हासन का आतंकी ज्ञान...

शक्तिसिंह परमार
भारत के रक्षामंत्री रहे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ए.के. एंटनी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की अपने इतिहास की सबसे करारी हार अर्थात दहाई अंक (44 सीटें) पर सिमट जाने के कारणों पर सोनिया-राहुल कांग्रेस को एक विस्तृत व विश्लेषण रिपोर्ट प्रस्तुत की थी...एंटनी की छवि कांग्रेस में बिना लाग-लपेटे के सच बयां करने वालों के रूप में ख्यात है...और उनका 'एंटनीÓ होने के साथ केरल में लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद के दायित्व निर्वाह के चलते उन्हें यह जिम्मेदारी संभवत: सोनिया-राहुल ने अपने विश्वस्त सूत्रों के मान से दी थी..,ताकि वे सोनिया-राहुल को 2014 की हार के कलंक से बेदाग निकालकर उनके मनमाफिक रिपोर्ट सौंप दें...लेकिन 'एंटनीÓ ने सोनिया-राहुल की छवि को बेदाग रखने या चमकाने के बजाय कांग्रेस की मरणासन्न स्थिति या कहें कि उसकी वैंटिलेटर पर पहुंचने के कारणों को खोजने में अत्यधिक दिलचस्पी दिखाई...और एंटनी ने अपनी रिपोर्ट में कांग्रेस पार्टी की करारी हार एकसूत्रीय और स्पष्ट कारण बताया था कि- 2014 तक जनता में कांग्रेस की सर्वाधिक हिन्दू विरोधी पार्टी के रूप में पहचान होना था... इसके लिए 10 वर्ष में संप्रग सरकार द्वारा मुस्लिमों को तुष्टिकरण की पराकाष्ठा वाला लॉलीपॉप देने के लिए भांति-भांति के धत्कर्म और गृहमंत्री से लेकर रक्षामंत्री व अन्य पदों पर बैठे वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं द्वारा हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी गढऩे का एकतरफा खेल जिम्मेदार था...इसलिए एंटनी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि 2014 में कांग्रेस अपनी मुस्लिमपरस्त एवं अति हिन्दू विरोधी छवि के चलते जनता की नजरों से उतरी...जब कांग्रेस को भी 2014 की हार के पीछे यह समझ आ गया कि- सिर्फ मुस्लिमों को दुलार कर और हिन्दुओं के खिलाफ बयान/निर्णय से काम नहीं चलेगा...तब कांग्रेसियों ने राहुल गांधी को 'शिवभक्तÓ, 'जनेऊधारीÓ बनाकर और 'दत्तात्रेय गौत्रÓ प्रदान करके मंदिर-मंदिर पूजा करने, धोक देने के लिए उतारा और बाद में प्रियंका को भी मंदिर-मंदिर नतमस्तक होने का 'नरम हिन्दुत्वÓ वाला खेल खेलने को ओग बढ़ाया...कहने का तात्पर्य यही है कि जब सत्ता से बेदखल हुए और सत्ता प्राप्ति की छटपटाहट में 'हिन्दू शरणम् गच्छामिÓ का भाव कांग्रेसियों में जागा...तभी तो वे अपने को मोदी व भाजपा से बड़ा हिन्दू बताने से नहीं अघा रहे..! दिग्विजय ने भी तो पूरे डेढ़ माह लोकसभा चुनाव में मंदिर-मंदिर और गौशालाओं में घूम-घूमकर हिन्दुओं को भ्रमित करने की तिकड़म भिड़ाई...लेकिन हिन्दुओं के हितैषी दिखने और स्वयं को बताने वाले ये सभी रंगे सियार (कांग्रेसी) उस कालनेमि और रावण की भांति हंै, जो छल-प्रपंच के जरिए लोगों की भावनाओं के साथ दिनदहाड़े खिलवाड़ को बच्चों का खेल समझ रहे हैं...
