निश्चित प्रारूप और निश्चित स्थान पर ही बनेगा राम मंदिर
   Date11-Mar-2019

 
ग्वालियर 10 मार्च (विप्र)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री सुरेश जोशी 'भैयाजी' ने कहा कि राम मंदिर अपने निश्चित प्रारूप में और अपने निश्चित स्थान पर ही बनेगा।
 
श्री भैयाजी जोशी ने आज यहां रा.स्व.संघ की अभा प्रतिनिधि सभा की बैठक के तीसरे दिन समापन अवसर पर रविवार को पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि वह उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित की गई समिति के निष्कर्षों को भी देख रहे हैं, लेकिन उसी स्थान पर उसी प्रारूप के बिना राम मंदिर के बारे में हम सोचेंगे भी नहीं। उन्होंने कहा कि 1980-90 के दशक से राम मंदिर का आंदोलन चल रहा है, वह मंदिर बनने के बाद ही समाप्त होगा। उन्होंने कहा कि संघ राम मंदिर में निष्ठा रखता है और उसके निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने पहले राम मंदिर का मुद्दा प्राथमिकता में नहीं है, कहने पर पीड़ा हुई और यह कहना हिन्दुओं को अपमानित करना जैसा था। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आस्था और अस्मिता का भी प्रश्र है। न्यायालय उसकी बाधाएं दूर करते हुए फैसला दे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि न्यायालय इसका फैसला देने में गति प्रदान करेगा। नरेन्द्र मोदी सरकार ने भी राम मंदिर के बारे में कुछ नहीं किया, के बारे में पूछे जाने पर श्री जोशी ने कहा कि सरकार संचालन करने वालों की क्या समस्याएं रही होंगी, वह नहीं कह सकते, लेकिन सत्ता में बैठे लोगों का भी राम मंदिर को लेकर विरोध नहीं है। यह पूछे जाने पर कि कमेटी द्वारा अगर राम मंदिर के पक्ष में फैसला नहीं दिया तो
 
उन्होंने कहा कि वह अगर-मगर नहीं जानते, कमेटी बनाकर एकमात्र हल निकालता है तो हम उसका स्वागत करेंगे। उन्होंने कहा कि श्री श्री रविशंकरजी इस कमेटी में हैं, कोई सकारात्मक हल जरूर निकलना चाहिए, यदि एक प्रतिशत भी गुंजाइश होगी तो हम स्वागत करेंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव के संदर्भ में हमारी भूमिका स्पष्ट है कि लोग अधिक से अधिक मतदान करें, लोग जागरूक होकर मतदान करें। यदि मतदान का प्रतिशत कम रहता है तो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक व्यक्ति अपने लिए समर्थन मांगने की इच्छा रखता ही है। उन्होंने कहा कि बैठक में संघ कार्य की समीक्षा और समसामयिक विषयों पर चिंतन किया गया। बैठक में इस बार पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में कार्य करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही सामाजिक समरसता पर और अधिक प्रभावी रूप से कार्य करने का आग्रह स्वयंसेवकों से किया गया है। उन्होंने कहा कि संघ कार्य एक मोड़ पर पहुंच चुका है, अब कार्य विस्तार की दृष्टि से एक बड़ी छलांग लेने की आवश्यकता है।उन्होंने बताया कि शबरीमाला मंदिर प्रकरण को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया, साथ ही श्री गुरु नानक देवजी के 550वें प्रकाश पर्व और जलियांवाला बाग के प्रेरणादायी बलिदान की शताब्दी पर वक्तव्य जारी किया है। साथ ही प्रदूषण पर्यावरण के प्रति जागरुकता, पौधारोपण प्लास्टिक से हो रहे पर्यावरण के नुकसान को लेकर प्लास्टिक मुक्त अभियान चलाने की आवश्यकता दोहराई। जल्लीकट्टू, शबरीमाला, दीपावली, हिन्दू परंपराओं को लेकर न्यायालयों के निर्णयों से संबंधित प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि समाज जीवन संविधान के साथ-साथ परंपरा, संस्कृति और मान्यताओं से चलता है। इस प्रकार के मामलों में समाज के प्रबुद्धजनों का मार्गदर्शन लेना चाहिए।