मुक्त व्यापार व्यवस्था को भारत की ना...
   Date06-Nov-2019

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे थे, इस दौरान उनकी जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तृत बैठक भी हुई... प्रधानमंत्री की इस विदेश यात्रा का सबसे अहम बिन्दु या पड़ाव वह विषय रहा, जिसका लंबे समय से भारत में विरोध भी हो रहा था और जिन देशों की भारत के मुक्त व्यापार पर निगाहें लगी हुई थी, उनको भी भारत के रुख से पहली बार न केवल निराशा हाथ लगी, बल्कि भारत में भी केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार की इस पहल से सकारात्मक संदेश जाने की राह खुल गई है... क्योंकि डब्ल्यूटीओ के अन्तर्गत 1991 के आर्थिक उदारीकरण के दौर के बाद भारत में लगातार मुक्त व्यापार के बहाने अनेक तरह की व्यवस्थाओं को आमजन पर थोपा गया था... ऐसे में कुछ निर्णय भाजपानीत सरकारों को भी अटलजी के समय और मोदीजी के समय न करके भी ओढऩे या कहें कि स्वीकार करना पड़े थे.., लेकिन अब स्थितियां बदल रही है, बदलती स्थितियों के मान से जिस तरह से भारत अपने निजी हितों, व्यापार-व्यवसाय एवं आमजन की कार्य कुशलता की मान से व्यापार-उद्योग, व्यवसाय एवं उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण हेतु मजबूती के साथ खड़ा हो रहा है, उससे भविष्य में भारत की व्यापार व्यवस्था एवं उपभोक्ता हितों की संरक्षण संस्कृति को बढ़ावा मिलना निश्चित है...
सोमवार को बैंकॉक में प्रधानमंत्री मोदी ने दक्षिण पूर्वी एवं पूर्व एशिया के 16 देशों के बीच मुक्त व्यापार व्यवस्था के लिए प्रस्तावित क्षेत्रीय समग्र आर्थिक साझेदारी अर्थात् आरसीईपी जिसे रिजनल कंप्रिहेसिव इकानोमिक पार्टनरशिप नाम दिया गया है... इस समझौते को भारत के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे मानने से या इसमें शामिल होने से इंकार करते हुए इस समझौते पर हस्ताक्षर से इंकार कर दिया... क्योंकि यह समझौता भारत में लाखों लोगों के जीवन एवं उनकी अजीविका पर सीधा प्रतिकूल असर डालता है... प्रधानमंत्री मोदी ने शिखर बैठक में इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करने की जानकारी से अवगत भी करा दिया और यही नहीं इस निर्णय के संबंध में उन्होंने अपना व्यापक दृष्टिकोण भी रख दिया... उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सिद्धांत और मेरा स्वयं का जमीर आरसीईपी में शामिल होने की अनुमति नहीं देता... अब वो दिन हवा हुए, जब वैश्विक समझौते के लिए भारत पर बड़ी शक्तियों का दबाव रहता था.. अब भारत अपने हितों के संरक्षण हेतु पूर्णत: प्रतिबद्ध और सक्षम है... आरसीईपी के इस समूह में चीन, आस्ट्रेलिया, जापान, द. कोरिया, न्यूजीलैंड, वियतनाम, थाईलेंड, इंडोनेशिया, फिलिपिंस, ब्रुनेई, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, सिंगापुर व कम्बोडिया शामिल है... विशेष रूप से चीन, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे देशों को भारत के इस निर्णय से करारा झटका लगा है, क्योंकि इन देशों की भारत के विशाल घरेलू बाजार पर निगाहें थी... अगर भारत इस पर हस्ताक्षर करता या इसे अनुमति देता तो भारत के छोटे उद्यमियों, व्यापारियों व किसानों के साथ ही अन्य कुशल-अकुशल लोगों के हितों पर सीधा विपरीत असर पड़ता... भारत में इसका लंबे समय से विरोध हो रहा था, भारत ने आरसीईपी को ना कहकर भारतीयों हितों के पक्ष में मजबूती से खड़े होने का साहस दिखाया है.., जिसके लिए मोदी जैसे नेतृत्व की तारीफ देशवासियों को करना चाहिए...
दृष्टिकोण
आंदोलन के बहाने आरोप-प्रत्यारोप...
मध्यप्रदेश में विपक्ष में बैठी भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को राज्य के सभी जिला मुख्यालय पर किसान आक्रोश आंदोलन का आयोजन किया... इस प्रदर्शन के बहाने भाजपा ने अपनी एकता व ताकत का प्रदर्शन करने की भी कोई कसर नहीं छोड़ी.., लेकिन जिस तरह से फीका प्रदर्शन नजर आया, उससे भाजपा संगठन और कार्यकर्ताओं को लेकर सवाल-संशय खड़े होने लगे हैं... क्योंकि अब ज्यादा समय नहीं है, निकाय चुनाव के बाद पंचायत चुनाव भी होना है... फिर निकाय से लेकर पंचायत तक के जो 1-1 पद के लिए दर्जन-दर्जनभर दावेदार मैदान में ताल ठोंक रहे हैं, वे पार्टी की रीति-नीति के अनुसार संगठन के प्रदर्शनों, आयोजनों में कितनी भीड़ जुटा पाते हैं और उसे प्रभावी बना पाते हैं, इसका भी आंकलन जरूरी है... हालांकि जिस तरह के आरोप भाजपा ने प्रदर्शन के दौरान लगाए, उसमें कुछ हद तक सच्चाई भी है, क्योंकि कांग्रेस को अपने चुनावी वादों को पूरा करने में लगातार खजाना खाली होने का बहाना बनाना पड़ रहा है... इसके लिए उन्हें चुनाव पूर्व वादों की सूची और भविष्य में जो विरासत मिलेगी, उस पर भी विचार करना था... इसलिए कांग्रेस तो अब ऐसे प्रदर्शनों के जवाब में कोई दूसरा विरोध या प्रदर्शन करने की स्थिति में नहीं है... यही हाल सोमवार को रहा... भाजपा के विरोध में मुट्ठीभर कांग्रेस भी एकत्रित नहीं हुए... उधर वर्तमान मुख्यमंत्री कमलनाथ पूरे मामले में केन्द्र सरकार पर आरोप लगाकर पल्ला झाड़ रहे है तो पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राज्य की कमलनाथ सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं गवा रहे हैं...