कश्मीर घाटी में स्थिति सामान्य - गृहमंत्री
   Date10-Dec-2019

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नई दिल्ली द्य 10 दिसम्बर (वा)
सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि कश्मीर घाटी में स्थिति सामान्य है तथा प्रशासन जब भी निर्णय करेगा, राजनीतिक दलों के एहतियान गिरफ्तार किए गए नेताओं को रिहा कर दिया जाएगा। उधर अनुसूचित जाति एवं जनजाति के आरक्षण की समयसीमा 2020 से दस साल और बढ़ाने तथा एंग्लो इंडियन समुदाय के लिए संसद एवं विधानसभाओं में आरक्षण समाप्त करने संबंधी संविधान (126वां संशोधन) विधेयक 2019 को लोकसभा ने आज पारित कर दिया।
गृह मंत्री अमित शाह ने प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी के एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि जहां तक घाटी की जनता का सवाल है तो उनकी स्थिति सामान्य है। उन्होंने विपक्षी कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा- कांग्रेस की स्थति मैं नॉर्मल नहीं कर सकता। उन्होंने कहा था कि अनुच्छेद 370 हटाने से वहां दंगे हो जाएंगे... लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
राजनीतिक दलों के नेताओं की रिहाई के बारे में श्री शाह ने कहा- हमें किसी को भी एक दिन ज्यादा रखने की इच्छा नहीं है। जब वहां का प्रशासन निर्णय करेगा, तब रिहाई हो जाएगी। कुछ सदस्यों द्वारा नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला की रिहाई का प्रश्न उठाने पर उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसी की सरकार ने श्री अब्दुल्ला के पिता को 11 वर्ष तक जेल में रखा था। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार स्थानीय प्रशासन के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं करती, यह कांग्रेस सरकारों की आदत रही होगी। सदन में हुए मतदान में सदन में मौजूद सभी 352 सदस्यों ने पक्ष में मत दिया और विरोध में कोई वोट नहीं पड़ा। इससे पहले सदन में करीब तीन घंटे तक चली चर्चा का जवाब देते हुए विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार अनुसूचित जाति एवं जनजाति के आरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है और इसे कभी नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री श्री मोदी की ओर से साफ करते हैं कि अनुसूचित जाति और जनजाति के आरक्षण में क्रीमीलेयर की बात करना गलत है। उन्होंने कहा कि चुनाव के पहले जानबूझकर आरक्षण को लेकर भ्रम फैलाया जाता है, पर वह प्रामाणिकता से बात कहते हैं कि ये सब गलत एवं भ्रामक है। श्री प्रसाद ने चर्चा में भाग लेने वाली महिला सदस्यों खासतौर पर श्रीमती हिना गावित, संघमित्रा मौर्य, शर्मिष्ठा सेठी आदि का जिक्र करते हुए कहा कि आरक्षण से आई इन सदस्यों ने आज अपने शानदार भाषण से साबित कर दिया है कि आरक्षण कितना उपयोगी है और इसका कितना लाभ है। उन्होंने कहा कि उन्होंने न्यायाधीशों से अनुरोध किया है कि वे कॉलेजियम के माध्यम से अनुसूचित जाति और जनजाति, महिला एवं पिछड़े वर्ग के लोगों के नामों की सिफारिशें करें ताकि इन समुदायों के लोग भी न्यायाधीश बनकर आएं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय न्यायिक सेवा में भी सरकार आरक्षण का प्रावधान करेगी। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के एक दलित जज को उच्चतम न्यायालय में लाया गया है और वह आगे चलकर मुख्य न्यायाधीश भी बनेंगे।