सफलता के सूत्र
   Date03-Dec-2019

prernadeep_1  H
प्रेरणादीप
ए क बार एक लड़का परीक्षा में फेल हो गया। साथियों ने उसके फेल होने का खूब मजाक उड़ाया। उसे वह बर्दाश्त नहीं कर पाया और घर लौटकर तनाव में डूब गया। उसके माता-पिता ने खूब समझाया 'बेटा! फेल होना इतनी बड़ी असफलता नहीं है कि तुम इतने परेशान हो जाओ और आगे के जीवन पर प्रश्नचिन्ह लगा बैठो। जब तक इंसान अच्छी-बुरी समस्या से नहीं गुजरता, तब तक बड़े काम नहीं कर सकता।Ó लेकिन उसे उन बातों से संतुष्टि नहीं हुई। अशांति और निराशा में उसे कुछ नहीं सूझा और रात में वह आत्महत्या करने को चल दिया। रास्ते में उसे एक बौद्ध मठ दिखाई दिया। वहाँ से कुछ आवाजें आ रही थीं। वह उत्सुकतावश बौद्ध मठ के अंदर चला गया। वहाँ उसने सुना, वह बौद्ध भिक्षुक कह रहा था- पानी मैला क्यों नहीं होता? क्योंकि वह बहता रहता है। उसके मार्ग में बाधाएं क्यों नहीं आती? क्योंकि वह बहता रहता है। पानी का एक बिन्दु झरने से नदी, नदी से महानदी और फिर समुद्र क्यों बन जाता है? क्योंकि वह बहता है। इसलिए मेरे जीवन, तुम रुको मत, बहते रहो। कुछ असफलताएँ आती हैं, पर तुम उनसे घबराओ मत। उन्हें लाँघकर मेहनत करते चलो। बहना और चलना ही जीवन है। असफलता से घबराकर रुक गए तो उसी तरह सड़ जाओगे, जैसे रुका हुआ पानी सड़ जाता है। यह सुनकर लड़के ने यह ठान लिया कि उसे भी बहते जल की ही भांति बनना है। इसी सोच के साथ वह घर की ओर मुड़ गया। अगले दिन वह सामान्य होकर विद्यालय की ओर चल दिया। बाद में वह वियतनाम के राष्ट्रनायक 'हो ची मिन्हÓ के रूप में जाना गया।