राष्ट्रभक्ति
   Date16-May-2019
प्रेरणादीप
सु भद्राकुमारी चौहान प्रयाग के एक राजपूत घराने में जन्मीं। पढ़ती भी रहीं, पर उस समय के प्रचलन के अनुसार उनका विवाह खंडवा के लक्ष्मण सिंह नामक युवक से हो गया। सुभद्राकुमारी आरंभ से ही विद्याप्रेमी थीं। विवाह के बाद पति से आगे पढऩे की प्रार्थना की तो उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर ली। उन्हें कॉलेज में भर्ती करा दिया गया। इस बीच पति ने भी वकालत पास कर ली। अब आगे क्या करना है? इस पर दोनों ने विचार कर निश्चय किया कि देशसेवा करेंगे। उन्हीं दिनों कांग्रेस आंदोलन चल पड़ा। पति-पत्नी दोनों झंडा सत्याग्रह में सम्मिलित हुए और जेल गए। उनके पति ने खंडवा के 'कर्मवीरÓ साप्ताहिक में सहायक संपादक का काम कर लिया। माखनलाल चतुर्वेदी उसके संचालक थे। दोनों में से एक संपादक का कार्य करके घर चलाता और दूसरा जेल चला जाता। यह क्रम कई वर्षों तक चलता रहा। इस बीच सुभद्राकुमारी की प्रतिभा भी विकसित हुई। उन्होंने अनेकानेक उच्च कोटि की कविताएँ तथा कहानियाँ लिखीं, जो देशभर में बहुत प्रख्यात हुईं। 'खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थीÓ कविता सुभद्राकुमारी चौहानजी की ही है। दोनों ने मिलकर समाजसेवा के भी अनेक कार्य किए। पारिवारिक धर्म निभाते हुए भी राष्ट्रसेवा करने का यह एक अनुपम उदाहरण है।