७० वर्षों से जारी नागरिकता अन्याय का अंत
   Date11-Dec-2019


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केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए नागरिकता संशोधन विधेयक-२०१९ में साफ-साफ लिखा है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीडऩ के शिकार अल्पसंख्यकों को नागरिकता मिलेगी।
भारत-पाकिस्तान बंटवारे के साथ ही धर्म के आधार पर यातनाएं झेलने को मजबूर हुए करोड़ों हिन्दुओं को शरणार्थी जीवन जीने के लिए पाकिस्तान-बांग्लादेश और अफगानिस्तान ने मजबूर किया, उस ७० वर्ष पुरानी भयावह भूल को सुधारने के लिए मोदी सरकार ने 'नागरिकता संशोधन विधेयक - २०१९Ó को दोनों सदनों (लोकसभा में ८० के मुकाबले ३११ और राज्यसभा १०५ के मुकाबले १२५ मतों से) में पारित करवाकर 'नागरिकता अन्यायÓ से मुक्ति की राह खोली है...
कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष दुष्प्रचार में लगा रहा
ठ्ठ विपक्ष द्वारा यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि इन तीनों देशों के सभी हिंदू अथवा अन्य अल्पसंख्यक नागरिकता प्राप्त करने के अधिकारी होंगे जो कि तथ्यहीन व गलत है।
ठ्ठ विपक्ष के राजनीतिक दल झूठा माहौल बना रहे हैं कि देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की दिशा में यह कदम है।
ठ्ठ सच यह है कि यह विधेयक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए धार्मिक प्रताडि़त शरणार्थियों को जगह देता है।
ठ्ठ ये तीनों ही राष्ट्र मुस्लिम राष्ट्र हैं, इसलिए वहां से धर्म के आधार पर प्रताडि़त मुस्लिमों का होना नामुमकिन है।
आजादी से लेकर आज तक कांग्रेस व साथियों के रहे दोहरे मापदंड - ठ्ठ रोहिंग्या से प्रेम, भारत की जड़ों से जुड़े नागरिकों का विरोध।
ठ्ठ कांग्रेस व विपक्षी दलों ने हमेशा आतंक, लूट-खसोट और आपराधिक गतिविधियों में फंसे रोहिंग्याओं को भारत से खदेडऩे का विरोध किया है।
ठ्ठ इन्होंने कभी भारत की जड़ों से जुड़े बेबस व लाचार पीडि़तों को देश की नागरिकता दिलाने की बात नहीं की।
ठ्ठ विपक्ष ने हमेशा संविधान के अनुच्छेद 14 का हवाला देकर इसे समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया और इनकी नागरिकता का सवाल टलता रहा।
मोदी-शाह की युति को नागरिकता सुधार पर ऐसे मिली सफलता
1 15 जून 2015 को आंकड़े जारी किए गए कि पाकिस्तान- अफगानिस्तान से 4300 हिंदू और सिख 1 वर्ष के अंदर शरणार्थी बनकर भारत आए।
1 19 जुलाई 2016 को नागरिकता संशोधन विधेयक को लोकसभा में प्रस्तुत किया।
1 12 अगस्त 2016 को इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया।
1 2.5 साल तक संयुक्त संसदीय समिति ने नागरिकता संशोधन सौदे का गहन अध्ययन किया।
1 जनवरी-2019 में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
1 जनवरी-2019 में विधेयक लोकसभा से पास हुआ, लेकिन राज्य सभा में रुक गया।
1 पिछली लोकसभा के भंग होने के साथ ही यह विधेयक स्वत: रद्द हो गया था।
1 लोकसभा में ९ दिसम्बर २०१९ को ३११ मतों के साथ, जबकि राज्यसभा में ११ दिसम्बर २०१९ को १२५ मतों के साथ नागरिकता संशोधन विधेयक २०१९ को मंजूरी मिली।