क्रांतिवारी गोपी मोहन
   Date13-Mar-2019
अंग्रेज पुलिस अधिकारी चाल्र्स टेगार्ट ने बंगाल के क्रांतिकारी आंदोलन को भारी नुकसान पहुंचाया था। 2 जनवरी 1924 को सुबह गोपी मोहन कोलकाता की सड़क पर घूम रहा था। उसने उसी सड़क पर टेगार्ट जैसे आदमी को भी घूमते देखा। गोपी मोहन ने अवसर पाकर उस आदमी पर गोली चला दी। वह वहीं धराशायी हो गया। पकड़े जाने पर गोपी मोहन को पता लगा कि मृतक टेगार्ट नहीं, बल्कि उसकी शक्ल जैसा एक व्यापारिक कंपनी का प्रतिनिधि था। गोपी को एक निरपराध के मारे जाने का बहुत दु:ख हुआ। गोपी को अदालत में प्रस्तुत किया गया, वहां धूर्त चाल्र्स टेगार्ट भी बैठा था। न्यायालय में बयान देते हुए गोपी मोहन टेगार्ट की ओर मुखातिब हुआ और कहा कि आप अपने आप को सुरक्षित मान रहे हैं, लेकिन यह न भूलें कि जो काम मैं नहीं कर सका, उसे मेरा कोई भाई शीघ्र ही पूरा करेगा। मेरी कामना है कि मेरे रक्त की प्रत्येक बूंद भारत के हर घर में आजादी के बीज बोये। 1 मार्च 1924 को भारत माँ के अमर सपूत गोपी मोहन ने फांसी के फंदे को चूम लिया।