हिन्दू व हिन्दुत्व पर यहां इतने विस्तार से चर्चा इसलिए जरूरी है कि अब भारतीय सिनेमा में अपना बेहतर योगदान देने के बाद राजनीति के मैदान में उतरे अभिनेता कमल हासन को भी हिन्दू विरोध एवं हिन्दुत्व के खिलाफ भोंडे कुतर्क के जरिए ही स्वार्थ सिद्धि दिख रही है...वरना क्या कारण है कि सोमवार को कमल हासन को तमिलनाडु के पल्लापट्टी गांव, जो कि घनी मुस्लिम आबादी वाला है वहां यह शर्मनाक एवं हास्यास्पद बयान देना पड़े कि आजाद भारत का पहला हिन्दू आतंकवादी नाथूराम गोड़से था...सवाल यहां किसी व्यक्ति को बिना तथ्य, साक्ष्य और संदर्भ के आतंकवादी करार देने की मंदबुद्धि पर नहीं है..,बल्कि उस तथाकथित आतंकवादी की तुरंत धर्म के नाम पर पहचान कर लेने की कमल हासन की सामाजिक व धार्मिक वैज्ञानिक बौद्धिकता पर तरस भी है और हिन्दू जन-मन में आक्रोश भी...आखिर कमल हासन ने वर्ष 2000 में 'हे रामÓ फिल्म में स्वयं नाथूराम गोड़से की भूमिका का निर्वाह करते वक्त यही आतंकवादी वाला संबोधन या कहें जुमला स्वयं पर उद्धत क्यों नहीं किया..? आखिर करीब दो दशक बाद उन्हें यह कैसा दुर्लभ ज्ञान प्राप्त हो गया कि वे आतंकवादियों को भी धर्म के नाम से पहचानने लगे...क्या यह लोकसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मिलने और कांग्रेसियों की संगत में आने का प्रतिफल है..? अगर यह सच है तो 2014 का सोनिया-राहुल कांग्रेस का हश्र एक बार जरूर कमल हासन देख लें...क्योंकि फिलहाल तो वे राजनीति के मैदान पर नवांकुर हैं...हासन को याद रहे हिन्दुओं के खिलाफ और हिन्दू धर्म के विरोध में अनाप-शनाप कुतर्कों से उनकी राजनीति की गाड़ी ज्यादा दिन आगे नहीं बढ़ेगी...
चलो कमल हासन एक बार तुम्हारी नजरों व बुद्धि से मान लेते हैं कि नाथूराम गोड़से का कृत्य आतंकियों का था...और धर्म तुमने उनका बता ही दिया है...तो अब जरा विदेशी लुटेरे, आततायी आक्रांताओं मोहम्मद गोरी, मोहम्मद गजनवी, औरंगजेब, ओसामा बिन लादेन, हाफिज सईद, मसूद अजहर, दाऊद इब्राहिम, अफजल गुरु, याकूब मेमन, यासीन भटकल के भी धर्म बता दो..? यही कि किस धर्म का प्रतिनिधित्व करते हैं..? भारत में आजादी के बाद छोटे-बड़े 5 हजार से अधिक आतंकी हमले व विस्फोट हुए..,उनमें प्रत्येक में मुस्लिम ही पकड़ा गया है...आखिर आज तक इतनों को आपने कितनी बार धर्म के नाम से पहचाना और पुकारा..? जिस अकबर को आप महानता की श्रेणी में रखते हंै उसके भी कारनामे और हिन्दुओं को दी गई घोर यातनाओं पर भी कुछ बोल लो हासन...भारत में 14वीं शताब्दी में लुटेरा बनकर आए तैमूर लंगड़ा ने तो बाकायदा आदेश निकाल रखा था कि 13 साल से कम उम्र के जितने भी बच्चे शिक्षित हंै...उनके सिर धड़ से अलग कर दिए जाएं...क्योंकि उसे मालूम था कि शिक्षा का प्रकाश ही गुलामी व दासता की जंजीरें तोड़ता है...और तैमूर लंगड़ा के इसी फरमान पर करीब ढाई करोड़ हिन्दुओं का कत्लेआम कर दिया गया था... अभिनेता कमल हासन कभी इनके धर्म-कर्म पर भी फिल्म बनाओ और सच्चाई दिखाओ..,फिर राजनीति के मैदान में हाथ-पैर मारना...सवाल यह है कि जब नाचने-कूदने से इनका मन और जेब भर जाती है तो यह लोगों की भावनाओं से खेलने का रास्ता सियासत को समझ लेते हैं...कमल हासन भी उसी राह पर है..,लेकिन कांग्रेस के जिस दूषित व हिंसक विचार को आगे बढ़ाकर हिन्दुओं और हिन्दुत्व के विरोध में अपने को गढ़ रहे हैं...यही कुकृत्य कमल हासन को जल्दी ही राजनीति के हाशिये पर लाकर खड़ा करेगा...जरूरत है कि ऐसे शर्मनाक व भोंडे वक्तव्य देने वालों और इनके समर्थकों को अंतिम चरण के सियासी समर में 'वोटÓ की करारी चोट पहुंचाई जाए...उम्मीद है ऐसा ही होगा...क्योंकि इंतजार कीजिए लोकतंत्र के इस वैचारिक समर से आने वाले जनादेश के सिर्फ 9 दिन शेष... -