कांग्रेस की गंदी राजनीति की उपज हिन्दू आतंकवाद
   Date22-May-2019
ाशीष कुमार 'अंशुÓ
'मे रे मित्र कहते थे कि मोदीजी हिन्दूवादी हैं। अब तो देखा जा रहा है कि विपक्ष के सारे नेता मंदिरों से अपना चुनाव प्रचार शुरू करते हैं और तो और इन सभी ने अपने को हिन्दू कहना शुरू कर दिया है।Ó एक खबरिया चैनल पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साक्षात्कार के दौरान यह सवाल एक दर्शक मुकेश लुथरा ने पूछा। इसके जवाब में नरेन्द्र मोदी ने कहा, 'इस बदलाव से भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। यह सीजनल कारोबार हैं। नामांकन भरने के बाद तिरंगे झंडे से वोट कम मिलते हैं, हरे झंडे से अधिक मिलते हैं तो वे रोड शो में हरा झंडा लगा लेंगे। इसलिए जो सीजनल कारोबार करते हैं, उनकी राजनीति चल जाती है, लेकिन न उससे देश चलता है और न ही जनता का विश्वास चलता है।Ó
मोदी तिरंगे की जगह हरे झंडे वाली बात का जिक्र जब कर रहे थे, उस वक्त उनका इशारा राहुल गांधी की तरफ था। जिन्होंने मुस्लिम बहुल केरल के वायनाड सीट पर अपने चुनाव प्रचार में हरे झंडे का इस्तेमाल किया। जिस प्रतीक को मुसलमान और मुस्लिम लीग दोनों ही पसंद करते हैं, लेकिन यह भारत के जागरूक नागरिकों की वजह से हुआ है कि सीजनल कारोबारियो का कारोबार मोदी राज में नहीं चल पा रहा। राहुल गांधी ने मुस्लिम बहुल वायनाड सीट पर मुसलमानों को लुभाने के लिए अपनी एक रैली में मुस्लिम लीग के हर झंडे का इस्तेमाल किया, लेकिन पाकिस्तान के राष्ट्रीय झंडे से मिलते जुलते इस झंडे के इस्तेमाल पर पूरे देश में प्रतिक्रिया हुई। उसके बाद कांग्रेस ने फौरन अपने सहयोगियों से वायनाड में गुहार लगाई कि कांग्रेस की रैलियों में हरे झंडे न लगाए जाएं। यह परिवर्तन 2014 के बाद कांग्रेस में आया है। वरना 2014 से पहले देशभर में कांग्रेस और उनकी सहयोगी पार्टियां मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति कर रहीं थीं। इस बात को शायर-गीतकार कामरेड जावेद अख्तर ने अपने एक साक्षात्कार में स्वीकार किया। उन्होंने कहा, 'मुसलमानों के कट्टर मौलाना-मुफ्तियों को भारत में गैर भारतीय जनता पार्टी नेताओं ने वैधता प्रदान की। जिसका लाभ भाजपा को 2014 के चुनाव में मिला। बीते पांच साल में मोदी सरकार की वजह से मुसलमान तुष्टिकरण कोई मुद्दा नहीं रहा।Ó दरअसल, यह मोदी प्रभाव ही था कि वायनाड चुनाव के लिए बनाए गए कांग्रेस-मुस्लिम लीग पोषित निजी 'वॉट्स एप समूहोंÓ पर इन झंडों के संबंध में चेतावनी जारी की गई। हरा झंडा न लगाने का निर्देश दिया गया। केरल में कांग्रेस की अगुआई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है।
वर्तमान में कांग्रेस 'भगवा आतंकवादÓ से मुंह छिपा रही है। राहुल गांधी से लेकर दिग्विजय सिंह तक हिन्दू आतंकवाद शब्द से इस तरह परहेज कर रहे हैं, जैसे वे पहली बार 2019 के चुनावों में ही इस शब्द से परिचित हो रहे हों, जबकि हकीकत यह है कि 'हिन्दू आतंकवादÓ शब्द का जब देश में कोई वजूद नहीं था, तब से कांग्रेस की गंदी राजनीति के गर्भ से यह जुमला निकला। इस शब्द का जिक्र विकिलीक्स द्वारा किए गए खुलासे में भी आता है। विकिलीक्स के अनुसार-पूर्व