सुरक्षा में सेंध की साजिशें...
   Date07-Nov-2019

देश में कानून व्यवस्था को बिगाडऩे और अराजक स्थिति को पसारने की साजिशों का खेल परवान चढऩे लगा है... क्योंकि देश की एकता-अखंडता को तोडऩे में विफल रहे घाटी में जड़ें जमा चुकी वे राष्ट्रघाती ताकतें अपने मंसूबे को भांति-भांति से आगे बढ़ा रही है... क्योंकि राज्य में अनुच्छेद 370 एवं 35ए का खात्मा होने के बाद जब दोनों राज्य जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केन्द्र शासित प्रदेश की भूमिका में आ चुके हैं, तब जो डर, भय दशकों से यह कहकर दिखाया या बताया जा रहा था कि यह 370 राज्य के लिए सुरक्षा कवच है, अगर इसे हटाया गया तो राज्य बर्बाद हो जाएगा... अब हमारे जांबाज सैनिकों व सतर्क पुलिस प्रशासन ने धरती के स्वर्ग जम्मू-कश्मीर को इस शिकंजे से मुक्त कराने में सफलता प्राप्त कर ली है, ऐसे में हताश-निराश दुराशक्तियां अब देश के अन्य हिस्सों को निशाना बनाने की साजिशें भिड़ा रही है... श्रीनगर में लालचौक के पास हरिसिंह हाईस्ट्रीट में गत सोमवार को ग्रेनेड हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि इसमें 3 सुरक्षाकर्मी सहित 35 लोग घायल भी हुए थे... यह धमाका दोपहर में 1.20 बजे उस समय हुआ, जब बाजार में भीड़ थी... इसके बाद लोगों की अफरा-तफरी में सहारनपुर के निवासी रिंकू सिंह की मौत हो गई... इस क्षेत्र में एक माह के अंदर आतंकियों का दूसरा हमला है... दो दिन पहले ही यहां पर सोपोर से एक स्थानीय आतंकवादी को पकड़ा था, क्योंकि उसे पेट्रोल पंप और बाजारों पर बम फेंकने की जिम्मेदारी दी गई थी... अब मंगलवार को पूर्वोत्तर राज्य के मणिपुर में राजधानी इम्फाल को दहशतगर्दों ने निशाना बनाया है... यहां पर भीड़ वाले इलाके में वाहनों के बीच शक्तिशाली आईईडी विस्फोटक किया गया, जिससे पांच पुलिसकर्मियों समेत एक नागरिक के भी घायल होने की जानकारी सामने आई है... उधर अयोध्या के संदर्भ में पुलिस प्रशासन जितना सतर्क हो रहा है और निगरानी तंत्र बढ़ा रहा है, उसी के मान से यह खूफिया जानकारी सामने आ रही है कि अयोध्या निर्णय के बाद यही खुराफाती ताकतें कश्मीर घाटी के बजाय उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों में हिंसक कृत्यों को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं... दिल्ली और उत्तर प्रदेश में तो बकायदा कुछ संदिग्ध आतंकवादियों के प्रवेश की भी सूचनाएं सामने आ रही है... कुल मिलाकर यहां स्थिति ऐसी बनती जा रही है कि जो खुराफाती लोग पाकिस्तान के प्रश्रय के बल पर या फिर कट्टरपंथी धड़ों की साजिशों के बल पर शांत जम्मू-कश्मीर को अब अशांति की आग में नहीं धकेल पाए, वे अब भारत के अन्य राज्यों में अपनी गतिविधियों को अंजाम देने में लगे हुए हैं... इस दृष्टि से देखा जाए तो यह पूरा नवंबर माह और बल्कि आगामी दिसंबर तक स्थिति सुरक्षा के मान से बहुत ही संवेदनशील स्थिति में है... क्योंकि अयोध्या मामले पर न्यायालय का फैसला आसन्न है, ऐसे में वे खुराफाती ताकतें अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने में कोई कसर नहीं छोडऩे वाले हैं, इसलिए सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि राज्यों के नेतृत्व एवं उनके पुलिस बल को भी ऐसी नापाक साजिशों को ध्वस्त करने के लिए तैयार रहना होगा...
दृष्टिकोण
पुलिस व वकीलों की नैतिकता..?
दिल्ली की तीस हजारी अदालत में जो घटनाक्रम पुलिस और वकीलों के बीच घटित हुआ है, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के अन्तर्गत दो जिम्मेदार पहलुओं की न केवल लापरवाही को उजागर कर रहा है, बल्कि इन दोनों समाज-राष्ट्र के प्रति जवाबदेह पक्षों की नैतिकता और उस संवेदनशील व्यवहारिकता पर भी सवालों का घेरा लगा रहा है, जो न केवल कानून की रक्षा करने और हर हाल में न्याय दिलाने का दावा करने से दिन-रात अघाते नहीं है... दिल्ली की इस झड़प वाले मामले में ताली एक हाथ से नहीं बजती की तर्ज पर यह कहना लाजमी होगा कि दोनों पक्ष कहीं न कहीं बराबर के दोषी है... पुलिस की बात करे तो इसमें कोई दो राय नहीं है कि पुलिस का कार्य-व्यवहार आज सामान्यजन के लिए दुविधा का कारण न केवल बन गया है, बल्कि उसे संदिग्ध मानकर लोग उसके करीब जाने में परहेज करते हैं... क्योंकि अनेकों बार पुलिस अपनी हठधर्मिता दिखाने के लिए नियमों को ताक में रखने से बाज नहीं आती... फिर ऊपर से खाकी का रौब इतना घातक रहता है कि मानो सारी लोकतांत्रिक ताकत इन्हीं के पास है, हर छोटे से बड़े पुलिसवाले में सिंघम दहाडऩे लगता है... यही अनेक बार इनकी किरकिरी भी कराता है... फिर न्याय की रक्षा का दंभ भरने वाले वकील भी कहां पीछे हैं, हर बात में पैतरेबाजी और जब आप न्यायालय में पेश किए जाने वाले आरोपी-दोषी के साथ ही जुतम-पैजार पर उतर आते हो, जो कि आपका काम नहीं है... अपराध के आरोपी को दोषी करार देना और सजा करार देना न्यायालय के हाथ में है, लेकिन न्याय मंदिर के नुमाइंदे ही जब न्याय की तराजू को अपने हाथों से संचालित करने लगेंगे तो दिल्ली जैसा घटनाक्रम होते देर नहीं लगेगी...