोपायलट की अथवा उस कंपनी की, जो उस रोबोट का निर्माण कर रही है। फिर एक समस्या यह भी है कि रोबोट या मशीन तो अंतत: वही कर रहे हैं, जैसी प्रोग्रामिंग उनमें डाली गई है। जैसा कि अभी विगत दिनों के सर्वेक्षण से पता चला कि ज्यादातर ए. आई. (आर्टीफिशियल इंटेलीजेन्स) रंगभेदी प्रवृत्ति विकसित करके बैठे हैं, क्योंकि प्रोग्राम करने वाले व्यक्तियों की भावनाएँ भी उनके भीतर सम्मिलित हो गई हैं। तकनीकी को पूरे समुदाय का प्रतिनिधि बनने के लिए, उसकी निर्माण एवं प्रयोग-व्यवस्था में अपेक्षित सुधार लाना भी जरूरी है।
इसके साथ ही एक चुनौती सुरक्षा की भी है। यदि कोई आतंकवादी संगठन किसी ऑटोमेटिक कार को या ऑटोमेटिक हवाई जहाज को हैंकिंग के द्वारा नियंत्रित कर ले और फिर उसका उपयोग किसी दुर्दांत घटना को अंजाम देने में कर दे तो क्या होगा? विगत दिनों एक मोबाइल हैकर ने इंग्लैंड में बैठे-बैठे कुछ ही मिनटों के भीतर गूगल द्वारा चलाई जा रही ऑटोमेटिक कार का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर यह सिद्ध कर दिया कि ऐसा कर पाना सहजता से संभव है। गलत हाथों में तकनीकी के चले जाने से घटने वाली भयंकर घटना के घटने की आशंका से कौन मना कर सकता है। इन समस्याओं का समाधान भारत की प्राच्य परंपराओं में है। भारत में यंत्रों के जागरण की व्यवस्था मंत्रों के माध्यम से थी। अर्थात् मात्र यंत्र किसी के पास होने मात्र से उसका उपयोग करने की छूट उसको नहीं मिल जाती थी। यंत्र को जब मंत्र से जाग्रत किया जाता था, तब ही वह प्रभावी हो पाता था और फिर मंत्र, मात्र परिष्कृत व्यक्तित्व के मुँह से निकलने पर ही अपना प्रभाव छोड़ते थे। आज हम यंत्रों का निर्माण तो करते दिख पड़ रहे हैं, पर उनको चलाने वाले हैं व्यक्तित्वों पर हमने मेहनत न के बराबर की है। यदि ऑटोमेशन के साथ-साथ, उन व्यक्तियों के चिंतन, चरित्र व व्यवहार, पर भी मेहनत की जाए जो व्यक्ति उनका नियंत्रण व संचालन करने वाले हैं तो निश्चित रूप से वैज्ञानिक क्षेत्र में जन्म लेता परिवर्तन का यह दौर एक सुखद भविष्य का सूत्रपात कर, सकता है। आज सभी को इसी दिशा में एक सार्थक प्रयास करने की आवश्यकता है।