अमेरिकी राजदूत टिमोथी जे. रोएमर ने अपने विदेश मंत्रालय को एक पत्र लिखा था, जिसमें रोएमर ने राहुल गांधी द्वारा 'हिन्दू आतंकवादÓ शब्द के प्रयोग का उल्लेख किया था। रोएमर के हस्ताक्षर वाले टेलिग्राम में राहुल गांधी से बातचीत का जिक्र किया गया था। यह टेलिग्राम 3 अगस्त, 2009 को भेजा गया था। विकिलिक्स केबल के अनुसार 20 जुलाई, 2009 को रात के एक भोज में राहुल गांधी मौजूद थे। वहां पूर्व अमेरिकी राजदूत रोएमर ने राहुल से आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को लेकर एक सवाल पूछा था, जिसके जवाब में राहुल ने कहा, 'लश्कर का भारत में थोड़ा बहुत सपोर्ट हो सकता है। लेकिन, देश में बड़ा संकट हिंदू अतिवादियों से है।Ó
जो कांग्रेसी लीपापोती विकिलिक्स की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर राहुल गांधी के इस बयान की लीपापोती कर रहे थे उन्हें क्या पता था कि उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष के दिल की बात फिर बाहर आ जाएगी। जिस पर वे कोई स्पष्टीकरण नहीं दे पाएंगे। राहुल गांधी ने संपादकों से बातचीत करते हुए साफ शब्दों में कहा, 'मैं हिंदुत्व के किसी भी प्रकार में विश्वास नहीं रखता, चाहे वह नरम हिंदुत्व हो या कट्टर हिंदुत्व।Ó राहुल गांधी को 2019 के चुनावी सीजन में 'सीजनल कारोबार के साथ जनता के बीच आना पड़ा, जिसमें न सिर्फ उन्हें खुद को हिन्दू बताना पड़ा, बल्कि अपना गोत्र और कोट के ऊपर पहने हुए जनेऊ की तस्वीरों को सार्वजनिक करना पड़ा। अब पूरा देश जानता है कि राहुल गांधी कश्मीर के कौल ब्राह्मण हैं और उनका गोत्र दत्तात्रेय है। सवाल फिर भी उठ रहे हैं कि ये कैसे 'कश्मीरी पंडितÓ हैं, जो दशकों से कश्मीर से बेदखल हुए पंडितों को वापस कश्मीर में अपनी खोई हुई जमीन नहीं दिलवा पाए? गोत्र के संबंध में आचार्य अनल देव कहते हैं कि लड़के का गोत्र पिता की तरफ से तय होता है। राहुल गांधी के दादा फिरोज जहांगीर गांधी का परिवार मुस्लिम था। बताया जाता है कि फिरोज की मां रतिमाई पारसी थीं और पिता जहांगीर फरेदून घांडी मुस्लिम। तो राहुल का दत्तात्रेय गोत्र फिर कहां से आया, यह गुरुकुल कांगड़ी के छात्रों के लिए शोध का विषय हो सकता है। राहुल गांधी से प्रेरणा पाकर 'हिन्दू आतंकवादÓ जैसी गप्प को झूठे दस्तावेजों के आधार पर सच साबित करने के कांग्रेसी योजनाकार दिग्विजय सिंह अपने चुनाव प्रचार में अब हिन्दू दर्शन की बात करने लगे हैं। मध्यप्रदेश के लोग ऐसा मानते हैं कि पत्नी अमृता के साथ उन्होंने नर्मदा यात्रा पूरी श्रद्धा के साथ पूरी की। लेकिन 'हिन्दू आतंकवादÓ शब्द को स्थापित करने का प्रयास करने वाले कांग्रेसियों में से एक दिग्विजय सिंह आज तक नहीं बता पाए कि किस हैसियत से एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे उन्हें कथित हिन्दू आतंकवाद पर रिपोर्ट करते थे।
कांग्रेस में ऐसे उदाहरण भरे पड़े हैं। भिंड-दतिया लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी देवाशीष जरारिया इन दिनों चुनाव में जीत के लिए मंदिर-मंदिर चक्कर काट रहे हैं। ये वही देवाशीष हैं जो कांग्रेस उम्मीदवार बनने से पहले तक हिन्दू दर्शन से नफरत करते थे।