मानव शरीर कल्पवृक्ष
   Date02-Dec-2019

प्रेरणादीप
रू स के यासना पालीयाणा नामक एक छोटे से गाँव के निवासी महान दर्शनिक महात्मा लियो टॉलस्टॉय थे। महात्मा टॉलस्टॉय के पास एक युवक आया और बोला- मेरे पास एक भी पैसा नहीं है। मैं बड़ा निराश और दु:खी हूँ। टॉलस्टॉय ने युवक के प्रति सहानुभूति जताई। फिर बोले- मित्र! निराश मत होओ। तुम्हें सरलता से हजारों रुपए मिल सकते हैं। युवक ने उत्साहित होकर पूछा- वह कैसे? टॉलस्टॉय ने बताया- मेरा एक व्यापारी मित्र है। वह मानव अंगों को खरीदता है। तुम चाहो तो मैं तुम्हें उससे मिला दूँ। वह आँखों के बीस हजार, हाथों के पन्द्रह हजार और पैरों के दस हजार रुपए देता है। तुम उन्हें बेचकर सरलता से हजारों रुपए पा सकते हो। यह सुनकर युवक भौंचक्का रह गया। शरीर सम्पदा की तुलना में रुपए पैसे क्या मूल्य रखते हैं? हजारों तो क्या एक करोड़ रुपए में भी नहीं बेचूँगा। हँसकर टॉलस्टॉय बोले- जब तुम्हारे पास इतना बहुमूल्य शरीर है, तब तुम स्वयं को निर्धन कैसे समझते हो? तुम्हारा शरीर तो कल्पवृक्ष है। इसका ठीक से उपयोग करो, श्रम करो और सुख समृद्धि के स्थायी स्वामी बनो।