महान धर्मरक्षक गुरु अर्जुन देवजी
   Date26-Apr-2019

 
3 नवम्बर 1605 को मुगल बादशाह जहाँगीर आगरा की गद्दी पर बैठा। गद्दी पर बैठते ही उसने हिन्दुओं को मुसलमान बनाने का काम प्रारम्भ कर दिया। उधर भारत के संत-महात्मा, धर्माचार्य जनता को दृढ़ता से अपने धर्म पर अडिग रहने का उपदेश दे रहे थे। पंजाब में उस समय पाँचवे पातशाह गुरु अर्जुन देवजी का बड़ा प्रभाव था। बड़ी संख्या में लोग उनके प्रवचन सुनने आते थे और हिन्दू धर्म में दृढ़ निष्ठा का संकल्प लेते थे।
इन्हीं दिनों जहाँगीर का बड़ा बेटा खुसरो अपने बाप से बगावत कर गुरुजी की शरण में चला गया। इससे जहाँगीर आग बबूला हो गया। उसने अर्जुन देवजी को पकड़ कर लाहौर लाने का हुक्म दिया। मुगल बादशाह के सैनिक आदेश का पालन करते हुए। गोइन्दवाल पहुँचे और गुरु अर्जुन देव को अपने साथ लाहौर चलने के लिए कहा। गुरु अर्जुन देवजी आने वाले संकट को पहचान चुके थे। इसलिए उन्होंने अपने पुत्र हरगोविन्द को पहले ही उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। अत: अत्याचारी मुगलों का सामना करने के लिये वे सैनिकों के साथ चल दिये। उनके साथ भाई गुरुदास भी थे। लाहौर पहुँचने पर उन्हें जेल में बन्द कर दिया गया। जहाँगीर ने गुरु अर्जुन देव को मुसलमान बनने को कहा। गुरु जी के दृढ़ता से इन्कार कर देने के बाद इस्लाम के विरुद्ध काम करने के अपराध में दो लाख रुपये जुर्माना भरने तथा गुरु ग्रन्थ साहिब में इस्लाम की प्रशंसा शामिल करने को उनसे कहा। बादशाह का हुक्म सुनने के बाद गुरु अर्जुन देव ने कहा 'मैं जुर्माना क्यों भरूं? मैं तुम्हें बादशाह नहीं मानता और न ही तुम्हारे अत्याचारों के सामने झुकने को तैयार हूँ।Ó गुरुजी का उत्तर सुनकर जहाँगीर आपा खो बैठा और गुरुजी को सताने लगा।
जेल में उन्हें अनेकों कष्ट दिए गए। कुछ समय बाद जब मुगल सैनिकों ने उनसे बादशाह से माफी माँगने को कहा। गुरुजी का उत्तर अभी भी वही था। इससे चिढ़कर जहाँगीर ने हुक्म दिया - ''इस काफिर को दिनभर भूखा-प्यासा रखो तथा भीषण यातनाएं देकर मार डालो। वह ज्येष्ठ का महीना था। आकाश से आग बरस रही थी। गर्मी की तपन से लाहौर भी बुरी तरह तप रहा था।
मुगल सैनिकों ने पहले दिन गुरुजी को भूखा-प्यासा रखा। उन्हें रात में सोने भी नहीं दिया। गुरुजी चुपचाप कष्ट सहते रहे और हरि नाम का जाप करते रहे। दूसरे दिन मुगल सैनिकों ने एक विशाल चूल्हा बनाया। इस पर एक बड़ा कढ़ाहा रखकर गुरुजी को उसमें बिठाया गया। बिठाने के बाद इसे पानी से भरकर नीचे आग जला दी गई। कुछ देर में ही पानी उबलने लगा था। उस उबलते पानी में गुरुजी का शरीर बुरी तरह से जलने लगा। पूरे शरीर में फफोले पड़ गए। बादशाह के अत्याचार यहीं खत्म नहीं हुए। उसने सैनिकों को आदेश दिया- 'अरे मूर्खों! गर्म-गर्म रेत इसके सिर पर डालो, ताकि ये अपना अपराध स्वीकार करे।Ó सैनिकों ने उनके सिर पर गर्म-गर्म रेत डालना प्रारम्भ किया। फिर भी गुरुजी चुप रहे और जपुजी साहिब का पाठ करते रहे।