मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की कथा के दुर्लभ प्रसंग
   Date08-Nov-2019

धर्मधारा
भरतजी ही श्रीराम का प्रतिबिम्ब हैं
श्रीरामकथा के अल्पज्ञात दुर्लभ प्रसंग
भरतजी ही श्रीराम का प्रतिबिम्ब हैं
भारत की विभिन्न भाषाओं में रचित प्राय: सभी श्रीरामकथाओं में भरतजी श्रीरामजी के प्रतिबिम्ब के रूप में परिलक्षित होते हैं। जो श्रीराम हैं, वही भरतजी हैं। इस तरह श्रीराम एवं भरतजी एक ही हैं। हम श्रीरामकथाओं में भिन्न नहीं कर सकते हैं यथा-
भरतहि जानि राम परिछाहीं।।
श्रीरामचरित मानस अयो. 266-3
मानस में वर्णित श्रीरामकथा में श्रीराम के एवं भरतजी के चरित्र की मार्मिक कथाएँ पत्थर को भी पिघलानेवाली हैं। श्रीराम के वनगमन हो जाने तथा महाराज दशरथजी के परलोक गमन के पश्चात् भरत और शत्रुघ्न के ननिहाल से लौटने के उपरान्त ही भरतजी के चरित्र की विशेषताअेंा की झलक मानस में यत्र-तत्र-सर्वत्र अपनी अमिट छाप छोड़ती चली जाती है। भरत श्रीराम को महल में न देखकर अत्यन्त ही दु:खी हो जाते हैं। माता कैकेयी भरत को प्रसन्न करने के लिये सारी कथा सुना देती हैं। तब भरत दु:खी होकर उससे कहते हैं-
बर माँगत मन भइ न पीरा।
गरि न जीह मँुह परेउ न कीरा।।
श्रीरामचरितमानस अयो.162-2
माँ महाराज दशरथजी से दो वर माँगते हुए तुझे पीड़ा नहीं हुई। प्रथम वर में राज्य माँगते हुए तेरी जिव्हा गल क्यों नहीं गई तथा दूसरे वर में श्रीराम को वनवास माँगते हुए तेरे मँुह में कीड़े नहीं पड़ गये।
भरतजी ने मात्र इतना ही नहीं उससे भी अधिक माता कैकेयी को जो कुछ कहा वह श्रीरामचरित मानस में गूढ़ गम्भीर-चिन्तन-मनन करने का विषय है-
हंसबंसु दशरथु जनकु, राम लखन से भाइ।
जननी तूँ जननी भई, बिधि सन कछु न बसाइ।।
श्रीरामचरितमानस अयो.दो.161
भरत जी माता कैकेयी से कहते हैं मुझे सूर्यवंश, दशरथजी जैसे पिता और श्रीराम-लक्ष्मण जैसे भाई मिले, किन्तु हे जननी। मुझे जन्म देने वाली माता तू हुई।
क्या किया जाय विधाता के आगे किसी का कुछ भी वश नहीं चलता है-इस दोहे को वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकाण्ड में सर्ग 35 के सन्दर्भ में देखा जाए तो ऐसा भी संकेत एवं भावार्थ हो सकता है। भरत अपनी माता कैकेयी से कहते हैं कि हे माँ तू अपनी माता (नानी) के समान हो गई तथा जैसी तेरी माता माता न होकर कुमाता थी, तू ऐसी ही हो गई। इस कुमाता के प्रसंग को वाल्मीकि रामायण में श्रीराम के वनगमन के प्रसंग में मंत्री सुमंत्र एवं कैकेयी के बीच एक अन्तर्कथा के माध्यम से किया गया है- (क्रमश:)