श्रेष्ठता का अर्थ
   Date07-Nov-2019

प्रेरणादीप
स्वा मी विवेकानंद एक बार अमेरिका की एक सड़क से गुजर रहे थे। स्वामी जी गेरुए वस्त्र धारण किए हुए थे। उनकी विचित्र वेशभूषा देखकर लोगों ने समझा यह कोई मूर्ख है। उनके पीछे हंसी-मजाक करती हुई एक भारी भीड़ चल पड़ी। स्वामीजी थोड़ा चलकर रुके और भीड़ की ओर देखते हुए बोले-'सज्जनों! आपके देश में सभ्यता की कसौटी पोशाक है, पर मैं जिस देश से आया हूं वहां कपड़ों से नहीं, मनुष्य की पहचान उसके चरित्र से होती है।Ó स्वामीजी के तेजस्वी वचन सुनकर सारी भीड़ स्तब्ध रह गई। स्वामीजी सहज भाव से आगे बढ़ गए। वस्तुत: व्यक्ति की परख उसके बाह्य रूप से व वेशभूषा से नहीं, अंत:करण की श्रेष्ठता से की जाती है।