नागरिकता संशोधन विधेयक लोस में पारित
   Date10-Dec-2019

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विधेयक के पक्ष में 3११
नई दिल्ली द्य 9 दिसम्बर (वा)
सोमवार की रात भारतीय लोकतंत्र के लिए ऐतिहासिक रही जब नागरिकता संशोधन विधेयक -2019 पर करीब 8 घंठे लंबी बहस होने के बाद 80 के मुकाबले 311 मतों से लोकसभा में पारित हो गया। राज्यसभा में पारित होने के बाद यह कानून बना जाएगा। सरकार द्वारा संसद में सोमवार को पेश नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 में वर्ष 2015 से पहले से अवैध रूप से देश में रह रहे पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, पारसी और ईसाई संप्रदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव किया गया है। भारी हंगामे के बीच अपनी बात रखते हुए शाह ने विपक्ष को करारा जवाब दिया और कहा कि अगर कांग्रेस पार्टी देश की आजादी के समय धर्म के आधार पर देश का विभाजन नहीं करती तो इस विधेयक की जरूरत नहीं पड़ती। बाद में गृह मंत्री के जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और उसने विधेयक पेश करने के प्रस्ताव पर मतविभाजन की मांग की, जिसे 82 के मुकाबले 293 मतों से मंजूर कर लिया गया और श्री शाह ने विधेयक पेश किया। रात 12 बजे तक बहस के बाद इस ऐतिहासिक संशोधन विधेयक पर मत विभाजन की पक्रिया शुरु हुई। जिसमें संशोधन विधेयक के पक्ष में 311 व विरोध में सिर्फ 80 वोट डाले गए । उधर कांग्रेस के शशी थरूर व औवेशी समेत अन्य लोगों के ०० संशोधन भी
संशोधन भी खारिज हो गए। इसके पूर्व गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में यह विधेयक पेश किया।
इसके उद्देश्यों एवं कारणों में बताया गया है कि विधेयक के जरिए नागरिकता अधिनियम की अनुसूची तीन में संशोधन कर इन तीनों देशों के उपरोक्त छह संप्रदायों के लोगों के लिए स्थायी नागरिकता के आवेदन की शर्तों को आसान बनाया गया है। पहले कम से कम 11 साल देश में रहने के बाद इन्हें नागरिकता के लिए आवेदन का अधिकार था। अब इस समय सीमा को घटाकर पांच साल किया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि 31 दिसम्बर 2014 तक बिना वैध दस्तावेजों के इन तीन देशों से भारत में प्रवेश करने वाले या इस तिथि से पहले वैध रूप से देश में प्रवेश करने और दस्तावेजों की अवधि चूक जाने के बाद भी अवैध रूप से यहीं रहने वाले छह संप्रदायों के लोग नागरिकता के आवेदन के पात्र होंगे।