अयोध्या पर फैसले को सभी स्वीकार करें
   Date07-Nov-2019

जमीयत-ए-उलेमाए हिन्द के अध्यक्ष ने कहा - देश की अखंडता-एकता के लिए मामले का समाधान जरूरी
नई दिल्ली द्य 6 नवम्बर (वा)
जमीयत-ए-उलेमाए हिन्द के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने लोगों से श्रीराम जन्मभूमि और बाबरी ढांचा मामले पर अदालत के फैसले को स्वीकार करने और देश में शांति बनाए रखने की एक बार फिर अपील की है लेकिन यह भी कहा है कि यह मामला एक नासूर का रूप धारण कर गया है जिसका समाधान किया जाना देश की अखंडता और एकता के लिए आवश्यक है। मदनी ने सभी पक्षों से स्पष्ट कहा कि अयोध्या पर न्यायालय के फैसले को शांतिपूर्ण तरीकें से स्वीकार करें।
श्री मदनी ने आज यहां पत्रकारों से कहा कि बाबरी ढांचा का मुद्दा स्वतंत्रता के पहले और आजादी के बाद भी एक गंभीर समस्या बना हुआ है और जमीयत-ए-उलेमाए हिन्द ने इसे सड़कों का मुद्दा बनाने के बजाय कानूनी तरीके से हल करने की कोशिश की। यह लड़ाई हालांकि काफ़ी लंबी हो गई और यह मामला उच्चतम न्यायालय में आया तो हमने अपने सबूत पेश किए। अब अदालत का जो भी फैसला आएगा, हमें स्वीकार होगा। उन्होंने कहा कि बाबरी ढांचा का मुकदमा केवल एक भूमि की लड़ाई नहीं है बल्कि यह मामला देश में संविधान और कानून की सर्वोच्चता का मामला है और प्रत्येक न्याय प्रिय व्यक्ति चाहता है कि सबूत और कानून के अनुसार इस मामले का फैसला हो। उन्होंने कहा कि अदालत कह चुकी है कि यह मुकदमा केवल स्वामित्व है। मौलाना मदनी ने मुस्लिम संगठनों सहित सभी हिन्दू संगठनों और भारतीयों से अपील की कि वह इस फैसले को दिल से स्वीकार करें और देश में शांति बनाए रखें। उन्होंने कहा कि देश में शांति और व्यवस्था कायम रही तो तरक्की होगी और अगर शांति भंग होगी तो देश बर्बाद होगा। उन्होंने कहा कि सभी मुस्लिम संगठन, सभी हिन्दू संगठन विहिप-बजरंग दल, संत समिति और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व सरकार इस रुख पर कायम हैं कि फैसला जो भी आए हम शांति बनाए रखेंगे। कश्मीर मामले में जमीयत ने स्टैंड दोहराते हुए कहा कि सरकार को वहां के लोगों को विश्वास में लेना चाहिए और उनसे बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज तक जम्मू-कश्मीर के हालात सामान्य नहीं हुए, वहां आम नागरिकों को बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सैकड़ों युवकों को जेल में बंद कर दिया गया है और किसी को उनकी खबर नहीं है। उन्होंने कहा कि समस्याएं केवल बातचीत से हल हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि मामला उच्चतम न्यायालय में है और उन्हें उम्मीद है कि कश्मीर के लोगों को न्याय मिलेगा।